29 सितंबर 2026
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कुशीनगर बाढ़: CM योगी ने पीड़ितों को दिलाया भरोसा, जनहानि पर ₹4 लाख और 10 दिन में किसानों को मुआवजा

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कुशीनगर बाढ़: CM योगी ने पीड़ितों को दिलाया भरोसा, जनहानि पर ₹4 लाख और 10 दिन में किसानों को मुआवजा

सारांश

कुशीनगर में नारायणी नदी का जलस्तर साढ़े 5 लाख क्यूसेक तक पहुँचने से तटबंध टूटा और सैकड़ों घर प्रभावित हुए। CM योगी ने स्थल निरीक्षण कर जनहानि पर ₹4 लाख सहायता, आवास योजना का लाभ और 10 दिन में फसल मुआवजे का ऐलान किया।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 29 सितंबर को कुशीनगर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
जनहानि पर पीड़ित परिवार को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया घर मिलेगा।
फसल नुकसान का सर्वे कर 10 दिनों के भीतर किसानों को मुआवजा देने के निर्देश।
नारायणी नदी का जलस्तर सामान्य 3-4 लाख क्यूसेक से बढ़कर साढ़े 5 लाख क्यूसेक तक पहुँचा।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की दो-दो टीमें और पीएसी की चार यूनिट तैनात; 5,000 राहत पैकेट वितरित।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार, 29 सितंबर को कुशीनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ित परिवारों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार संकट की इस घड़ी में उनके साथ है। जनहानि की स्थिति में प्रभावित परिवार को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता, क्षतिग्रस्त मकानों के बदले आवास योजना का लाभ और 10 दिनों के भीतर फसल नुकसान का मुआवजा देने की घोषणा की गई।

बाढ़ का कारण और स्थिति का जायजा

मुख्यमंत्री ने विधानसभा क्षेत्र तमकुहीराज में नारायणी नदी के जलस्तर में आई अचानक वृद्धि से उत्पन्न बाढ़ की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में नारायणी नदी से 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित होता था, जो पिछले कुछ दिनों में अचानक बढ़कर साढ़े 5 लाख क्यूसेक तक पहुँच गया।

यह उछाल नेपाल में हुई अतिवृष्टि और वहाँ से आए अतिरिक्त जल-प्रवाह के कारण आई। इसी दबाव में तटबंध टूटा और कई घरों में पानी घुस गया। चार दिनों की लगातार भारी बारिश के बाद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति बनी रही।

राहत एवं बचाव कार्य

राहत अभियान के तहत एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की दो-दो टीमें तथा पीएसी की चार यूनिट प्रभावित क्षेत्र में तैनात की गई हैं। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें सोमवार से ही राहत कार्य में जुटी हैं।

जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सोमवार रात ही प्रभावित क्षेत्र में पहुँच गए थे। क्षेत्र के सांसद और विधायक भी राहत एवं बचाव कार्यों में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।

बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए 5,000 राहत पैकेट तैयार किए गए हैं, जिनमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, 2 किलो दाल के साथ चना, तेल, मसाले, नमक और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। मुख्यमंत्री ने बेदूपार इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में स्वयं कुछ परिवारों को राहत सामग्री वितरित की।

पीड़ितों के लिए घोषित सहायता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनहानि पर प्रभावित परिवार को ₹4 लाख की सहायता राशि दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नया आवास उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए अलग से धनराशि दी जाएगी।

फसल नुकसान का सर्वे कराकर पीड़ित किसानों को 10 दिनों के भीतर मुआवजा देने के निर्देश जारी किए गए हैं। सिंचाई विभाग को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसानों के खेतों को और नुकसान न हो, तथा बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और तटबंधों की मरम्मत भी प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए।

स्वास्थ्य और राहत शिविर

मुख्यमंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पतालों में सर्पदंश या जंगली जानवर के काटने पर तत्काल वैक्सीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि उपचार में कोई देरी न हो।

राहत शिविरों में उचित रोशनी की व्यवस्था बनाए रखने और प्रभावित लोगों को तत्काल शिविरों तक पहुँचाने के भी निर्देश दिए गए। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई जिले अतिवृष्टि और बाढ़ की चपेट में हैं और राहत की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर घटने और राहत कार्यों के तेज़ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। 10 दिनों में फसल मुआवजे का वादा महत्वाकांक्षी है — पिछले वर्षों में ऐसे सर्वे और भुगतान अक्सर समय पर नहीं हो पाए। नेपाल से आने वाले अतिरिक्त जल-प्रवाह और तटबंध की कमज़ोरी एक पुरानी समस्या है जिसे हर मानसून में उठाया जाता है, पर दीर्घकालिक समाधान अभी तक नहीं निकला। सरकार की तात्कालिक प्रतिक्रिया सराहनीय है, किंतु बाढ़ प्रबंधन में संरचनात्मक सुधार के बिना यह राहत चक्र हर साल दोहराता रहेगा।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुशीनगर में बाढ़ क्यों आई?
नेपाल में भारी बारिश के कारण नारायणी नदी का जलस्तर सामान्य 3-4 लाख क्यूसेक से बढ़कर साढ़े 5 लाख क्यूसेक तक पहुँच गया, जिससे तटबंध टूट गया और कई घरों में पानी घुस गया। चार दिनों की लगातार अतिवृष्टि ने स्थिति और गंभीर बना दी।
बाढ़ पीड़ितों को कितनी सहायता राशि मिलेगी?
जनहानि की स्थिति में प्रभावित परिवार को ₹4 लाख की सहायता दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए अलग धनराशि मिलेगी।
किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा कब मिलेगा?
CM योगी आदित्यनाथ ने फसल नुकसान का सर्वे कराकर पीड़ित किसानों को 10 दिनों के भीतर मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। सिंचाई विभाग को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि खेतों को और नुकसान न हो।
बाढ़ राहत के लिए कौन-सी टीमें तैनात हैं?
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की दो-दो टीमें तथा पीएसी की चार यूनिट प्रभावित क्षेत्र में तैनात की गई हैं। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें सोमवार से ही राहत कार्य में जुटी हैं और जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सोमवार रात ही क्षेत्र में पहुँच गए थे।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या व्यवस्था की गई है?
CM योगी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में सर्पदंश या जंगली जानवर के काटने पर तत्काल वैक्सीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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