12 अक्टूबर 2026
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अदाणी ग्रामोत्सव मिर्जापुर: दाढ़ीराम गांव में लोकगीत, रंगोली और खेलों से जीवंत हुआ ग्रामीण उत्सव

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अदाणी ग्रामोत्सव मिर्जापुर: दाढ़ीराम गांव में लोकगीत, रंगोली और खेलों से जीवंत हुआ ग्रामीण उत्सव

सारांश

मिर्जापुर के दाढ़ीराम गांव में अदाणी फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ग्रामोत्सव ने रस्साकशी, रंगोली और कजरी-बिरहा के माध्यम से पूर्वांचल की जीवंत ग्रामीण संस्कृति को एक मंच पर एकत्रित किया — सामुदायिक भागीदारी और विरासत संरक्षण का एक ताज़ा उदाहरण।

मुख्य बातें

अदाणी ग्रामोत्सव 11 और 12 अक्टूबर 2026 को मिर्जापुर के दाढ़ीराम गांव में आयोजित हुआ।
रस्साकशी में लड़कों की 6 और लड़कियों की 4 टीमों ने, तथा रंगोली में 4 टीमों ने भाग लिया।
कजरी और बिरहा की प्रस्तुतियों से पूर्वांचल की लोकसंगीत परंपरा को प्रमुखता दी गई।
दूसरे दिन पुरुष और महिला वर्ग में गेंद फेंक प्रतियोगिता हुई; प्रत्येक वर्ग से 2 विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
अदाणी फाउंडेशन , हेल्पएज इंडिया और स्थानीय ग्राम प्रधानों ने आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।

मिर्जापुर जिले के दाढ़ीराम गांव में 11 और 12 अक्टूबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय अदाणी ग्रामोत्सव में ग्रामीण संस्कृति, पारंपरिक खेलकूद और पूर्वांचल के लोकसंगीत का अनूठा समागम देखने को मिला। अदाणी फाउंडेशन और हेल्पएज इंडिया के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच देना, सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजना था।

उद्घाटन और पहले दिन की गतिविधियाँ

महोत्सव का आगाज़ पारंपरिक पूजा-अर्चना और आमंत्रित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके उपरांत विभिन्न आयु वर्ग के ग्रामीणों ने खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक हिस्सेदारी की। पहले दिन की सबसे बड़ी आकर्षण रस्साकशी प्रतियोगिता रही, जिसमें लड़कों की 6 और लड़कियों की 4 टीमों ने प्रतिस्पर्धा की और सामूहिक प्रयास व खेल भावना का परिचय दिया।

पहले दिन 'अपना गांव' विषय पर रंगोली प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें 4 टीमों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने रंगों के माध्यम से ग्रामीण जीवन की सुंदरता, स्थानीय परंपराओं और गांव की विशिष्ट पहचान को उकेरा। तीन विजेता टीमों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान से नवाज़ा गया।

लोकसंगीत की गूँज — कजरी और बिरहा से सजी शाम

अदाणी ग्रामोत्सव में पूर्वांचल की लोकसंगीत परंपरा को विशेष महत्व दिया गया। स्थानीय लोकगायकों ने कजरी और बिरहा की प्रस्तुतियों से उपस्थित ग्रामीणों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन पारंपरिक लोकगीतों ने न केवल उत्सव में रंग भरा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक अस्मिता को भी उजागर किया। आयोजकों के अनुसार, लोकसंगीत को प्राथमिकता देने के पीछे मंशा यही थी कि स्थानीय कलाएँ नई पीढ़ी तक अपनी जड़ें जमाए रखें।

दूसरे दिन: गेंद फेंक प्रतियोगिता और सांस्कृतिक निरंतरता

महोत्सव के दूसरे दिन पुरुष और महिला वर्ग में अलग-अलग गेंद फेंक प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। प्रत्येक वर्ग से दो-दो विजेताओं का चयन कर उन्हें पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया गया। दूसरे दिन भी लोकगीतों की प्रस्तुतियाँ जारी रहीं, जिससे उत्सव का उमंग और ग्रामीणों की भागीदारी अंत तक बनी रही।

उपस्थित गणमान्य और संगठनों की भूमिका

कार्यक्रम में कई स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें ग्राम प्रधान टोंगा व्यास जी बिंद, ग्राम प्रधान थानापुर राम सागर भारती, ग्राम प्रधान दाढ़ीराम राजेश प्रजापति, ग्राम प्रधान सुखनई गांव मंगल राय और दाढ़ीराम गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक यमुना प्रसाद प्रमुख रहे। अदाणी फाउंडेशन, भूमि अधिग्रहण विभाग और हेल्पएज इंडिया के टीम सदस्यों ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता की।

आगे की राह: ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक संरक्षण

दो दिवसीय इस ग्रामोत्सव ने दाढ़ीराम गांव के ग्रामीणों को आपसी मेलजोल मज़बूत करने और अपनी प्रतिभा सार्वजनिक मंच पर रखने का अवसर दिया। खेलकूद, रचनात्मकता और लोकसंगीत के त्रिकोण पर खड़े इस आयोजन ने यह रेखांकित किया कि सामुदायिक उत्सव ग्रामीण पहचान को जीवित रखने में कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजन भविष्य में भी क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ कजरी और बिरहा जैसी लोककलाएँ धीरे-धीरे हाशिये पर जा रही हैं, ऐसे आयोजन एक सार्थक हस्तक्षेप हो सकते हैं। हालाँकि, एकल उत्सवों की सीमा यह है कि वे तात्कालिक उत्साह तो जगाते हैं, पर दीर्घकालिक सांस्कृतिक संरक्षण के लिए नियमित संस्थागत प्रयास अनिवार्य हैं।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी ग्रामोत्सव क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
अदाणी ग्रामोत्सव एक दो दिवसीय सामुदायिक सांस्कृतिक उत्सव है, जो 11 और 12 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के दाढ़ीराम गांव में आयोजित किया गया। इसका आयोजन अदाणी फाउंडेशन और हेल्पएज इंडिया के सहयोग से हुआ।
ग्रामोत्सव में किन प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ?
महोत्सव में रस्साकशी, 'अपना गांव' विषय पर रंगोली प्रतियोगिता और गेंद फेंक प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। रस्साकशी में लड़कों की 6 और लड़कियों की 4 टीमों ने, रंगोली में 4 टीमों ने और गेंद फेंक में पुरुष व महिला दोनों वर्गों ने हिस्सा लिया।
लोकसंगीत को इस उत्सव में क्यों प्राथमिकता दी गई?
पूर्वांचल की कजरी और बिरहा जैसी लोकसंगीत परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और क्षेत्र की सांस्कृतिक अस्मिता को जीवित रखने के उद्देश्य से लोकसंगीत को विशेष महत्व दिया गया। स्थानीय लोकगायकों ने दोनों दिन प्रस्तुतियाँ दीं।
कार्यक्रम में कौन-कौन से गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए?
आयोजन में ग्राम प्रधान टोंगा व्यास जी बिंद, राम सागर भारती, राजेश प्रजापति, मंगल राय और सेवानिवृत्त शिक्षक यमुना प्रसाद उपस्थित रहे। अदाणी फाउंडेशन, भूमि अधिग्रहण विभाग और हेल्पएज इंडिया के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
इस ग्रामोत्सव का व्यापक उद्देश्य क्या था?
ग्रामोत्सव का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को सार्वजनिक मंच देना, आपसी सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करना और दाढ़ीराम व आसपास के गांवों की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना था।
राष्ट्र प्रेस
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