13 जुलाई 2026
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नई दिल्ली पुलिस ने 72 घंटे में लैपटॉप धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया, दो आरोपी गिरफ्तार, चारों लैपटॉप बरामद

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नई दिल्ली पुलिस ने 72 घंटे में लैपटॉप धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया, दो आरोपी गिरफ्तार, चारों लैपटॉप बरामद

सारांश

व्हाट्सएप पर फर्जी ऑर्डर, सुनसान जगह डिलीवरी और बिना भुगतान किए फरार — नई दिल्ली के एक संगठित धोखाधड़ी गिरोह ने डिलीवरी कर्मी को निशाना बनाया। नॉर्थ एवेन्यू पुलिस ने 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर 72 घंटे में दोनों आरोपियों को दबोचा और चारों लैपटॉप बरामद किए।

मुख्य बातें

नॉर्थ एवेन्यू थाना पुलिस ने 72 घंटे के भीतर लैपटॉप धोखाधड़ी का खुलासा किया।
वारदात 8 जुलाई 2026 को काली बाड़ी मार्ग, नई दिल्ली पर हुई; आरोपियों ने व्हाट्सएप से फर्जी ऑर्डर दिया था।
अमित भाटिया (46) और अनिल कुमार (45) को 11 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया।
चारों लैपटॉप, स्कूटी, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद; 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से सुराग मिला।
दोनों आरोपी कथित तौर पर एक संगठित धोखाधड़ी गिरोह के सदस्य हैं; गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

नई दिल्ली जिला पुलिस की नॉर्थ एवेन्यू थाना ने महज 72 घंटे के भीतर एक सुनियोजित लैपटॉप धोखाधड़ी का पर्दाफाश करते हुए 11 जुलाई 2026 को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी के चारों लैपटॉप, वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद कर लिए हैं।

वारदात का तरीका

8 जुलाई 2026 को आरएमएल अस्पताल के पास काली बाड़ी मार्ग पर एक पीसीआर कॉल के ज़रिए धोखाधड़ी की सूचना मिली। शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार ने बताया कि वे ग्रेटर नोएडा स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी की ओर से चार लैपटॉप की डिलीवरी करने पहुँचे थे। इसी दौरान दो अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को ग्राहक बताते हुए बिना भुगतान किए लैपटॉप अपने कब्जे में ले लिए और स्कूटी से फरार हो गए।

जाँच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले व्हाट्सएप के ज़रिए फर्जी ऑर्डर दिया और जानबूझकर सुनसान स्थान पर डिलीवरी बुलाकर वारदात को अंजाम दिया। पहचान छिपाने के लिए स्कूटी का पंजीकरण नंबर भी ढका हुआ था।

जाँच और सुराग

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर विशेष जाँच टीम गठित की गई। एसएचओ नॉर्थ एवेन्यू के नेतृत्व और एसीपी पार्लियामेंट स्ट्रीट की निगरानी में गठित इस टीम ने तकनीकी निगरानी, फील्ड जाँच और करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया।

गहन जाँच के बाद पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल स्कूटी और दोनों आरोपियों की पहचान कर ली। शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार ने भी सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की पहचान की पुष्टि की।

गिरफ्तारी और बरामदगी

पुलिस ने 11 जुलाई 2026 को छापेमारी कर अमित भाटिया (46), निवासी कृष्णा नगर, और अनिल कुमार (45), निवासी गीता कॉलोनी, को गिरफ्तार किया। दोनों के पास से चोरी के चारों लैपटॉप, स्कूटी, मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड बरामद किए गए।

संगठित गिरोह की आशंका

प्रारंभिक जाँच के अनुसार, दोनों आरोपी एक संगठित धोखाधड़ी गिरोह के सदस्य हैं, जो व्हाट्सएप पर फर्जी ऑर्डर देकर महँगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की डिलीवरी करवाते थे और फिर सुनसान स्थान पर बिना भुगतान किए सामान लेकर फरार हो जाते थे।

आगे की जाँच

नई दिल्ली पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और इसी तरह की अन्य वारदातों में उनकी संलिप्तता की जाँच कर रही है। यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि ऑनलाइन फर्जी ऑर्डर के ज़रिए डिलीवरी कर्मियों को निशाना बनाने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि व्हाट्सएप के ज़रिए फर्जी ऑर्डर देकर डिलीवरी कर्मियों को फँसाने की यह रणनीति अब एक पैटर्न बन चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियाँ और डिलीवरी प्लेटफॉर्म अभी भी ऑर्डर सत्यापन के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाते। जब तक डिजिटल ऑर्डर की पहचान और भुगतान की पुष्टि पहले नहीं होती, तब तक ऐसे गिरोह नए तरीकों से सक्रिय रहेंगे — और अगला शिकार कोई और डिलीवरी कर्मी होगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नई दिल्ली लैपटॉप धोखाधड़ी मामला क्या है?
8 जुलाई 2026 को काली बाड़ी मार्ग पर दो आरोपियों ने व्हाट्सएप पर फर्जी ऑर्डर देकर डिलीवरी कर्मी प्रदीप कुमार से चार लैपटॉप बिना भुगतान किए हड़प लिए और स्कूटी से फरार हो गए। नॉर्थ एवेन्यू थाना पुलिस ने 72 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर सभी लैपटॉप बरामद किए।
इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
पुलिस ने 11 जुलाई 2026 को अमित भाटिया (46), निवासी कृष्णा नगर, और अनिल कुमार (45), निवासी गीता कॉलोनी, को गिरफ्तार किया। दोनों कथित तौर पर एक संगठित धोखाधड़ी गिरोह के सदस्य हैं।
पुलिस ने आरोपियों की पहचान कैसे की?
जाँच टीम ने करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया और तकनीकी निगरानी के ज़रिए वारदात में इस्तेमाल स्कूटी और आरोपियों की पहचान की। शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार ने भी सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की पुष्टि की।
आरोपियों के खिलाफ कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों से पूछताछ जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
क्या इस गिरोह ने अन्य वारदातें भी की हैं?
प्रारंभिक जाँच के अनुसार दोनों आरोपी एक संगठित धोखाधड़ी गिरोह के सदस्य हैं जो व्हाट्सएप पर फर्जी ऑर्डर देकर महँगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की ठगी करते थे। पुलिस अब इसी तरह की अन्य वारदातों में उनकी संलिप्तता की जाँच कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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