अजय राय की विवादित टिप्पणी पर भाजपा का पलटवार, कई नेताओं ने कांग्रेस को बताया 'नकारात्मक पार्टी'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अजय राय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा पलटवार किया है। 22 मई को लखनऊ में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने एक स्वर में कांग्रेस की भाषा और मानसिकता पर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस तरह के बयान कांग्रेस की बढ़ती हताशा और सिकुड़ते राजनीतिक आधार को दर्शाते हैं।
भाजपा सांसद और मंत्रियों की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद धरमबीर सिंह ने कहा, 'चाहे राहुल गांधी हों, मध्य प्रदेश के दिग्विजय सिंह हों या अजय राय — किसी व्यक्ति की जैसी मानसिकता होती है, वैसे ही विचार उसके मुंह से बाहर आते हैं। यह पार्टी अब एक नकारात्मक पार्टी बन चुकी है।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इससे पहले अजय राय का नाम नहीं सुना था।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने मांग की कि राहुल गांधी और अजय राय देश की जनता से माफी मांगें। उन्होंने कहा, 'दो दिन पहले ही राहुल गांधी ने अमित शाह और पीएम मोदी को गद्दार कहा था। यह उनके शब्दों का ही अपमान है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का 'कांग्रेस-मुक्त भारत' का मिशन सफल होगा।
मंत्रियों ने कांग्रेस की हताशा को बताया कारण
मंत्री दयाशंकर मिश्र ने कहा, 'कांग्रेस के भीतर की हताशा अब साफ तौर पर दिखाई दे रही है। कांग्रेस अब सिर्फ केरल तक ही सिमट कर रह गई है और जैसे-जैसे पार्टी का दायरा सिकुड़ता जा रहा है, उसके नेता और भी ज़्यादा हताश होते जा रहे हैं।' उन्होंने इसे 'सबसे बड़ा अपमान' करार दिया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेताओं और उनके समर्थकों द्वारा आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल अब उनकी 'राजनीतिक फितरत का हिस्सा' बन चुका है। उनका कहना था कि गाली-गलौज और अपमानजनक शब्दावली का सहारा लेना इस पार्टी की रणनीतिक कमज़ोरी को उजागर करता है।
जनता की समझदारी पर भरोसा
मंत्री सुरेंद्र दिलेर ने कहा कि जनता बेहद समझदार है और जहाँ कहीं भी कांग्रेस का थोड़ा-बहुत वजूद बचा है, जनता उन्हें वहाँ से भी उखाड़ फेंकेगी। उनके अनुसार, इस तरह के बयान कांग्रेस की असली मानसिकता को उजागर करते हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भाजपा और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध पहले से ही तेज़ है। कथित तौर पर राहुल गांधी ने भी हाल ही में केंद्रीय नेताओं पर तीखे हमले किए थे, जिसे भाजपा ने चुनावी हार की बौखलाहट बताया। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच इस तरह की भाषाई तल्खी भारतीय राजनीतिक विमर्श को नुकसान पहुँचाती है।
भाजपा नेताओं की यह एकजुट प्रतिक्रिया संकेत देती है कि पार्टी इस मुद्दे को आगामी राजनीतिक बहस में भुनाने की रणनीति पर काम कर सकती है।