उकाई डैम के 54 वर्ष: दक्षिण गुजरात को सिंचाई, बिजली और पेयजल देने वाली 'वल्लभ सागर' की कहानी

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उकाई डैम के 54 वर्ष: दक्षिण गुजरात को सिंचाई, बिजली और पेयजल देने वाली 'वल्लभ सागर' की कहानी

तापी नदी पर बना उकाई डैम — जिसे 'वल्लभ सागर' भी कहते हैं — 54 वर्षों से दक्षिण गुजरात की जीवनरेखा बना हुआ है। 1972 में स्थापित इस बांध ने 3.31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया है और 305 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता के ज़रिए पिछले सात वर्षों में ₹1,000 करोड़ मूल्य की बिजली उत्पादित की है। सूरत, तापी, नवसारी और वलसाड सहित पाँच ज़िलों के करोड़ों लोगों की आजीविका और प्यास इसी बांध पर टिकी है।

डैम की संरचना और इंजीनियरिंग विशेषताएँ

उकाई डैम की कुल लंबाई 4,900 मीटर और ऊँचाई 345 फीट है — लगभग 30 मंजिला इमारत के बराबर। इसका कैचमेंट एरिया 62,225 वर्ग किलोमीटर में फैला है और वाटर स्टोरेज कैपेसिटी 7,414 मिलियन क्यूबिक मीटर है। इंजीनियरिंग कौशल का यह बेजोड़ उदाहरण आज भी अपनी मूल क्षमता के साथ कार्यरत है।

कृषि और किसानों पर प्रभाव

डैम से सूरत, तापी, नवसारी और वलसाड समेत दक्षिण गुजरात के कई ज़िलों की 3.31 लाख हेक्टेयर भूमि पूरे वर्ष सिंचित होती है। किसान चंदूभाई गामित ने कहा,

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