10 अक्टूबर 2026
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68,500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण विसंगति पर लखनऊ में प्रदर्शन, संजय निषाद ने CM स्तर पर चर्चा का दिया आश्वासन

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68,500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण विसंगति पर लखनऊ में प्रदर्शन, संजय निषाद ने CM स्तर पर चर्चा का दिया आश्वासन

सारांश

उत्तर प्रदेश में 68,500 शिक्षक भर्ती की आरक्षण विसंगतियों पर अभ्यर्थियों का गुस्सा शनिवार को लखनऊ में फूटा। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के आवास पर घेराव के बाद मंत्री ने मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा का आश्वासन दिया — लेकिन ठोस समाधान की राह अभी बाकी है।

मुख्य बातें

68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगतियों को लेकर अभ्यर्थियों ने 10 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में कैबिनेट मंत्री डॉ.
संजय निषाद के आवास पर प्रदर्शन किया।
अभ्यर्थियों ने भर्ती परिणाम संशोधित कर न्याय दिलाने की माँग की; प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल तैनात रहा।
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में कथित तौर पर अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी की बात कही गई है।
मंत्री निषाद ने आरोपों को सीधे 'घोटाला' कहने से परहेज किया; जाँच पूरी होने तक इसे 'विसंगति' कहा।
टीजीटी-पीजीटी भर्ती में पूर्व सैनिकों के क्षैतिज आरक्षण का मुद्दा भी उठाया गया।
मंत्री के आश्वासन के बाद धरना समाप्त; अभ्यर्थियों की निगाहें CM और कैबिनेट स्तरीय चर्चा पर टिकीं।

उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को दूर करने की माँग को लेकर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के आवास पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने घेराव कर प्रदर्शन किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुँचे इन अभ्यर्थियों ने भर्ती परिणाम संशोधित कर उन्हें न्याय दिलाने की माँग उठाई। मंत्री के आश्वासन के बाद धरना शांतिपूर्वक समाप्त हो गया।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने 'निषाद चाचा बाहर आओ' के नारे लगाए और मांग की कि भर्ती प्रक्रिया में हुई आरक्षण विसंगतियों को तत्काल सुधारा जाए। मौके पर पुलिस बल भी तैनात रहा। बाद में मंत्री संजय निषाद ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएँ सुनीं।

इस दौरान टीजीटी-पीजीटी भर्ती में पूर्व सैनिकों को मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण का मुद्दा भी उठाया गया। मंत्री ने कहा कि यह विषय उनके संज्ञान में आया है और इस पर आगे चर्चा होगी।

मंत्री की प्रतिक्रिया

मीडिया से बातचीत में डॉ. संजय निषाद ने कहा कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी होने की बात स्वीकार की गई है। उन्होंने कहा, 'इंसाफ माँगना हर आदमी का हक है और हम लोगों ने इंसाफ दिलाने का संकल्प लिया है।'

निषाद ने भरोसा दिलाया कि इस मामले पर मुख्यमंत्री, सरकार और कैबिनेट के स्तर पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर किसी विसंगति के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो उस पर भी विचार किया जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि वे शोषितों, वंचितों, पिछड़ों और दलितों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं।

घोटाले के आरोपों पर सतर्क रुख

68,500 और 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने आरोपों को सीधे तौर पर 'घोटाला' कहने से परहेज किया। उन्होंने कहा, 'जाँच में जब आ जाए कि यह गलत हुआ है, तब उसको दूसरा शब्द दे सकते हैं। लेकिन तब तक कहते हैं कि त्रुटियाँ होती हैं, विसंगतियाँ होती हैं।'

निषाद ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले को घोटाला कहने से पहले जाँच ज़रूरी है और अभी इसे प्रशासनिक विसंगति के रूप में देखा जाना चाहिए।

आरक्षण और सामाजिक न्याय पर जोर

मंत्री ने आरक्षण को संवैधानिक व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़ा मूल अधिकार बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पिछड़े, शोषित और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने प्रदर्शन के औचित्य पर कहा, 'नहीं माँगेंगे, नहीं आंदोलन करेंगे तो कोई सुनने वाला थोड़ी है। आंदोलन से ही देश आजाद हुआ, आंदोलन से ही हक मिलता है।'

आगे क्या होगा

मंत्री के आश्वासन के बाद अभ्यर्थियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। अब उनकी निगाहें मुख्यमंत्री और सरकार के स्तर पर होने वाली संभावित चर्चा पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि क्या सरकार 68,500 भर्ती के परिणाम में संशोधन की दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है या अभ्यर्थियों को एक बार फिर केवल आश्वासन से संतोष करना पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

अदालती चुनौतियों और राजनीतिक आश्वासनों के चक्र में फँसती रहती हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का हवाला देना महत्वपूर्ण है — यदि सरकारी निकाय ही नाइंसाफी मान चुका है, तो प्रशासनिक सुधार में देरी जवाबदेही का सवाल उठाती है। 'विसंगति' और 'घोटाला' के बीच की भाषाई सावधानी राजनीतिक दृष्टि से समझ में आती है, लेकिन अभ्यर्थियों के लिए यह अंतर निरर्थक है जब तक परिणाम नहीं बदलता। असली परीक्षा अब यह है कि मुख्यमंत्री स्तर की 'संभावित चर्चा' कितनी जल्दी और कितनी ठोस दिशा में आगे बढ़ती है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति का मामला क्या है?
उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में कथित तौर पर आरक्षण नियमों के अनुपालन में त्रुटियाँ हुई हैं, जिसके कारण पिछड़े और वंचित वर्गों के कई अभ्यर्थी अपना हक पाने से वंचित रह गए। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में भी इस नाइंसाफी का उल्लेख बताया गया है।
अभ्यर्थियों ने संजय निषाद के आवास पर प्रदर्शन क्यों किया?
अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद को इसलिए चुना क्योंकि वे पिछड़े और वंचित वर्गों के प्रमुख राजनीतिक प्रतिनिधि माने जाते हैं। उनकी माँग थी कि मंत्री सरकार के भीतर उनकी आवाज़ उठाएँ और भर्ती परिणाम संशोधित कराएँ।
संजय निषाद ने प्रदर्शनकारियों को क्या आश्वासन दिया?
मंत्री निषाद ने वादा किया कि वे इस मामले को मुख्यमंत्री, सरकार और कैबिनेट के स्तर पर उठाएँगे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बात कर विसंगतियाँ दूर करने का प्रयास करने की भी बात कही।
क्या सरकार ने इसे घोटाला माना है?
नहीं। मंत्री संजय निषाद ने 68,500 और 69,000 भर्ती में हुई अनियमितताओं को सीधे 'घोटाला' कहने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि बिना जाँच के किसी मामले को घोटाला नहीं कहा जा सकता और अभी इसे 'विसंगति' के रूप में देखा जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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