कुशीनगर में नारायणी नदी का तटबंध टूटा, दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा; CM योगी ने दिए राहत के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सोमवार देर रात नारायणी नदी का एपी तटबंध टूट गया, जिससे तमकुहीराज तहसील के ततवा टोला स्थित चैन पट्टी और जवहीं माली एहतमाली के निकटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का पानी तेज़ी से घुस गया। तटबंध के करीब 70 से 100 मीटर हिस्से के ढह जाने से लगभग दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है, हालांकि ग्रामीणों के सामान को नुकसान पहुंचा है।
तटबंध कैसे टूटा
स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नारायणी नदी का जलस्तर रात करीब 12 बजे घटकर लगभग 2 लाख 54 हज़ार क्यूसेक पर आ गया था। जलस्तर घटने के साथ ही नदी में कटाव तेज़ हो गया और तटबंध में पहले से बने रेट होल तथा लगातार हो रहे सीपेज के कारण एपी तटबंध अंततः टूट गया। स्थानीय निवासी रितेश सिंह ने बताया कि तटबंध में तीन दिनों से रिसाव हो रहा था, किंतु सोमवार देर रात अचानक यह ढह गया।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ जब मानसून के अंतिम चरण में नदियों का जलस्तर उतार-चढ़ाव पर था, और ऐसे में तटबंधों पर दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। आलोचकों का कहना है कि पहले से दिख रहे सीपेज के बावजूद समय पर मरम्मत न होना प्रशासनिक चूक को दर्शाता है।
स्थानीय निवासियों की आपबीती
स्थानीय निवासी संजीव यादव ने बताया, 'रात करीब 10:00 से 10:30 बजे के बीच तटबंध टूट गया। यहां कोई इंतजाम नहीं था। जब कटाव शुरू हुआ, तो सभी अधिकारी और प्रशासन के लोग यहां से भागने लगे — मौके पर कोई मौजूद नहीं था।' उन्होंने आगे कहा कि डीएम और एसपी के पहुंचने के बाद ही बाकी अमला वहां जुटा। यादव के अनुसार तटबंध में करीब 2 किलोमीटर तक सीपेज है और स्थिति सामान्य होने में 10 दिन लग सकते हैं।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि करीब 100 मीटर तटबंध कटने से 20 से 25 गांवों के लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ प्रभावित लोग फिलहाल तटबंध पर या अपने रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं। संजीव यादव के अनुसार प्रभावित लोगों के लिए खाने-पीने की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं हुई थी।
सीएम योगी की सक्रियता और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात ही इस घटना का संज्ञान लिया। उन्होंने गोरखपुर मंडलायुक्त, एडीजी और कुशीनगर के जिलाधिकारी से तत्काल पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के कड़े निर्देश दिए।
सीएम के निर्देश के बाद प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर सक्रिय हो गईं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को भी तत्काल मौके पर पहुंचकर व्यापक बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पहले ही प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश जारी किया था।
आम जनता पर असर
तटबंध टूटने से तमकुहीराज तहसील के करीब दो दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीण सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन घरेलू सामान और फसलों को नुकसान पहुंचा है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वांचल के कई जिले पहले से ही मानसूनी बाढ़ की चपेट में हैं और राहत संसाधनों पर दबाव बना हुआ है।
आगे की स्थिति
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और राहत-बचाव कार्य को तेज़ करना है। तटबंध की मरम्मत और बाढ़ के पानी की निकासी में समय लगने की आशंका है। स्थानीय निवासियों के अनुसार स्थिति सामान्य होने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं। NDRF और SDRF की सक्रियता के साथ राहत कार्य की गति आने वाले घंटों में निर्णायक होगी।