भोपाल में शिक्षक वर्ग 3 के चयनित अभ्यर्थी गिरफ्तार, 26 दिन के धरने के बाद सड़क जाम
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्राथमिक शिक्षक वर्ग 3 के चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को उग्र रूप ले गया, जब प्रदर्शनकारियों ने बोर्ड चौराहे पर सड़क पर लेटकर यातायात जाम कर दिया और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यह आंदोलन 26 दिनों से चल रहे धरने की परिणति है, जिसमें अभ्यर्थी नियुक्ति की माँग कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बोर्ड चौराहे पर पिछले 26 दिनों से धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने गुरुवार की दोपहर अपने आंदोलन को तेज़ करते हुए सड़क पर लेट गए, जिससे दोनों दिशाओं में यातायात पूरी तरह थम गया। मौके पर पहुँची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया और उन्हें हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस जवानों ने उनके साथ मारपीट की और जबरदस्ती सड़क से उठाने का प्रयास किया। हालाँकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली थी, इसलिए नियमानुसार कार्रवाई की गई।
अभ्यर्थियों की माँग और सरकार का भरोसा
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री से पिछले दिनों मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने नियुक्ति का भरोसा दिलाया था। लेकिन वह आश्वासन अब तक धरातल पर नहीं उतरा है, इसलिए आंदोलन जारी रखने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया लंबे अरसे से विवादों में रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अभ्यर्थी अपनी जायज़ माँग लेकर सड़क पर उतरे थे और सरकार ने उनकी बात सुनने की बजाय उन पर लाठियाँ बरसाईं। उन्होंने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
पृष्ठभूमि: शिक्षक भर्ती आंदोलन का लंबा इतिहास
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर यह पहला आंदोलन नहीं है। इससे पहले शिक्षक वर्ग 1 और शिक्षक वर्ग 2 के अभ्यर्थी भी नियुक्ति की माँग को लेकर सड़कों पर उतर चुके हैं। अब वर्ग 3 के अभ्यर्थियों का आंदोलन उसी श्रृंखला की नई कड़ी बन गया है, जो राज्य में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की गहरी खामियों की ओर इशारा करती है।
आगे क्या होगा
फिलहाल गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। अभ्यर्थियों ने संकेत दिया है कि जब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिलता, उनका धरना जारी रहेगा। राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद अब देखना यह होगा कि मध्य प्रदेश सरकार अभ्यर्थियों की माँग पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।