16 जुलाई 2026
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ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा 2026: दुर्लभ संयोग में दान-जप से मिलेगा हजारों गुना पुण्य

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ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा 2026: दुर्लभ संयोग में दान-जप से मिलेगा हजारों गुना पुण्य

सारांश

तीन साल में एक बार आने वाला अधिकमास इस बार ज्येष्ठ की पूर्णिमा के साथ मिलकर दुर्लभ संयोग बना रहा है। 29 मई को पड़ने वाली यह 'सर्वसिद्धिदायिनी' तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है — दान, जप और व्रत का फल सामान्य दिनों से हजारों गुना अधिक माना जाता है।

मुख्य बातें

ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा इस वर्ष शनिवार, 29 मई को पड़ रही है।
अधिकमास हर तीन वर्ष में एक बार आता है — पद्म पुराण के अनुसार इसकी पूर्णिमा 'सर्वसिद्धिदायिनी' मानी जाती है।
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:51 बजे से 12:46 बजे तक; राहुकाल सुबह 8:51 बजे से 10:35 बजे तक।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, सत्यनारायण कथा और विष्णु सहस्रनाम का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
ज्येष्ठ की गर्मी में जल मटकी, सत्तू, आम, खरबूजा और वस्त्र दान महापुण्यदायी बताया गया है।

ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि इस बार शनिवार, 29 मई को पड़ रही है — और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह संयोग अत्यंत दुर्लभ है। पद्म पुराण में उल्लिखित मान्यता के अनुसार, इस तिथि पर किया गया दान, जप और व्रत सामान्य पूर्णिमाओं की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है।

अधिकमास का महत्व

पद्म पुराण के अनुसार, अधिकमास का आगमन प्रत्येक तीन वर्ष में केवल एक बार होता है। इसीलिए इसे 'मलमास' या 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन मास की पूर्णिमा 'सर्वसिद्धिदायिनी' होती है — अर्थात यह हर प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई हजार गुना अधिक बताया गया है।

शुभ मुहूर्त और ग्रह स्थिति

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस शनिवार सूर्य वृषभ राशि में और चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेंगे। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। वहीं, राहुकाल का समय सुबह 8 बजकर 51 मिनट से 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा — इस अवधि में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

पूजा विधि

इस दिन विशेष पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्म के बाद यदि संभव हो तो जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके पश्चात स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण कर घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। श्री हरि को फूल, फल, चंदन, अक्षत, धूप-दीप और भोग में तुलसी पत्ती अवश्य अर्पित करें। सत्यनारायण कथा का पाठ करें तथा 'विष्णु सहस्रनाम' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें।

दान का विशेष महत्व

ज्येष्ठ मास में भीषण गर्मी के कारण इस पूर्णिमा पर जल से भरी मटकी (घड़ा), सत्तू, आम, खरबूजा, पंखा, वस्त्र या अन्न का दान विशेष रूप से महापुण्यदायी माना जाता है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देना इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य बताया गया है। यह तिथि भगवान नारायण (विष्णु) को समर्पित है और इस दिन उपवास रखने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है — ऐसी धार्मिक मान्यता है।

आगे क्या

अधिकमास की यह पूर्णिमा श्रद्धालुओं के लिए तीन वर्षों में एक बार आने वाला दुर्लभ अवसर है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस दिन किया गया हर शुभ कर्म — चाहे वह जप हो, व्रत हो या दान — आने वाले समय में विशेष फल देने वाला माना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ करोड़ों श्रद्धालु इन तिथियों को जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों से जोड़ते हैं। उल्लेखनीय है कि पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में वर्णित मान्यताएँ पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा हैं, जिन्हें लाखों परिवार आज भी श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं। हालाँकि ये मान्यताएँ आस्था पर आधारित हैं, इनका सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व निर्विवाद है — विशेषकर दान की परंपरा, जो गर्मी के मौसम में जरूरतमंदों तक जल और अन्न पहुँचाने का व्यावहारिक माध्यम भी बनती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा 2026 कब है?
ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा तिथि इस वर्ष शनिवार, 29 मई 2026 को पड़ रही है। यह तीन वर्षों में एक बार आने वाला दुर्लभ संयोग है।
अधिकमास पूर्णिमा का क्या महत्व है?
पद्म पुराण के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा 'सर्वसिद्धिदायिनी' होती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप और व्रत सामान्य पूर्णिमाओं की तुलना में हजारों गुना अधिक पुण्यदायी होता है।
अधिकमास पूर्णिमा पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, 29 मई को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। राहुकाल सुबह 8:51 बजे से 10:35 बजे तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
इस दिन कौन-सा दान करना सबसे शुभ माना जाता है?
ज्येष्ठ की गर्मी को ध्यान में रखते हुए जल से भरी मटकी, सत्तू, आम, खरबूजा, पंखा, वस्त्र और अन्न का दान विशेष रूप से महापुण्यदायी बताया गया है। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देना इस दिन का प्रमुख धार्मिक कर्तव्य है।
अधिकमास पूर्णिमा पर किस मंत्र का जप करना चाहिए?
इस दिन 'विष्णु सहस्रनाम' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। साथ ही सत्यनारायण कथा का पाठ और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा भी इस दिन की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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