नागांव उपचुनाव जीत के बाद भाजपा के देवाशीष शर्मा का दावा — अजमल की सांप्रदायिक अपील मतदाताओं ने ठुकराई
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनिर्वाचित सांसद देवाशीष शर्मा ने 10 अक्टूबर को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने नागांव लोकसभा उपचुनाव के प्रचार में सांप्रदायिक आधार पर मत माँगने की कोशिश की, जिसे मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया। ताज़ा चुनावी आँकड़ों के अनुसार, शर्मा ने अजमल को 1,57,804 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया।
मुख्य घटनाक्रम
शर्मा को इस चुनाव में 6,91,804 वोट प्राप्त हुए, जबकि अजमल को 5,34,000 वोट मिले। मुस्लिम मतदाताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति वाले इस संसदीय क्षेत्र में BJP की यह जीत राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शर्मा ने स्पष्ट किया, "मुझे नहीं पता कि अजमल ने मेरी मदद की या नहीं, क्योंकि वह मेरे खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन उनके चुनाव प्रचार का तरीका मेरे पक्ष में गया, क्योंकि उन्होंने सांप्रदायिक आधार पर वोट माँगने की कोशिश की, जिसे लोगों ने स्वीकार नहीं किया।"
अजमल और AIUDF पर भविष्यवाणी
शर्मा ने यह भी दावा किया कि आगामी वर्षों में AIUDF की राजनीतिक ज़मीन और कमज़ोर होगी। उनके अनुसार, जिस तरह कांग्रेस असम में सिकुड़ती गई, उसी तरह AIUDF का भी क्षरण होता रहेगा। हालाँकि, यह उनका निजी आकलन है और इसे स्वतंत्र विश्लेषकों की राय से पुष्ट नहीं किया गया है।
जीत के पीछे शर्मा का जनसंपर्क
अल्पसंख्यक मतदाताओं के समर्थन के सवाल पर शर्मा ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से वे क्षेत्र की जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहे। उन्होंने बताया कि कैंसर पीड़ितों और उससे उबर चुके लोगों के साथ उनके व्यक्तिगत जुड़ाव ने मतदाताओं के साथ एक भावनात्मक रिश्ता बनाया, जिसका सकारात्मक प्रभाव मतदान में दिखा।
शर्मा ने अपनी जीत का श्रेय BJP की नीतियों और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व को भी दिया।
नौकरशाही पृष्ठभूमि पर सवाल
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उन्होंने मोरीगांव और नागांव के उपायुक्त (DC) के पद पर रहते हुए राजनीतिक करियर की तैयारी की थी, तो शर्मा ने इसे नकारा। उन्होंने कहा कि एक सरकारी अधिकारी का काम राज्य सरकार की योजनाओं को ज़मीन पर उतारना होता है, न कि राजनीतिक हित साधना।
शर्मा ने स्वीकार किया कि कॉलेज के दिनों से उनकी राजनीति में रुचि रही है और उन्होंने राजनीति विज्ञान की पढ़ाई भी की थी। उन्होंने कहा, "कुछ बातें किस्मत में लिखी होती हैं और शायद यही मेरी नियति थी।"
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब असम में AIUDF और कांग्रेस के बीच विपक्षी एकजुटता की कोशिशें पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही हैं। नागांव की यह हार अजमल के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक — दोनों स्तरों पर एक बड़ा झटका है। आगामी असम विधानसभा चुनाव से पहले इस परिणाम के निहितार्थों पर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र बनी रहेगी।