68,500 शिक्षक भर्ती: लखनऊ में अभ्यर्थियों ने मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के आवास का घेराव किया, ओबीसी को 5% छूट की मांग
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 के अभ्यर्थियों ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के आवास पर प्रदर्शन किया और संशोधित परिणाम जारी करने की माँग को लेकर ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों की मुख्य माँग है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों को उत्तीर्णांक में 5 प्रतिशत की छूट दी जाए और नई चयन सूची तैयार की जाए।
मुख्य घटनाक्रम
'दस्तक दो अभियान' के तहत इस प्रदर्शन का नेतृत्व अभ्यर्थी तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पहले ही ओबीसी अभ्यर्थियों को उत्तीर्णांक में 5 प्रतिशत की छूट देने और सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान करने की संस्तुति कर चुका है, इसके बावजूद अभ्यर्थियों को अभी तक न्याय नहीं मिला।
प्रदर्शन के बाद पुलिसकर्मियों ने अभ्यर्थियों को बस में बैठाकर ईको गार्डन स्थित धरना स्थल भेज दिया।
अभ्यर्थियों की माँगें
अभ्यर्थियों ने माँग की कि 150 में से 60 अंक — यानी 40 प्रतिशत — उत्तीर्णांक निर्धारित किया जाए, जो आयोग की संस्तुति के अनुरूप है। इस आधार पर परीक्षा परिणाम संशोधित कर सरकार नई चयन सूची जारी करे, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सके।
तूफान सिंह के अनुसार, यह छूट लागू होने से न केवल ओबीसी अभ्यर्थियों, बल्कि दिव्यांग अभ्यर्थियों, भूतपूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों सहित अन्य संबंधित पात्र वर्गों को भी लाभ मिल सकता है।
मंत्री की प्रतिक्रिया
कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने अभ्यर्थियों से ज्ञापन स्वीकार किया और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर बातचीत के ज़रिए प्रकरण का निस्तारण कराने का प्रयास करेंगे। अभ्यर्थियों ने ज्ञापन के साथ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति की छायाप्रति भी मंत्री को सौंपी।
पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 वर्षों से विवादों और कानूनी पेचीदगियों में उलझी रही है। यह मामला ऐसे समय में उठा है जब उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों का असंतोष लगातार बना हुआ है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के बावजूद सरकार द्वारा संशोधित परिणाम न जारी करना अभ्यर्थियों के आक्रोश का मुख्य कारण बना हुआ है।
आगे की राह
मंत्री के आश्वासन के बाद अब अभ्यर्थियों की नज़रें शिक्षा मंत्रालय और मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि सरकार आयोग की संस्तुति को लागू करती है, तो ओबीसी और अन्य आरक्षित वर्गों के हज़ारों अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।