11 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नागांव उपचुनाव जीत के बाद भाजपा के देवाशीष शर्मा का दावा — अजमल की सांप्रदायिक अपील मतदाताओं ने ठुकराई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नागांव उपचुनाव जीत के बाद भाजपा के देवाशीष शर्मा का दावा — अजमल की सांप्रदायिक अपील मतदाताओं ने ठुकराई

सारांश

नागांव लोकसभा उपचुनाव में BJP के देवाशीष शर्मा ने AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को 1,57,804 वोटों के अंतर से हराया। शर्मा का दावा है कि अजमल की सांप्रदायिक अपील उलटी पड़ी और मतदाताओं ने उसे ठुकरा दिया — मुस्लिम बहुल सीट पर यह जीत असम की राजनीति में एक नई करवट का संकेत है।

मुख्य बातें

देवाशीष शर्मा (BJP) ने नागांव लोकसभा उपचुनाव में AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को 1,57,804 मतों के अंतर से हराया।
शर्मा को 6,91,804 वोट मिले; अजमल को 5,34,000 वोट प्राप्त हुए।
शर्मा का दावा — अजमल के सांप्रदायिक आधार पर मत माँगने के तरीके को मतदाताओं ने अस्वीकार किया।
शर्मा ने जीत का श्रेय साढ़े चार वर्षों के जनसंपर्क, BJP नीतियों और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व को दिया।
शर्मा ने भविष्यवाणी की कि AIUDF की राजनीतिक स्थिति कमज़ोर होगी और वह कांग्रेस की तरह क्षीण होती जाएगी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनिर्वाचित सांसद देवाशीष शर्मा ने 10 अक्टूबर को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने नागांव लोकसभा उपचुनाव के प्रचार में सांप्रदायिक आधार पर मत माँगने की कोशिश की, जिसे मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया। ताज़ा चुनावी आँकड़ों के अनुसार, शर्मा ने अजमल को 1,57,804 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया।

मुख्य घटनाक्रम

शर्मा को इस चुनाव में 6,91,804 वोट प्राप्त हुए, जबकि अजमल को 5,34,000 वोट मिले। मुस्लिम मतदाताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति वाले इस संसदीय क्षेत्र में BJP की यह जीत राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

शर्मा ने स्पष्ट किया, "मुझे नहीं पता कि अजमल ने मेरी मदद की या नहीं, क्योंकि वह मेरे खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन उनके चुनाव प्रचार का तरीका मेरे पक्ष में गया, क्योंकि उन्होंने सांप्रदायिक आधार पर वोट माँगने की कोशिश की, जिसे लोगों ने स्वीकार नहीं किया।"

अजमल और AIUDF पर भविष्यवाणी

शर्मा ने यह भी दावा किया कि आगामी वर्षों में AIUDF की राजनीतिक ज़मीन और कमज़ोर होगी। उनके अनुसार, जिस तरह कांग्रेस असम में सिकुड़ती गई, उसी तरह AIUDF का भी क्षरण होता रहेगा। हालाँकि, यह उनका निजी आकलन है और इसे स्वतंत्र विश्लेषकों की राय से पुष्ट नहीं किया गया है।

जीत के पीछे शर्मा का जनसंपर्क

अल्पसंख्यक मतदाताओं के समर्थन के सवाल पर शर्मा ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से वे क्षेत्र की जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहे। उन्होंने बताया कि कैंसर पीड़ितों और उससे उबर चुके लोगों के साथ उनके व्यक्तिगत जुड़ाव ने मतदाताओं के साथ एक भावनात्मक रिश्ता बनाया, जिसका सकारात्मक प्रभाव मतदान में दिखा।

शर्मा ने अपनी जीत का श्रेय BJP की नीतियों और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व को भी दिया।

नौकरशाही पृष्ठभूमि पर सवाल

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उन्होंने मोरीगांव और नागांव के उपायुक्त (DC) के पद पर रहते हुए राजनीतिक करियर की तैयारी की थी, तो शर्मा ने इसे नकारा। उन्होंने कहा कि एक सरकारी अधिकारी का काम राज्य सरकार की योजनाओं को ज़मीन पर उतारना होता है, न कि राजनीतिक हित साधना।

शर्मा ने स्वीकार किया कि कॉलेज के दिनों से उनकी राजनीति में रुचि रही है और उन्होंने राजनीति विज्ञान की पढ़ाई भी की थी। उन्होंने कहा, "कुछ बातें किस्मत में लिखी होती हैं और शायद यही मेरी नियति थी।"

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब असम में AIUDF और कांग्रेस के बीच विपक्षी एकजुटता की कोशिशें पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही हैं। नागांव की यह हार अजमल के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक — दोनों स्तरों पर एक बड़ा झटका है। आगामी असम विधानसभा चुनाव से पहले इस परिणाम के निहितार्थों पर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि वे स्वयं प्रतिद्वंद्वी थे और इसे 'सीधे फायदे' से अलग करने में सावधानी बरत रहे हैं। गौरतलब है कि 2021 के बाद से असम में AIUDF लगातार कमज़ोर हुई है, जबकि BJP ने अल्पसंख्यक क्षेत्रों में भी पैठ बनाई है। असली सवाल यह है कि क्या यह बदलाव स्थायी है या केवल शर्मा के व्यक्तिगत जनसंपर्क का परिणाम — आगामी विधानसभा चुनाव इसका असली जवाब देंगे।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागांव लोकसभा उपचुनाव में कौन जीता और कितने वोटों से?
BJP के देवाशीष शर्मा ने नागांव लोकसभा उपचुनाव में AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को 1,57,804 मतों के अंतर से हराया। शर्मा को 6,91,804 वोट मिले, जबकि अजमल को 5,34,000 वोट प्राप्त हुए।
देवाशीष शर्मा ने अजमल पर क्या आरोप लगाया?
शर्मा ने दावा किया कि अजमल ने चुनाव प्रचार के दौरान सांप्रदायिक आधार पर मत माँगने की कोशिश की। उनके अनुसार मतदाताओं ने इस तरीके को अस्वीकार किया, जिसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ा।
शर्मा ने अपनी जीत का श्रेय किसे दिया?
शर्मा ने जीत का श्रेय साढ़े चार वर्षों के जनसंपर्क, कैंसर पीड़ितों के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव, BJP की नीतियों और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मार्गदर्शन को दिया।
AIUDF के भविष्य पर शर्मा ने क्या कहा?
शर्मा ने दावा किया कि भविष्य में AIUDF की राजनीतिक स्थिति और कमज़ोर होगी तथा यह पार्टी कांग्रेस की तरह असम में क्षीण होती जाएगी। हालाँकि यह उनका निजी आकलन है।
नागांव उपचुनाव का असम की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या वाले इस क्षेत्र में BJP की जीत AIUDF के घटते जनाधार का संकेत देती है। आगामी असम विधानसभा चुनाव से पहले यह परिणाम विपक्षी गठबंधन की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. 4 दिन पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 3 सप्ताह पहले