19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अबू आजमी का सरकार पर हमला: ‘एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला, SIT रिपोर्ट कहाँ?’

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अबू आजमी का सरकार पर हमला: ‘एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला, SIT रिपोर्ट कहाँ?’

सारांश

सपा विधायक अबू आजमी ने नंदुरबार में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर सीधा हमला बोला — दावा किया कि घुसपैठ की जाँच के लिए बनी SIT की रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई और ‘एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला’। ‘लव जिहाद’ को बकवास बताते हुए उन्होंने किसानों की आत्महत्या और अल्पसंख्यकों के ध्रुवीकरण पर भी सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

अबू आजमी ने 3 जून को नंदुरबार में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने दावा किया कि घुसपैठ पर बनी SIT की रिपोर्ट आज तक जमा नहीं हुई और ‘एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला’।
‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे शब्दों को आजमी ने ‘बकवास’ करार दिया।
उन्होंने महाराष्ट्र में किसानों की सर्वाधिक आत्महत्याओं पर सरकार से गारंटी माँगी।
आजमी ने मुसलमानों के ध्रुवीकरण को गाँव-स्तर तक फैलाने का आरोप लगाया।

समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने 3 जून को नंदुरबार में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला, और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ, ‘लव जिहाद’, किसानों की आत्महत्या तथा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुद्दों पर सवाल खड़े किए। आजमी ने दावा किया कि घुसपैठ की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (SIT) की रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई और ‘एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला’।

घुसपैठ और SIT पर सवाल

आजमी ने कहा, ‘जन्म प्रमाण पत्र रोक दिए गए थे। आज हजारों बच्चों को उनके प्रमाण पत्र नहीं मिले हैं। एक SIT बनाई गई थी, लेकिन आज तक SIT की रिपोर्ट जमा नहीं की गई है। एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला।’ उन्होंने आगे जोड़ा कि यदि देश में बांग्लादेशी नागरिक मौजूद हैं, तो ‘वे अंदर कैसे आए? सरकार तो भाजपा चला रही है और सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।’ आजमी के अनुसार यह सब ‘जान-बूझकर’ किया जा रहा है ताकि अल्पसंख्यकों को बार-बार निशाना बनाया जा सके।

‘लव जिहाद’ शब्द पर आपत्ति

‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे शब्दों को आजमी ने ‘बकवास’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘जिहाद एक बहुत ही सम्मानित शब्द है, जिसका मतलब संघर्ष है। प्राचीन काल से हिंदू-मुस्लिम शादियाँ होती रही हैं। संविधान कहता है कि 18 साल की उम्र के बाद कोई भी व्यक्ति आजाद है और जिससे चाहे शादी कर सकता है।’ सपा विधायक ने ‘गारंटी’ देते हुए कहा कि भारत में ऐसा कोई मुस्लिम संगठन नहीं है जो हिंदू लड़कियों से शादी करने को कहता हो, और इस मुद्दे को कथित तौर पर जान-बूझकर उछाला जा रहा है।

किसानों की आत्महत्या पर चिंता

आजमी ने महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के आँकड़ों पर सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा, ‘यह सरकार क्या गारंटी देगी कि महाराष्ट्र में किसानों की सबसे ज्यादा आत्महत्याएँ रुक जाएँगी?’ उनके अनुसार किसान 4-5 हज़ार, 15 हज़ार, 20 हज़ार रुपये के कर्ज के बोझ तले दबकर अपनी जान दे रहे हैं और ‘बहुत सहानुभूति दिखाई जाती है, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है।’

ध्रुवीकरण का आरोप

सपा विधायक ने आरोप लगाया कि मुसलमानों के ध्रुवीकरण को गाँवों तक फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘वे कहते हैं कि पूरे देश को हरा बना देंगे और दावा करते हैं कि वे मुख्यमंत्री बनेंगे।’ गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हाल के महीनों में अवैध घुसपैठ और धार्मिक पहचान को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हुई है, और SIT की रिपोर्ट का मुद्दा विपक्ष लगातार उठा रहा है।

आगे क्या

आजमी की टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी ज़ोर पकड़ रही है। विपक्षी दलों से SIT रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग तेज़ होने की संभावना है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ ‘घुसपैठ’ और ‘लव जिहाद’ अब चुनावी शब्दावली का स्थायी हिस्सा बन चुके हैं — पर सत्यापन-योग्य आँकड़े लगभग नदारद हैं। यदि SIT रिपोर्ट सचमुच महीनों से लंबित है, तो यह सत्ता पक्ष पर पारदर्शिता का गंभीर सवाल है। दूसरी ओर, किसानों की आत्महत्या जैसे ठोस आर्थिक संकट अक्सर पहचान-आधारित बहसों के शोर में दब जाते हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष इन सवालों को बयानबाज़ी से आगे ले जाकर संस्थागत जवाबदेही तक खींच पाता है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबू आजमी ने SIT रिपोर्ट पर क्या कहा?
सपा विधायक अबू आजमी ने 3 जून को नंदुरबार में दावा किया कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ की जाँच के लिए बनाई गई SIT ने आज तक अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की है और ‘एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला’। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि घुसपैठिए हैं भी, तो सीमा सुरक्षा भाजपा-नीत सरकार की ज़िम्मेदारी है, तो वे अंदर कैसे आए।
‘लव जिहाद’ पर आजमी का रुख क्या है?
आजमी ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे शब्दों को ‘बकवास’ कहा। उनके अनुसार ‘जिहाद’ का अर्थ संघर्ष है और भारत में कोई भी मुस्लिम संगठन हिंदू लड़कियों से शादी करने को नहीं कहता; उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि 18 वर्ष के बाद किसी की शादी का फ़ैसला निजी है।
किसानों की आत्महत्या पर आजमी ने क्या आरोप लगाए?
आजमी ने कहा कि महाराष्ट्र में किसानों की सबसे ज़्यादा आत्महत्याएँ हो रही हैं और किसान 4-5 हज़ार से 20 हज़ार रुपये तक के कर्ज के बोझ में जान दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर सरकार सहानुभूति तो दिखाती है, लेकिन ज़मीनी हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा।
आजमी ने ध्रुवीकरण को लेकर क्या कहा?
उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों का ध्रुवीकरण कर इसे गाँवों तक फैलाने की कोशिश की जा रही है। आजमी के अनुसार कुछ नेता ‘पूरे देश को हरा बना देंगे’ जैसे बयानों के ज़रिए सांप्रदायिक भय फैला रहे हैं।
यह बयान राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बयान महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले विपक्ष के उस आक्रामक रुख का हिस्सा है, जो घुसपैठ और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष से ठोस आँकड़े और SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग कर रहा है। यह बहस पहचान-राजनीति बनाम आर्थिक मुद्दों के टकराव को भी रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 4 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले