अबू आजमी का सरकार पर हमला: ‘एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला, SIT रिपोर्ट कहाँ?’
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने 3 जून को नंदुरबार में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला, और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ, ‘लव जिहाद’, किसानों की आत्महत्या तथा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुद्दों पर सवाल खड़े किए। आजमी ने दावा किया कि घुसपैठ की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (SIT) की रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई और ‘एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला’।
घुसपैठ और SIT पर सवाल
आजमी ने कहा, ‘जन्म प्रमाण पत्र रोक दिए गए थे। आज हजारों बच्चों को उनके प्रमाण पत्र नहीं मिले हैं। एक SIT बनाई गई थी, लेकिन आज तक SIT की रिपोर्ट जमा नहीं की गई है। एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला।’ उन्होंने आगे जोड़ा कि यदि देश में बांग्लादेशी नागरिक मौजूद हैं, तो ‘वे अंदर कैसे आए? सरकार तो भाजपा चला रही है और सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।’ आजमी के अनुसार यह सब ‘जान-बूझकर’ किया जा रहा है ताकि अल्पसंख्यकों को बार-बार निशाना बनाया जा सके।
‘लव जिहाद’ शब्द पर आपत्ति
‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे शब्दों को आजमी ने ‘बकवास’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘जिहाद एक बहुत ही सम्मानित शब्द है, जिसका मतलब संघर्ष है। प्राचीन काल से हिंदू-मुस्लिम शादियाँ होती रही हैं। संविधान कहता है कि 18 साल की उम्र के बाद कोई भी व्यक्ति आजाद है और जिससे चाहे शादी कर सकता है।’ सपा विधायक ने ‘गारंटी’ देते हुए कहा कि भारत में ऐसा कोई मुस्लिम संगठन नहीं है जो हिंदू लड़कियों से शादी करने को कहता हो, और इस मुद्दे को कथित तौर पर जान-बूझकर उछाला जा रहा है।
किसानों की आत्महत्या पर चिंता
आजमी ने महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के आँकड़ों पर सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा, ‘यह सरकार क्या गारंटी देगी कि महाराष्ट्र में किसानों की सबसे ज्यादा आत्महत्याएँ रुक जाएँगी?’ उनके अनुसार किसान 4-5 हज़ार, 15 हज़ार, 20 हज़ार रुपये के कर्ज के बोझ तले दबकर अपनी जान दे रहे हैं और ‘बहुत सहानुभूति दिखाई जाती है, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है।’
ध्रुवीकरण का आरोप
सपा विधायक ने आरोप लगाया कि मुसलमानों के ध्रुवीकरण को गाँवों तक फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘वे कहते हैं कि पूरे देश को हरा बना देंगे और दावा करते हैं कि वे मुख्यमंत्री बनेंगे।’ गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हाल के महीनों में अवैध घुसपैठ और धार्मिक पहचान को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हुई है, और SIT की रिपोर्ट का मुद्दा विपक्ष लगातार उठा रहा है।
आगे क्या
आजमी की टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी ज़ोर पकड़ रही है। विपक्षी दलों से SIT रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग तेज़ होने की संभावना है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।