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शीत्सांग के आली में पहली 50 MW पवन ऊर्जा परियोजना: सभी टर्बाइन स्थापित, ग्रिड परीक्षण शुरू

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शीत्सांग के आली में पहली 50 MW पवन ऊर्जा परियोजना: सभी टर्बाइन स्थापित, ग्रिड परीक्षण शुरू

सारांश

समुद्र तल से 4,800 मीटर की ऊँचाई पर, शून्य से नीचे तापमान और विरल हवा को चीरते हुए — शीत्सांग के आली की पहली पवन ऊर्जा परियोजना ने सभी 10 टर्बाइन स्थापित कर दी हैं। 2026 के अंत तक ग्रिड से जुड़ने के बाद यह सालाना 18 करोड़ kWh बिजली देगी और 1.5 लाख टन CO₂ उत्सर्जन घटाएगी।

मुख्य बातें

CGN की आली गेत्से 50 MW पवन ऊर्जा परियोजना में सभी 10 टर्बाइनों की स्थापना पूरी, ग्रिड परीक्षण शुरू।
परियोजना समुद्र तल से 4,600–4,800 मीटर की ऊँचाई पर आली हिम-पठार पर स्थित है।
प्रत्येक टर्बाइन की क्षमता 5 मेगावाट ; पूर्ण संचालन पर सालाना 18 करोड़ किलोवाट-घंटे बिजली उत्पादन का अनुमान।
सालाना लगभग 1.5 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कटौती अपेक्षित।
राष्ट्रीय दिवस की छुट्टियों में भी 60 से अधिक कर्मी स्थल पर कार्यरत रहे।
परियोजना को 2026 के अंत तक पूरी तरह संचालन में लाने की योजना।

चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर (CGN) की आली गेत्से 50 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना ने शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के आली क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया है — इस क्षेत्र की पहली पवन ऊर्जा परियोजना में सभी पवन टर्बाइनों की स्थापना पूरी हो चुकी है और अब यह ग्रिड से जोड़ने एवं परीक्षण के चरण में प्रवेश कर चुकी है। परियोजना को 2026 के अंत तक ग्रिड से जोड़कर पूर्णतः संचालन में लाने की योजना है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

यह परियोजना समुद्र तल से 4,600 से 4,800 मीटर की ऊँचाई पर आली हिम-पठार पर स्थापित की गई है। यहाँ कुल 10 पवन टर्बाइनें लगाई गई हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 5 मेगावाट है। पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर यह परियोजना सालाना लगभग 18 करोड़ किलोवाट-घंटे बिजली का उत्पादन कर सकती है।

गौरतलब है कि यह न केवल आली क्षेत्र की, बल्कि इतनी अधिक ऊँचाई पर निर्मित उल्लेखनीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है, जो इसे तकनीकी दृष्टि से विशेष बनाती है।

निर्माण की चुनौतियाँ

इस ऊँचाई पर निर्माण कार्य असाधारण रूप से जटिल था। विरल वायुमंडल, न्यून ऑक्सीजन स्तर और सितंबर के मध्य के बाद शून्य से नीचे तापमान ने कार्य को बाधित किया। इसके अलावा तेज़ हवाओं और ओलावृष्टि जैसी मौसमी परिस्थितियों के कारण बड़े उपकरणों की ढुलाई और टर्बाइन स्थापना के लिए उपलब्ध कार्य-समय सीमित रहा।

परियोजना टीम ने हवा की गति पर निरंतर निगरानी रखते हुए निर्माण योजना में आवश्यक बदलाव किए और अनुकूल मौसम का लाभ उठाकर समय पर सभी टर्बाइनों की स्थापना पूरी की।

राष्ट्रीय अवकाश में भी जारी रहा काम

चीनी राष्ट्रीय दिवस की छुट्टियों के दौरान भी परियोजना स्थल पर 60 से अधिक निर्माण कर्मी कार्यरत रहे। फिलहाल गुणवत्ता निरीक्षण और सबस्टेशन उपकरणों की जाँच जैसे काम प्रगति पर हैं, ताकि ग्रिड संपर्क और संचालन की तैयारी शीघ्र पूरी की जा सके।

पर्यावरणीय और ऊर्जा प्रभाव

आँकड़ों के अनुसार, पूर्ण क्षमता पर यह परियोजना सालाना लगभग 1.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन में कमी लाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब आली जैसे दूरदराज़ और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ रही है। यह परियोजना इलाके की ऊर्जा आपूर्ति में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यह परियोजना न केवल शीत्सांग के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है, बल्कि अत्यधिक ऊँचाई पर पवन ऊर्जा विकास के लिए एक मॉडल के रूप में भी उभर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

800 मीटर की ऊँचाई पर पवन टर्बाइन खड़ी करना निस्संदेह एक इंजीनियरिंग उपलब्धि है, लेकिन यह परियोजना एक व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ में भी देखी जानी चाहिए। चीन सुदूर और विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे का तेज़ी से विस्तार कर रहा है, और ऊर्जा परियोजनाएँ इसी रणनीति का हिस्सा हैं। पर्यावरणीय लाभ वास्तविक हो सकते हैं, परंतु इन परियोजनाओं के सामरिक आयाम को नज़रअंदाज़ करना विश्लेषणात्मक दृष्टि से अधूरा होगा। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह इस क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढाँचा गतिविधियों पर बारीक नज़र रखे।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीत्सांग के आली की पवन ऊर्जा परियोजना क्या है?
यह चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर (CGN) द्वारा शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के आली क्षेत्र में निर्मित 50 मेगावाट की पहली पवन ऊर्जा परियोजना है। इसमें 10 टर्बाइनें लगाई गई हैं और 2026 के अंत तक इसे ग्रिड से जोड़ने की योजना है।
यह परियोजना कब तक चालू होगी?
योजना के अनुसार, आली गेत्से पवन ऊर्जा परियोजना को 2026 के अंत तक ग्रिड से जोड़कर पूर्ण रूप से संचालन में लाया जाएगा। फिलहाल गुणवत्ता निरीक्षण और सबस्टेशन उपकरणों की जाँच जारी है।
इतनी ऊँचाई पर टर्बाइन लगाना क्यों चुनौतीपूर्ण था?
परियोजना समुद्र तल से 4,600 से 4,800 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जहाँ विरल हवा, कम ऑक्सीजन और सितंबर के बाद शून्य से नीचे तापमान होता है। तेज़ हवाओं और ओलावृष्टि के कारण बड़े उपकरणों की ढुलाई और स्थापना के लिए कार्य-समय भी बेहद सीमित रहा।
इस परियोजना से पर्यावरण को क्या लाभ होगा?
पूर्ण क्षमता पर परियोजना सालाना लगभग 18 करोड़ किलोवाट-घंटे बिजली उत्पन्न करेगी। इससे लगभग 1.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन में कमी आएगी और आली क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा की कमी दूर होगी।
इस परियोजना में कितने कर्मी काम कर रहे हैं?
चीनी राष्ट्रीय दिवस की छुट्टियों के दौरान भी परियोजना स्थल पर 60 से अधिक निर्माण कर्मी कार्यरत रहे। वर्तमान में गुणवत्ता निरीक्षण और सबस्टेशन परीक्षण का कार्य जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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