14 जुलाई 2026
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31 मई पंचांग 2026: अधिक पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि एक नज़र में

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31 मई पंचांग 2026: अधिक पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि एक नज़र में

सारांश

31 मई 2026 को पुरुषोत्तम मास की अधिक पूर्णिमा का दुर्लभ संयोग है। पूर्णिमा तिथि दोपहर 2:14 बजे तक, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03 बजे से और राहुकाल शाम 5:30 बजे से — जानें पूरा पंचांग और पूजा का सही समय।

मुख्य बातें

31 मई 2026 को पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का 15वाँ दिन और अधिक पूर्णिमा का संयोग।
पूर्णिमा तिथि 30 मई सुबह 11:58 बजे से शुरू होकर 31 मई दोपहर 2:14 बजे तक।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03–4:43 , अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:51–12:47 बजे।
राहुकाल शाम 5:30–7:14 , यमगंड दोपहर 12:19–2:03 बजे — इस दौरान शुभ कार्य वर्जित।
इस दिन विष्णु सहस्रनाम पाठ , गंगा स्नान और दान का कई गुना पुण्य मिलता है।

31 मई 2026, रविवार को पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का 15वाँ दिन है और इस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि — जिसे अधिक पूर्णिमा भी कहते हैं — का संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन जप, तप, दान, पूजा-पाठ और स्नान का असाधारण महत्व है, क्योंकि पुरुषोत्तम मास में पूर्णिमा के दिन किए गए शुभ कर्मों का कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ शिव-गौरी की विशेष आराधना के लिए भी उत्तम माना गया है।

अधिक पूर्णिमा तिथि का समय

पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 मई 2026 (शनिवार) की सुबह 11 बजकर 58 मिनट से होगा और इसका समापन 31 मई 2026 (रविवार) की दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदया तिथि के नियम के अनुसार पूर्णिमा का स्नान, दान और पूजा 31 मई को ही संपन्न की जाएगी।

इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 14 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 7 बजकर 36 मिनट पर होगा। नक्षत्र अनुराधा दोपहर 4 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, योग शिव सुबह 5 बजकर 25 मिनट तक और करण बव दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

शुभ मुहूर्त की पूरी सूची

अधिक पूर्णिमा पर पूजा, दान और मांगलिक कार्यों के लिए निम्न शुभ मुहूर्त विशेष फलदायी माने गए हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:03 से 4:43 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 से 12:47 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:37 से 3:33 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:13 से 7:33 बजे तक।

अशुभ काल — राहुकाल और यमगंड

किसी भी शुभ कार्य की योजना बनाते समय इन अशुभ कालों से बचना आवश्यक है:

राहुकाल: शाम 5:30 से 7:14 बजे तक।
यमगंड: दोपहर 12:19 से 2:03 बजे तक।
गुलिक काल: दोपहर 3:46 से 5:30 बजे तक।

अधिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है और इस पूरे मास में किए गए धार्मिक कर्मों का फल सामान्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। अधिक पूर्णिमा के दिन विष्णु सहस्रनाम पाठ, हरिवंश पुराण का श्रवण, पुरुषोत्तम मास कथा का पाठ, दान-पुण्य और गंगा स्नान — अथवा घर पर पवित्र स्नान — करने का विशेष विधान है।

गौरतलब है कि अधिक मास प्रत्येक 32-33 महीनों में एक बार आता है, इसलिए इसे आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य संचय का दुर्लभ अवसर माना जाता है। इस वर्ष 2026 में यह संयोग ज्येष्ठ मास में बन रहा है, जो स्वयं में विशेष है।

आगे क्या करें

श्रद्धालु 31 मई को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा से दिन का शुभारंभ कर सकते हैं। दोपहर में अभिजीत मुहूर्त दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त में दीप-दान और संध्या आरती का विशेष महत्व है। राहुकाल में किसी भी नए कार्य का आरंभ न करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दैनिक जीवन की योजना का हिस्सा हैं — यही कारण है कि ये Google Search पर लगातार उच्च ट्रैफिक खींचती हैं। अधिक मास प्रत्येक 32-33 महीनों में एक बार आता है, इसलिए इस वर्ष की अधिक पूर्णिमा का संयोग असाधारण है। मीडिया को चाहिए कि वह मुहूर्त की सटीक जानकारी के साथ-साथ इसके पीछे की शास्त्रीय पृष्ठभूमि भी दे, ताकि पाठक केवल समय नहीं, संदर्भ भी समझें।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

31 मई 2026 को अधिक पूर्णिमा कब है?
पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026 की सुबह 11 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर 31 मई 2026 की दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के नियमानुसार स्नान, दान और पूजा 31 मई को ही की जाएगी।
अधिक पूर्णिमा पर कौन-से शुभ मुहूर्त हैं?
31 मई 2026 को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03–4:43 बजे, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:51–12:47 बजे, विजय मुहूर्त दोपहर 2:37–3:33 बजे और गोधूलि मुहूर्त शाम 7:13–7:33 बजे रहेगा। इन समयों में पूजा, दान और मांगलिक कार्य विशेष फलदायी माने गए हैं।
31 मई को राहुकाल कितने बजे है?
31 मई 2026 को राहुकाल शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी नया या शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
पुरुषोत्तम मास में अधिक पूर्णिमा का क्या महत्व है?
शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है और इस मास में की गई पूजा, दान व स्नान का पुण्य सामान्य महीनों से कई गुना अधिक होता है। अधिक पूर्णिमा पर विष्णु सहस्रनाम पाठ, हरिवंश पुराण श्रवण और गंगा स्नान का विशेष विधान है।
31 मई 2026 को सूर्योदय और चंद्रोदय कितने बजे होगा?
31 मई 2026 को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 14 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 7 बजकर 36 मिनट पर होगा, जो पूर्णिमा के चंद्र-दर्शन के लिए शुभ समय है।
राष्ट्र प्रेस
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