चीन 16 साल से पवन ऊर्जा क्षमता में विश्व अव्वल, 6,92,720 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता
सारांश
मुख्य बातें
चीन की पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता लगातार 16वें वर्ष भी दुनिया में पहले स्थान पर बनी हुई है। चीन नवीकरणीय ऊर्जा सोसायटी (China Renewable Energy Society) की पवन ऊर्जा समिति के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले आठ महीनों में चीन ने 53,260 मेगावाट की नई ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा की दौड़ तेज़ हो रही है।
कुल स्थापित क्षमता में ऐतिहासिक उछाल
अगस्त 2026 के अंत तक चीन की कुल ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा क्षमता बढ़कर 6,92,720 मेगावाट हो गई। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 19.64 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। आंकड़ों के अनुसार, देश में स्थापित क्षमता और बिजली उत्पादन दोनों में लगातार स्थिर बढ़त दर्ज की जा रही है।
वैश्विक निर्यात में विस्तार
चीन के पवन टर्बाइनों का निर्यात भी तेज़ रफ़्तार से बढ़ रहा है। चीन नवीकरणीय ऊर्जा सोसायटी की पवन ऊर्जा समिति के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक चीन ने उस वर्ष कुल 1,175 पवन टर्बाइन निर्यात किए, जिनकी संयुक्त क्षमता 7,750 मेगावाट थी — यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 50 प्रतिशत अधिक थी।
संचयी रूप से, चीन अब तक कुल 6,974 पवन टर्बाइन निर्यात कर चुका है, जिनकी कुल क्षमता 28,520 मेगावाट है। ये टर्बाइन 6 महाद्वीपों के 60 देशों में पहुँच चुके हैं, जो चीनी पवन उद्योग की वैश्विक पकड़ को रेखांकित करता है।
विदेशों में उत्पादन आधार का विस्तार
केवल निर्यात तक सीमित न रहते हुए, चीन के 7 प्रमुख पवन टर्बाइन निर्माताओं ने विदेशों में अपने कारखाने स्थापित किए हैं या ऐसा करने की योजना पर काम कर रहे हैं। इस कदम से उन्हें विदेशी बाज़ारों और परियोजनाओं तक सीधी पहुँच मिलेगी, जो पहले आयात पर निर्भर थे। गौरतलब है कि यह रणनीतिक विस्तार चीन को केवल एक उत्पाद निर्यातक नहीं, बल्कि वैश्विक पवन ऊर्जा ढाँचे का एक अभिन्न हिस्सा बनाता है।
वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत सहित कई देश अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की होड़ में हैं। चीन की 16 वर्षों की निरंतर अग्रणी स्थिति यह दर्शाती है कि उसने नीति, निवेश और प्रौद्योगिकी तीनों स्तरों पर दीर्घकालिक रणनीति अपनाई है। आलोचकों का कहना है कि चीनी टर्बाइनों की बाज़ार में बढ़ती हिस्सेदारी से पश्चिमी और भारतीय निर्माताओं पर प्रतिस्पर्धी दबाव बढ़ेगा।
आगे देखें तो, चीन के पवन ऊर्जा उद्योग का वैश्विक विस्तार आने वाले वर्षों में और तेज़ होने का अनुमान है, विशेषकर जब उसके निर्माता विदेशी धरती पर उत्पादन शुरू करें।