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अग्निवीर सेवा अवधि 6 साल: रिटायर्ड मेजर जनरल शम्मी सभरवाल ने फैसले को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य

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अग्निवीर सेवा अवधि 6 साल: रिटायर्ड मेजर जनरल शम्मी सभरवाल ने फैसले को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य

सारांश

अग्निवीरों की सेवा अवधि चार से छह साल करने का सरकारी फैसला सिर्फ नीतिगत बदलाव नहीं — यह 75% अग्निवीरों के लिए आर्थिक जीवन रेखा है। रिटायर्ड मेजर जनरल सभरवाल के अनुसार, छह साल बाद ₹30-32 लाख लेकर निकलने वाला जवान सेना का राजदूत भी बन सकता है और उद्यमी भी।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल से बढ़ाकर छह साल करने का फैसला किया।
रिटायर्ड मेजर जनरल शम्मी सभरवाल ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना की दक्षता और युवाओं के आर्थिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
पहले केवल 25% अग्निवीरों को नियमित सेना में रखने का प्रावधान था; अब 75% को भी दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलेगा।
छह साल की सेवा के बाद एक अग्निवीर के पास लगभग ₹30 से ₹32 लाख होने का अनुमान है।
सभरवाल ने युवाओं को सेवानिवृत्ति के बाद उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया, पौड़ी गढ़वाल जैसे क्षेत्रों का उदाहरण दिया।

केंद्र सरकार के अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल से बढ़ाकर छह साल करने के निर्णय का रिटायर्ड मेजर जनरल शम्मी सभरवाल ने खुलकर स्वागत किया है। देहरादून में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने 4 नवंबर 2026 को कहा कि यह फैसला देश की सुरक्षा, सेना की परिचालन क्षमता और अग्निवीरों के आर्थिक भविष्य — तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, मौजूदा वैश्विक तनाव के माहौल में प्रशिक्षित सैन्यकर्मियों को अतिरिक्त दो वर्ष सेना में बनाए रखना न केवल उचित, बल्कि अनिवार्य है।

राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क

सभरवाल ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं हैं और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि चार साल का कठोर सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जवानों को इस संवेदनशील दौर में सेना से बाहर भेजना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, 'देश सर्वोपरि है और राष्ट्रीय सुरक्षा को हर निर्णय में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।'

सेना की कार्यक्षमता पर असर

सभरवाल ने बताया कि अग्निवीरों की वर्तमान औसत आयु 21 से 22 वर्ष के बीच है। दो वर्ष अतिरिक्त सेवा के बाद भी वे 24 से 25 वर्ष की उम्र में ही सेना से बाहर आएंगे। उस आयु में उनके पास जो युद्ध-अनुभव और तकनीकी प्रशिक्षण होगा, वह किसी भी यूनिट की परिचालन दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बना सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब सेना को अनुभवी और तैयार जनशक्ति की दीर्घकालिक जरूरत है।

अग्निवीरों का आर्थिक भविष्य

रिटायर्ड मेजर जनरल ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों में कई विशेषज्ञ चर्चाओं में अग्निवीरों के चार साल बाद के भविष्य को लेकर चिंताएँ उठती रही हैं। उनके अनुमान के अनुसार, चार साल की सेवा के बाद बचत और सरकारी अनुदान मिलाकर एक अग्निवीर के पास लगभग ₹20 से ₹22 लाख हो सकते हैं। यदि वही जवान प्रतिमाह ₹5,000 घर भेजे, ₹5,000 व्यक्तिगत खर्च करे और शेष बचाए — तो सेना में भोजन, आवास और अन्य सुविधाएँ निःशुल्क उपलब्ध होने के कारण — छह साल की सेवा पूरी करने के बाद वह लगभग ₹30 से ₹32 लाख लेकर बाहर निकल सकता है।

