31 मई पंचांग 2026: अधिक पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि एक नज़र में
सारांश
मुख्य बातें
31 मई 2026, रविवार को पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का 15वाँ दिन है और इस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि — जिसे अधिक पूर्णिमा भी कहते हैं — का संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन जप, तप, दान, पूजा-पाठ और स्नान का असाधारण महत्व है, क्योंकि पुरुषोत्तम मास में पूर्णिमा के दिन किए गए शुभ कर्मों का कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ शिव-गौरी की विशेष आराधना के लिए भी उत्तम माना गया है।
अधिक पूर्णिमा तिथि का समय
पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 मई 2026 (शनिवार) की सुबह 11 बजकर 58 मिनट से होगा और इसका समापन 31 मई 2026 (रविवार) की दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदया तिथि के नियम के अनुसार पूर्णिमा का स्नान, दान और पूजा 31 मई को ही संपन्न की जाएगी।
इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 14 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 7 बजकर 36 मिनट पर होगा। नक्षत्र अनुराधा दोपहर 4 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, योग शिव सुबह 5 बजकर 25 मिनट तक और करण बव दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
शुभ मुहूर्त की पूरी सूची
अधिक पूर्णिमा पर पूजा, दान और मांगलिक कार्यों के लिए निम्न शुभ मुहूर्त विशेष फलदायी माने गए हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:03 से 4:43 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 से 12:47 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:37 से 3:33 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:13 से 7:33 बजे तक।
अशुभ काल — राहुकाल और यमगंड
किसी भी शुभ कार्य की योजना बनाते समय इन अशुभ कालों से बचना आवश्यक है:
राहुकाल: शाम 5:30 से 7:14 बजे तक।
यमगंड: दोपहर 12:19 से 2:03 बजे तक।
गुलिक काल: दोपहर 3:46 से 5:30 बजे तक।
अधिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है और इस पूरे मास में किए गए धार्मिक कर्मों का फल सामान्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। अधिक पूर्णिमा के दिन विष्णु सहस्रनाम पाठ, हरिवंश पुराण का श्रवण, पुरुषोत्तम मास कथा का पाठ, दान-पुण्य और गंगा स्नान — अथवा घर पर पवित्र स्नान — करने का विशेष विधान है।
गौरतलब है कि अधिक मास प्रत्येक 32-33 महीनों में एक बार आता है, इसलिए इसे आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य संचय का दुर्लभ अवसर माना जाता है। इस वर्ष 2026 में यह संयोग ज्येष्ठ मास में बन रहा है, जो स्वयं में विशेष है।
आगे क्या करें
श्रद्धालु 31 मई को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा से दिन का शुभारंभ कर सकते हैं। दोपहर में अभिजीत मुहूर्त दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त में दीप-दान और संध्या आरती का विशेष महत्व है। राहुकाल में किसी भी नए कार्य का आरंभ न करें।