2 नवंबर 2026
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68,500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण विसंगति पर 63 दिन से धरनारत अभ्यर्थियों का विधानसभा के बाहर प्रदर्शन, पुलिस ने बसों में भरकर ईको गार्डन भेजा

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68,500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण विसंगति पर 63 दिन से धरनारत अभ्यर्थियों का विधानसभा के बाहर प्रदर्शन, पुलिस ने बसों में भरकर ईको गार्डन भेजा

सारांश

63 दिन का धरना, सात दिन की भूख हड़ताल, दर्जनों ज्ञापन — और अब विधानसभा के बाहर सड़क पर बैठकर विरोध। उत्तर प्रदेश के 68,500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी ओबीसी आरक्षण की विसंगति सुधारने की माँग पर अड़े हैं, पर सरकार की ओर से ठोस लिखित जवाब अब तक नहीं आया।

मुख्य बातें

2 नवंबर 2026 को सैकड़ों अभ्यर्थियों ने लखनऊ विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया; पुलिस ने बसों से ईको गार्डन भेजा।
अभ्यर्थी 63 दिनों से ईको गार्डन में धरने पर हैं और 7 दिनों से भूख हड़ताल भी जारी है।
माँग: ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए 40% (150 में 60 अंक) अर्हता के आधार पर 68,500 भर्ती के परिणाम संशोधित हों और नियुक्ति पत्र दिए जाएँ।
10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की बैठक में मुख्यमंत्री तक मामला पहुँचाने का आश्वासन मिला था, पर ठोस निर्णय नहीं हुआ।
'दस्तक दो अभियान' के तहत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई मंत्रियों और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं।
अभ्यर्थियों ने राज्य व राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एवं विधान परिषद समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए; दावा है कि संस्तुतियाँ उनके पक्ष में हैं।

उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती 2018 में आरक्षण विसंगति को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन 2 नवंबर 2026 को और उग्र हो गया, जब पिछले 63 दिनों से लखनऊ के ईको गार्डन में धरना दे रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के सामने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया। सरकार से संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र ओबीसी अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की माँग कर रहे इन प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जबरन हटाकर बसों से वापस ईको गार्डन पहुँचा दिया, जिस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प भी हुई।

आरक्षण विसंगति का मूल विवाद

अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों पर समान अर्हता मानक लागू किए गए, जबकि ओबीसी वर्ग को नियमानुसार आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। उनका दावा है कि इससे बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए। अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा नियमावली, उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली और एनसीटीई की गाइडलाइन की अनदेखी का आरोप भी लगाया है।

उनकी मुख्य माँग है कि ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए 150 में से 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर परिणाम संशोधित किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएँ। इसके साथ ही आरक्षण विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की निष्पक्ष जाँच की माँग भी उठाई गई है।

संस्थागत समर्थन के बावजूद निर्णय नहीं

अभ्यर्थियों के अनुसार, उन्होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष अपने साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि इन संस्थाओं ने उनके पक्ष में संस्तुतियाँ और आदेश जारी किए हैं, फिर भी सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह मामला उठाया गया था। उस बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी, बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। मंत्री ने मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई लिखित निर्णय नहीं आया।

सरकार के दरवाज़ों तक पहुँचा 'दस्तक दो अभियान'

अभ्यर्थियों ने पिछले 63 दिनों में 'दस्तक दो अभियान' के तहत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री ओमप्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल, अनिल कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सहित दर्जनों जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे। अभ्यर्थियों का कहना है कि आश्वासन तो मिले, लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई।

गौरतलब है कि सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने सोमवार को सड़क पर बैठकर प्रदर्शन तेज किया। महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थी तमाम कठिनाइयों के बावजूद न्याय की उम्मीद में डटे हुए हैं।

आम जनता और अभ्यर्थियों पर असर

धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण नियमों के पालन और नियुक्ति पत्र पाने के लिए है। पुलिस द्वारा अभ्यर्थियों को बसों में भरकर हटाए जाने की घटना ने आंदोलन में नई ऊर्जा भरने का काम किया है। अभ्यर्थियों ने साफ कहा है कि शासन से ठोस लिखित निर्णय मिलने तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।

यह विवाद ऐसे समय में और गहराया है जब उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन के और विस्तार लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

राष्ट्रीय और राज्य आयोगों की संस्तुतियाँ, और मंत्री स्तरीय बैठक के बावजूद लिखित आदेश का न आना — यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि आरक्षण नीति के क्रियान्वयन में जवाबदेही के व्यापक अभाव का संकेत है। उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों में ओबीसी आरक्षण के लाभ को लेकर यह पहला विवाद नहीं है, लेकिन संस्थागत समर्थन के बाद भी सरकारी निष्क्रियता असाधारण है। सात दिन की भूख हड़ताल और पुलिस की कार्रवाई ने जो संकेत दिया है, वह यह है कि आंदोलन का दायरा और तीव्रता आने वाले दिनों में बढ़ सकती है — और तब यह मामला केवल शिक्षा विभाग का नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का प्रश्न बन जाएगा।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति का विवाद क्या है?
उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती 2018 में ओबीसी अभ्यर्थियों पर सामान्य वर्ग के समान अर्हता मानक लागू किए गए, जिससे उन्हें नियमानुसार आरक्षण का लाभ नहीं मिला। अभ्यर्थियों की माँग है कि ओबीसी वर्ग के लिए 150 में 60 अंक (40%) के आधार पर परिणाम संशोधित कर नियुक्ति पत्र दिए जाएँ।
अभ्यर्थी कब से और कहाँ धरना दे रहे हैं?
अभ्यर्थी लखनऊ के ईको गार्डन में 63 दिनों से धरने पर हैं। 2 नवंबर 2026 को उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा के सामने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें जबरन बसों में बिठाकर ईको गार्डन वापस भेज दिया।
सरकार ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें मंत्री ने मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का आश्वासन दिया था। हालाँकि, अभ्यर्थियों के अनुसार आश्वासन के बावजूद अब तक कोई ठोस लिखित निर्णय नहीं हुआ है।
क्या किसी आयोग ने अभ्यर्थियों के पक्ष में कोई निर्णय दिया है?
अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उनके अनुसार इन संस्थाओं ने उनके पक्ष में संस्तुतियाँ और आदेश जारी किए हैं, परंतु सरकार ने अभी तक इन पर अमल नहीं किया।
आंदोलन आगे क्या रूप ले सकता है?
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक शासन से ठोस लिखित निर्णय नहीं मिलता, उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। सात दिन की भूख हड़ताल और विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के बाद पुलिस से झड़प ने आंदोलन की तीव्रता बढ़ा दी है।
राष्ट्र प्रेस
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