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कुशीनगर में नारायणी नदी का तटबंध टूटा, दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा; CM योगी ने दिए राहत के निर्देश

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कुशीनगर में नारायणी नदी का तटबंध टूटा, दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा; CM योगी ने दिए राहत के निर्देश

सारांश

कुशीनगर में नारायणी नदी का एपी तटबंध सोमवार देर रात टूट गया — तीन दिन से दिख रहे सीपेज के बावजूद समय पर मरम्मत नहीं हुई। दो दर्जन गांव खतरे में हैं, NDRF-SDRF मौके पर हैं, और CM योगी रात भर अपडेट लेते रहे। असली सवाल यह है कि चेतावनी के संकेत रहते हुए भी तटबंध क्यों नहीं बचाया जा सका।

मुख्य बातें

कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील में सोमवार देर रात नारायणी नदी का एपी तटबंध टूट गया।
तटबंध का करीब 70 से 100 मीटर हिस्सा ढहा; लगभग 20-25 गांवों पर बाढ़ का खतरा।
तटबंध में तीन दिन पहले से रिसाव हो रहा था, किंतु समय पर मरम्मत नहीं हुई।
अब तक कोई जनहानि नहीं ; ग्रामीण सुरक्षित, लेकिन सामान को नुकसान।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात संज्ञान लेकर NDRF और SDRF को सक्रिय किया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार स्थिति सामान्य होने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सोमवार देर रात नारायणी नदी का एपी तटबंध टूट गया, जिससे तमकुहीराज तहसील के ततवा टोला स्थित चैन पट्टी और जवहीं माली एहतमाली के निकटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का पानी तेज़ी से घुस गया। तटबंध के करीब 70 से 100 मीटर हिस्से के ढह जाने से लगभग दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है, हालांकि ग्रामीणों के सामान को नुकसान पहुंचा है।

तटबंध कैसे टूटा

स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नारायणी नदी का जलस्तर रात करीब 12 बजे घटकर लगभग 2 लाख 54 हज़ार क्यूसेक पर आ गया था। जलस्तर घटने के साथ ही नदी में कटाव तेज़ हो गया और तटबंध में पहले से बने रेट होल तथा लगातार हो रहे सीपेज के कारण एपी तटबंध अंततः टूट गया। स्थानीय निवासी रितेश सिंह ने बताया कि तटबंध में तीन दिनों से रिसाव हो रहा था, किंतु सोमवार देर रात अचानक यह ढह गया।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ जब मानसून के अंतिम चरण में नदियों का जलस्तर उतार-चढ़ाव पर था, और ऐसे में तटबंधों पर दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। आलोचकों का कहना है कि पहले से दिख रहे सीपेज के बावजूद समय पर मरम्मत न होना प्रशासनिक चूक को दर्शाता है।

स्थानीय निवासियों की आपबीती

स्थानीय निवासी संजीव यादव ने बताया, 'रात करीब 10:00 से 10:30 बजे के बीच तटबंध टूट गया। यहां कोई इंतजाम नहीं था। जब कटाव शुरू हुआ, तो सभी अधिकारी और प्रशासन के लोग यहां से भागने लगे — मौके पर कोई मौजूद नहीं था।' उन्होंने आगे कहा कि डीएम और एसपी के पहुंचने के बाद ही बाकी अमला वहां जुटा। यादव के अनुसार तटबंध में करीब 2 किलोमीटर तक सीपेज है और स्थिति सामान्य होने में 10 दिन लग सकते हैं।

एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि करीब 100 मीटर तटबंध कटने से 20 से 25 गांवों के लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ प्रभावित लोग फिलहाल तटबंध पर या अपने रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं। संजीव यादव के अनुसार प्रभावित लोगों के लिए खाने-पीने की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं हुई थी।

सीएम योगी की सक्रियता और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात ही इस घटना का संज्ञान लिया। उन्होंने गोरखपुर मंडलायुक्त, एडीजी और कुशीनगर के जिलाधिकारी से तत्काल पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के कड़े निर्देश दिए।

सीएम के निर्देश के बाद प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर सक्रिय हो गईं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को भी तत्काल मौके पर पहुंचकर व्यापक बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पहले ही प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश जारी किया था।

आम जनता पर असर

तटबंध टूटने से तमकुहीराज तहसील के करीब दो दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीण सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन घरेलू सामान और फसलों को नुकसान पहुंचा है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वांचल के कई जिले पहले से ही मानसूनी बाढ़ की चपेट में हैं और राहत संसाधनों पर दबाव बना हुआ है।

आगे की स्थिति

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और राहत-बचाव कार्य को तेज़ करना है। तटबंध की मरम्मत और बाढ़ के पानी की निकासी में समय लगने की आशंका है। स्थानीय निवासियों के अनुसार स्थिति सामान्य होने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं। NDRF और SDRF की सक्रियता के साथ राहत कार्य की गति आने वाले घंटों में निर्णायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रबंधन की उस पुरानी कमज़ोरी को उजागर करता है जहाँ चेतावनी के संकेत रहते हुए भी निवारक कार्रवाई नहीं होती। CM योगी की देर रात सक्रियता सराहनीय है, लेकिन असली जवाबदेही यह है कि जब सीपेज दिख रहा था, तब सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन कहां था। पूर्वांचल में हर मानसून यही चक्र दोहराया जाता है — तटबंध टूटते हैं, NDRF पहुंचती है, राहत की घोषणाएं होती हैं — लेकिन संरचनात्मक रखरखाव की जवाबदेही तय नहीं होती।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुशीनगर में नारायणी नदी का तटबंध क्यों टूटा?
नारायणी नदी का जलस्तर घटने के बाद कटाव तेज़ हो गया और तटबंध में पहले से बने रेट होल तथा तीन दिनों से जारी सीपेज के कारण एपी तटबंध सोमवार देर रात ढह गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार समय पर मरम्मत न होना इसका प्रमुख कारण रहा।
तटबंध टूटने से कितने गांव प्रभावित हुए हैं?
तटबंध के 70 से 100 मीटर हिस्से के ढहने से तमकुहीराज तहसील के लगभग 20 से 25 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ का पानी कई गांवों में घुस चुका है, हालांकि अब तक कोई जनहानि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात घटना का संज्ञान लेकर गोरखपुर मंडलायुक्त, एडीजी और कुशीनगर के जिलाधिकारी से तत्काल जानकारी ली। उन्होंने NDRF और SDRF को सक्रिय करने तथा प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए।
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की अभी क्या स्थिति है?
बाढ़ प्रभावित ग्रामीण कथित तौर पर सुरक्षित हैं और तटबंध पर या रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं। हालांकि स्थानीय निवासियों के अनुसार प्रभावित लोगों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था शुरुआती घंटों में नहीं हो पाई थी और सामान को नुकसान पहुंचा है।
स्थिति कब तक सामान्य होने की उम्मीद है?
स्थानीय निवासियों के अनुसार बाढ़ की स्थिति सामान्य होने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं। NDRF और SDRF की टीमें राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं और तटबंध की मरम्मत का कार्य भी प्राथमिकता पर है।
राष्ट्र प्रेस
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