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अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी 27 मई 2026: रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें पूरा शुभ-अशुभ मुहूर्त

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अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी 27 मई 2026: रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें पूरा शुभ-अशुभ मुहूर्त

सारांश

27 मई 2026 को पुरुषोत्तम मास की द्वादशी पर रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह तिथि भगवान राम और लक्ष्मण को समर्पित है। भद्रा और राहुकाल के समय सावधानी ज़रूरी है — जानें पूरा मुहूर्त।

मुख्य बातें

27 मई 2026 (बुधवार) को अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी (चंपक द्वादशी) मनाई जाएगी।
रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:25 से 5:56 बजे तक — कार्य सिद्धि के लिए शुभ।
भद्रा सुबह 5:25 से 6:21 बजे तक; राहुकाल दोपहर 12:18 से 2:02 बजे तक — इन समयों में शुभ कार्य वर्जित।
एकादशी तिथि सुबह 6:21 बजे तक, इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ।
दिन का नक्षत्र चित्रा , योग व्यतीपात ; विजय मुहूर्त दोपहर 2:36 से 3:31 बजे तक।

पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में 27 मई 2026 (बुधवार) को ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी तिथि पर अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी मनाई जाएगी। यह पावन तिथि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण को समर्पित है, जिसे चंपक द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह तिथि पुरुषोत्तम मास में पड़ने के कारण विशेष रूप से 'अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी' कहलाती है।

दुर्लभ योगों का शुभ संयोग

इस तिथि पर रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। दोनों योग सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 56 मिनट तक रहेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये योग कार्य सिद्धि और शुभ परिणामों के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं। हालाँकि, भद्रा की छाया भी सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी, इसलिए इस अवधि में शुभ कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

तिथि और नक्षत्र का विवरण

बुधवार को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 25 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 12 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 3 बजकर 51 मिनट पर और चंद्रास्त 28 मई की सुबह 3 बजकर 1 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी, इसके पश्चात द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी। दिन का नक्षत्र चित्रा और योग व्यतीपात रहेगा।

शुभ मुहूर्त की पूरी सूची

इस दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 3 मिनट से 4 बजकर 44 मिनट तक।
प्रातः संध्या: सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 25 मिनट तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रवि योग: सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 56 मिनट तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 36 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7 बजकर 10 मिनट से 7 बजकर 31 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक।

अशुभ समय — इन घड़ियों में रहें सावधान

दिन के अशुभ काल इस प्रकार हैं:

भद्रा: सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक।
यमगंड: सुबह 7 बजकर 8 मिनट से 8 बजकर 52 मिनट तक।
गुलिक काल: सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक।
दुर्मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक।
राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक।

व्रत का महत्व और पूजा विधि

पुरुषोत्तम मास और द्वादशी तिथि — दोनों ही भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने, राम-लक्ष्मण की विधिवत पूजा करने और दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस व्रत के पालन से सुख, सौभाग्य, उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 27 मई 2026 को पड़ने वाली यह तिथि श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस वर्ष रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का एक साथ आना इसे और विशिष्ट बनाता है। उल्लेखनीय यह है कि दोनों शुभ योग और भद्रा लगभग एक ही समय पर हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए मुहूर्त चयन को सावधानी का विषय बनाता है। पंचांग आधारित यह जानकारी उन करोड़ों हिंदी पाठकों के लिए व्यावहारिक महत्व रखती है जो धार्मिक अनुष्ठानों की सटीक समय-सारणी डिजिटल माध्यमों से खोजते हैं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी 2026 कब है?
अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी 27 मई 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी। यह पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी तिथि है, जो सुबह 6 बजकर 21 मिनट के बाद प्रारंभ होती है।
रामलक्ष्मण द्वादशी को चंपक द्वादशी क्यों कहते हैं?
यह तिथि भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को समर्पित है और इसे चंपक द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चंपक (चमेली) के फूलों से पूजा का विशेष विधान माना जाता है।
27 मई 2026 को सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग किस समय है?
27 मई 2026 को सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग दोनों सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 56 मिनट तक रहेंगे। यह संयोग शुभ कार्यों और पूजा के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
27 मई 2026 को राहुकाल और भद्रा का समय क्या है?
27 मई को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। भद्रा की छाया सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी — इन अवधियों में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी का व्रत रखने से क्या लाभ होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने, राम-लक्ष्मण की पूजा करने और दान करने से सुख, सौभाग्य, उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पुरुषोत्तम मास और द्वादशी तिथि दोनों भगवान विष्णु को प्रिय होने से इस दिन का पुण्य कई गुना माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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