कुशीनगर बाढ़: एपी तटबंध टूटने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ पहुंचे ग्राउंड जीरो, 5,000 राहत पैकेट वितरित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को कुशीनगर जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सीधा जायजा लेने ग्राउंड जीरो पर पहुँचे। नेपाल में अतिवृष्टि के कारण नारायणी नदी में सामान्य से कहीं अधिक पानी आने की वजह से सोमवार देर रात जवहीं दयाल (चैनपट्टी) के ततवा टोला के पास एपी तटबंध का एक हिस्सा टूट गया, जिससे आसपास के दर्जनों गाँव जलमग्न हो गए। मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों से सीधे संवाद किया, राहत सामग्री वितरित की और प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
तटबंध टूटने की पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री के अनुसार, सामान्य दिनों में नारायणी नदी में 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित होता है, लेकिन नेपाल में भारी वर्षा के चलते सोमवार को अचानक यह मात्रा बढ़कर साढ़े पाँच लाख क्यूसेक हो गई। इस असामान्य जलप्रवाह का दबाव एपी तटबंध नहीं झेल सका और उसका एक हिस्सा टूट गया, जिससे 15-16 गाँवों में बाढ़ का पानी घुस गया।
गौरतलब है कि यह घटना चार दिनों की लगातार मूसलाधार बारिश के बाद हुई, जिसने पहले ही उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। यह कोई पहली बार नहीं है जब नेपाल से आए अतिरिक्त जल ने तराई क्षेत्र के तटबंधों पर संकट खड़ा किया हो — पिछले वर्षों में भी इसी तरह की स्थिति उत्पन्न होती रही है।
मुख्यमंत्री का हवाई और जमीनी दौरा
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले हवाई सर्वेक्षण कर तटबंध और प्रभावित क्षेत्रों का ऊपर से जायजा लिया। इसके बाद वे सीधे बाढ़ग्रस्त गाँवों में उतरे और ऊँचे स्थानों पर शरण लिए ग्रामीणों से मिले। उन्होंने ग्रामीणों को लंच पैकेट और बच्चों को चॉकलेट वितरित किए।
इसके बाद मुख्यमंत्री सेवरही क्षेत्र के इंटर कॉलेज बेदुपार पहुँचे, जहाँ राहत शिविर स्थापित किया गया था। वहाँ उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों का दुख-दर्द सुना और राहत सामग्री का वितरण किया। उल्लेखनीय है कि इसी सुबह वे गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए थे और कार्यक्रम समाप्त होते ही तत्काल कुशीनगर के लिए रवाना हो गए।
राहत और बचाव कार्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की दो-दो टीमें तथा पीएसी की फ्लड यूनिट को तत्काल तैनात किया गया। प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी सोमवार रात से ही राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
सरकार ने 5,000 राहत पैकेट तैयार कराए हैं। प्रत्येक पैकेट में 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 2 किलो दाल, आलू, लाई, चना, तेल, मसाला, नमक, बाल्टी समेत कुल 35 आइटम हैं और प्रत्येक पैकेट का वजन 50 किलो है। इसके अलावा प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी सोमवार रात से ही घटनास्थल पर मौजूद हैं।
मुआवजे और पुनर्वास की घोषणाएँ
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनहानि पर ₹4 लाख की तत्काल सहायता राशि दी जाएगी। जिनके मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास उपलब्ध कराया जाएगा। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए भी अलग से धनराशि दी जाएगी।
फसल नुकसान को लेकर प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि 15-16 गाँवों में धान, गन्ना और सब्जी जैसी फसलों का सर्वेक्षण कर 10 दिनों के भीतर मुआवजा वितरित किया जाए। बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के भी निर्देश जारी किए गए हैं।
स्वास्थ्य और दीर्घकालिक उपाय
जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अगले 5-6 दिनों तक क्षेत्र में लगातार मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी पीएससी और सीएससी में एंटी स्नेक वेनम और एंटी रैबीज वैक्सीन की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
दीर्घकालिक समाधान के तहत जलशक्ति मंत्री और प्रमुख सचिव सिंचाई को निर्देश दिए गए हैं कि स्थिति सामान्य होने के बाद नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन का कार्य कराया जाए, ताकि नदी अपना प्राकृतिक मार्ग बनाए और तटबंध भविष्य में इस तरह के दबाव से सुरक्षित रह सके। स्थिति सामान्य होने के बाद एपी तटबंध को भी मजबूत बनाने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही सांसद (देवरिया) शशांक मणि त्रिपाठी, सांसद (कुशीनगर) विजय दूबे, विधायक डॉ. असीम कुमार और सुरेंद्र कुशवाहा भी राहत कार्यों में सक्रिय सहयोग दे रहे हैं। आने वाले दिनों में बाढ़ का पानी घटने के साथ पुनर्निर्माण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया की असली परीक्षा होगी।