अग्निवीर सेवा अवधि 6 साल: पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी बोले — देश और सेना दोनों के लिए सही फैसला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार के उस फैसले का पूर्व सैन्य अधिकारियों और भूतपूर्व सैनिकों ने खुलकर स्वागत किया है, जिसमें अग्निवीरों की सेवा अवधि 4 साल से बढ़ाकर 6 साल करने की घोषणा की गई है। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) ने 5 नवंबर 2026 को कहा कि यह निर्णय न केवल सशस्त्र बलों को बल्कि देश को भी मजबूती देगा, और उन 75 प्रतिशत अग्निवीरों की अनिश्चितता समाप्त करेगा जो नियमित सेवा में नहीं लिए जाते। इस फैसले पर सेवानिवृत्त कर्नल सागर सिंह सलारिया और पूर्व सैनिक अंचला शर्मा ने भी सहमति जताई है।
एडमिरल त्रिपाठी की प्रतिक्रिया
एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा, 'बिल्कुल, मुझे लगता है कि सही कदम उठाया गया है, क्योंकि अनिच्छुक लोगों को सशस्त्र बलों में नहीं लिया जा सकता, खासकर सेना में। जब तक आपके अंदर जुनून नहीं होगा और आप पूरी तरह से आश्वस्त नहीं होंगे कि आप सही जगह पर हैं, तब तक आप युद्ध नहीं लड़ सकते।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सेवा छोड़ने के पीछे पारिवारिक, आर्थिक या उद्यमशीलता से जुड़े कारण हो सकते हैं, और यह परिस्थिति किसी भी पेशे में स्वाभाविक है।
एडमिरल ने समझाया कि करियर-बदलाव की यह प्रवृत्ति केवल सेना तक सीमित नहीं है — डॉक्टर, इंजीनियर, यहाँ तक कि IIT स्नातक भी अंततः अपनी मूल राह से अलग जा सकते हैं। इसलिए, यदि यही प्रावधान अग्निपथ योजना में भी लागू होता है, तो यह देश और सशस्त्र बलों दोनों के हित में है।
75 प्रतिशत श्रेणी की चिंता और दो साल के विस्तार का महत्व
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि दो साल का विस्तार विशेष रूप से उन 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए राहत देने वाला है जो 4 साल की सेवा के बाद नियमित सेना में शामिल नहीं किए जाते। उन्होंने माना कि चार साल की समाप्ति के बाद भविष्य को लेकर इन युवाओं में 'कुछ संदेह, चिंता और अनिश्चितता' बनी रहती थी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इन 75 प्रतिशत सेवानिवृत्त अग्निवीरों के पुनर्समायोजन के लिए एक ढाँचा भी तैयार किया था, जिसमें गृह मंत्रालय के तहत व्यापक प्रावधान शामिल थे। तथापि, एडमिरल के शब्दों में, 'जब तक कोई चीज वास्तव में हमारे हाथ में नहीं आ जाती, तब तक अनिश्चितता स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।' अब यह अतिरिक्त दो साल उन्हें और उनके परिवारों को 'बड़ी राहत' देगा।
सेवानिवृत्त कर्नल सलारिया और पूर्व सैनिक शर्मा की राय
सेवानिवृत्त कर्नल सागर सिंह सलारिया ने कहा कि यह फैसला बहुत अच्छा है। उन्होंने रेखांकित किया कि 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में लिया जाएगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत को दो साल का विस्तार मिलेगा — जो युवा सैनिकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
पूर्व सैनिक अंचला शर्मा ने नौशेरा-सुंदरबनी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ 'लगभग हर घर से कोई न कोई सेना में सेवारत मिलेगा।' उन्होंने बताया कि अग्निपथ योजना 2022 में शुरू होने के बाद से युवाओं की यह इच्छा थी कि सेवा अवधि बढ़ाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि योजना के शुरुआती दौर में 'कुछ अफवाहें फैलाई गईं' कि यह सफल नहीं होगी, लेकिन कैबिनेट के ताज़ा फैसले से अग्निवीरों की उम्मीदें और मजबूत होंगी।
अग्निपथ योजना की पृष्ठभूमि
अग्निपथ योजना को 2022 में केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए शुरू किया गया था। इसके तहत अग्निवीर 4 साल की अल्पकालिक सेवा करते हैं, जिसके बाद केवल 25 प्रतिशत को नियमित सेना में स्थान मिलता है। योजना की घोषणा के समय कुछ राज्यों में प्रदर्शन और विरोध हुए थे, और विपक्ष ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ 'खिलवाड़' बताया था।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार सेना में अनुभव और दीर्घकालिक प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान दे रही है। 6 साल की सेवा अवधि से अग्निवीरों को अधिक परिपक्व और युद्धक प्रशिक्षण मिलेगा, जो बल की समग्र परिचालन क्षमता के लिए भी लाभकारी माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
फैसले के बाद अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में बदलाव और नई शर्तों को लागू करने के लिए संबंधित अधिसूचनाएँ जारी होने की संभावना है। अंचला शर्मा ने यह भी उम्मीद जताई कि 'शायद भविष्य में यह स्थायी भी हो जाए।' रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सेवा अवधि का यह विस्तार अग्निपथ योजना की दीर्घकालिक स्वीकार्यता और विश्वसनीयता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।