9 अगस्त 2026
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रांची में दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव शुरू, 10 हजार कलाकारों की जतरा ने सड़कों को बनाया सांस्कृतिक मंच

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रांची में दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव शुरू, 10 हजार कलाकारों की जतरा ने सड़कों को बनाया सांस्कृतिक मंच

सारांश

रांची की सड़कें 9 अगस्त को जनजातीय रंगों से सराबोर हो गईं — भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क से निकली जतरा में 10 हजार कलाकारों ने संथाल, मुंडा, हो, उरांव समेत छह से अधिक जनजातियों की परंपराओं को जीवंत किया। दो दिवसीय राजकीय आदिवासी महोत्सव झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव है।

मुख्य बातें

9 अगस्त 2026 को रांची में दो दिवसीय राजकीय आदिवासी महोत्सव का आगाज हुआ।
भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क से निकली जतरा में राज्यभर से करीब 10 हजार कलाकार शामिल हुए।
संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया और खरवार सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया।
जतरा में छह झांकियाँ निकाली गईं, जिनमें बिरसा मुंडा के जीवन और बलिदान को दर्शाया गया।
मंत्री चमरा लिंडा ने जतरा को हरी झंडी दिखाई और इसे नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का माध्यम बताया।

झारखंड की राजधानी रांची में 9 अगस्त 2026 को भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क से निकली भव्य जतरा (शोभायात्रा) के साथ दो दिवसीय राजकीय आदिवासी महोत्सव का आगाज हुआ। राज्य के सभी जिलों से आए करीब 10 हजार कलाकारों ने इस शोभायात्रा में भाग लिया और रांची की सड़कों को जीवंत सांस्कृतिक मंच में बदल दिया। यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की विरासत और झारखंड की समृद्ध जनजातीय परंपरा को समर्पित है।

जतरा का मार्ग और आयोजन

अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने जेल मोड़ स्थित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क से जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शोभायात्रा करम टोली चौक और एसएसपी आवास होते हुए मोरहाबादी तक पहुँची। रास्ते में बड़ी संख्या में नागरिक कलाकारों का उत्साहवर्धन करने के लिए एकत्रित हुए।

जनजातीय विविधता की झलक

संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया और खरवार सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों में सजे-धजे नजर आए। उनके हाथों में मांदर, नगाड़ा, ढोल और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र थे, जिनकी धुनों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय कर दिया। जतरा के दौरान छह झांकियाँ भी निकाली गईं, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और बलिदान के साथ-साथ आदिवासी जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया।

मंत्री चमरा लिंडा का संदेश

मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी को उनकी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष और बलिदान झारखंड की पहचान का अभिन्न हिस्सा है और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड की आदिवासी संस्कृति की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

उपस्थित अधिकारी और प्रशासनिक भागीदारी

कार्यक्रम में विभाग के प्रधान सचिव कृपानंद झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक राजीव लोचन, परियोजना निदेशक आईटीडीए रांची मनीषा तिर्की और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

आगे क्या

दो दिवसीय इस राजकीय महोत्सव में लोकनृत्य, लोकसंगीत, पारंपरिक वेशभूषा और जनजातीय जीवन की विविधता को मंच मिलेगा। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब झारखंड सरकार आदिवासी पहचान और संस्कृति के संरक्षण को नीतिगत प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस आयोजन को प्रतीकात्मक रूप से और भी महत्वपूर्ण बनाता है। हालाँकि सवाल यह भी है कि वार्षिक उत्सवों से परे जनजातीय समुदायों के भूमि अधिकार, शिक्षा और आजीविका के मुद्दों पर नीतिगत प्रगति कितनी हुई है — जो असली विरासत की कसौटी होगी।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची आदिवासी महोत्सव 2026 क्या है?
यह झारखंड सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय राजकीय आदिवासी महोत्सव है, जो 9 अगस्त 2026 को रांची में शुरू हुआ। इसमें राज्य के सभी जिलों से करीब 10 हजार कलाकारों ने भाग लिया और जनजातीय संस्कृति, नृत्य, संगीत एवं परंपराओं को मंच मिला।
जतरा (शोभायात्रा) किस स्थान से निकाली गई और कहाँ तक गई?
जतरा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क, जेल मोड़, रांची से शुरू हुई और करम टोली चौक तथा एसएसपी आवास होते हुए मोरहाबादी तक पहुँची।
इस महोत्सव में कौन-कौन सी जनजातियों ने भाग लिया?
महोत्सव में संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया और खरवार सहित झारखंड की विभिन्न जनजातियों के कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, आभूषणों और वाद्ययंत्रों के साथ भाग लिया।
महोत्सव का आयोजन 9 अगस्त को ही क्यों किया गया?
9 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि जनजातीय अधिकारों और संस्कृति के प्रति जागरूकता के लिए वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसलिए इस दिन का चुनाव प्रतीकात्मक रूप से सार्थक है।
मंत्री चमरा लिंडा ने महोत्सव के बारे में क्या कहा?
मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी को उनकी जड़ों से जोड़ने का माध्यम हैं। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी बताया।
राष्ट्र प्रेस
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