75 प्रतिशत अग्निवीरों को सीधा लाभ

गौरतलब है कि पहले के प्रावधान में केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेना में शामिल होने का अवसर था, जबकि शेष 75 प्रतिशत को चार साल बाद अनिवार्य रूप से सेवा छोड़नी पड़ती थी। अब इन 75 प्रतिशत को भी दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलेगा, जिससे उनके आर्थिक आधार में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है। सभरवाल ने यह भी कहा कि यह फैसला भविष्य में अग्निवीर बनने की तैयारी कर रहे युवाओं का मनोबल भी बढ़ाएगा, क्योंकि अब उन्हें कम से कम छह साल की निश्चित सेवा का आश्वासन मिलेगा।

सेवानिवृत्ति के बाद उद्यमिता का मार्ग

सभरवाल ने उदाहरण देते हुए बताया कि पौड़ी गढ़वाल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले युवा ₹30 लाख की आर्थिक क्षमता और सैन्य अनुशासन के बल पर पोल्ट्री फार्म, कृषि या लघु उद्योग शुरू कर सकते हैं। उनके अनुसार, सरकारी योजनाओं और सॉफ्ट लोन जैसी सुविधाओं का लाभ उठाकर ऐसे युवा न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि अपने समुदाय में रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। उनकी यह टिप्पणी अग्निवीर योजना की दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक संभावनाओं की ओर संकेत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि सरकार इस विस्तारित अवधि के साथ वेतन, बीमा और पेंशन-संबंधी अन्य माँगों पर भी कितनी संवेदनशीलता दिखाती है। ₹30-32 लाख का अनुमान एक आदर्श बचत परिदृश्य पर टिका है — जमीनी हकीकत में पारिवारिक दबाव और क्षेत्रीय असमानताएँ इस गणित को बदल सकती हैं। योजना की सफलता संख्याओं से नहीं, बल्कि उन युवाओं की वास्तविक आजीविका से आँकी जाएगी जो छह साल बाद नागरिक जीवन में लौटेंगे।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अग्निवीरों की सेवा अवधि अब कितनी होगी?
केंद्र सरकार ने अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल से बढ़ाकर छह साल करने का फैसला किया है। यह बदलाव सभी अग्निवीरों पर लागू होगा, जिसमें वे 75% भी शामिल हैं जो पहले चार साल बाद अनिवार्य रूप से सेवा छोड़ते थे।
इस फैसले से अग्निवीरों को आर्थिक रूप से क्या फायदा होगा?
रिटायर्ड मेजर जनरल शम्मी सभरवाल के अनुमान के अनुसार, छह साल की सेवा पूरी करने के बाद एक बचत करने वाला अग्निवीर लगभग ₹30 से ₹32 लाख लेकर सेना से बाहर आ सकता है। यह राशि बचत और सरकारी अनुदान को मिलाकर बनती है।
75% अग्निवीरों पर इस बदलाव का क्या प्रभाव पड़ेगा?
पहले के प्रावधान में केवल 25% अग्निवीरों को नियमित सेना में रखने का अवसर था और 75% को चार साल बाद सेवा छोड़नी पड़ती थी। अब इन 75% को भी दो वर्ष अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
सेवा अवधि बढ़ाने का राष्ट्रीय सुरक्षा से क्या संबंध है?
सभरवाल के अनुसार, मौजूदा वैश्विक तनाव के माहौल में चार साल का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जवानों को सेना से बाहर भेजना उचित नहीं होगा। प्रशिक्षित मानव संसाधन को दो वर्ष अतिरिक्त बनाए रखने से सेना की परिचालन तैयारी मजबूत होगी।
सेवानिवृत्त होने के बाद अग्निवीर क्या कर सकते हैं?
सभरवाल ने सुझाव दिया कि छह साल की सेवा के बाद आर्थिक रूप से सशक्त और अनुशासित अग्निवीर पोल्ट्री फार्म, कृषि या लघु उद्योग जैसे उद्यम शुरू कर सकते हैं। सरकारी योजनाओं और सॉफ्ट लोन के माध्यम से वे दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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