नई दिल्ली पुलिस ने 72 घंटे में लैपटॉप धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया, दो आरोपी गिरफ्तार, चारों लैपटॉप बरामद
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली जिला पुलिस की नॉर्थ एवेन्यू थाना ने महज 72 घंटे के भीतर एक सुनियोजित लैपटॉप धोखाधड़ी का पर्दाफाश करते हुए 11 जुलाई 2026 को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी के चारों लैपटॉप, वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद कर लिए हैं।
वारदात का तरीका
8 जुलाई 2026 को आरएमएल अस्पताल के पास काली बाड़ी मार्ग पर एक पीसीआर कॉल के ज़रिए धोखाधड़ी की सूचना मिली। शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार ने बताया कि वे ग्रेटर नोएडा स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी की ओर से चार लैपटॉप की डिलीवरी करने पहुँचे थे। इसी दौरान दो अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को ग्राहक बताते हुए बिना भुगतान किए लैपटॉप अपने कब्जे में ले लिए और स्कूटी से फरार हो गए।
जाँच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले व्हाट्सएप के ज़रिए फर्जी ऑर्डर दिया और जानबूझकर सुनसान स्थान पर डिलीवरी बुलाकर वारदात को अंजाम दिया। पहचान छिपाने के लिए स्कूटी का पंजीकरण नंबर भी ढका हुआ था।
जाँच और सुराग
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर विशेष जाँच टीम गठित की गई। एसएचओ नॉर्थ एवेन्यू के नेतृत्व और एसीपी पार्लियामेंट स्ट्रीट की निगरानी में गठित इस टीम ने तकनीकी निगरानी, फील्ड जाँच और करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया।
गहन जाँच के बाद पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल स्कूटी और दोनों आरोपियों की पहचान कर ली। शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार ने भी सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की पहचान की पुष्टि की।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने 11 जुलाई 2026 को छापेमारी कर अमित भाटिया (46), निवासी कृष्णा नगर, और अनिल कुमार (45), निवासी गीता कॉलोनी, को गिरफ्तार किया। दोनों के पास से चोरी के चारों लैपटॉप, स्कूटी, मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड बरामद किए गए।
संगठित गिरोह की आशंका
प्रारंभिक जाँच के अनुसार, दोनों आरोपी एक संगठित धोखाधड़ी गिरोह के सदस्य हैं, जो व्हाट्सएप पर फर्जी ऑर्डर देकर महँगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की डिलीवरी करवाते थे और फिर सुनसान स्थान पर बिना भुगतान किए सामान लेकर फरार हो जाते थे।
आगे की जाँच
नई दिल्ली पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और इसी तरह की अन्य वारदातों में उनकी संलिप्तता की जाँच कर रही है। यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि ऑनलाइन फर्जी ऑर्डर के ज़रिए डिलीवरी कर्मियों को निशाना बनाने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं।