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अमरमणि त्रिपाठी की राजनीतिक वापसी पर पीड़ित परिजनों की CM योगी से गुहार, सुरक्षा और संरक्षण-मुक्त न्याय की माँग

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अमरमणि त्रिपाठी की राजनीतिक वापसी पर पीड़ित परिजनों की CM योगी से गुहार, सुरक्षा और संरक्षण-मुक्त न्याय की माँग

सारांश

दो दशक पुराने हत्याकांड के पीड़ित परिजन एक बार फिर सड़क पर हैं — इस बार दोषी की कथित राजनीतिक वापसी के खिलाफ। मधुमिता शुक्ला की बहन और सारा सिंह की माँ ने CM योगी से माफिया-संरक्षण पर रोक और सुरक्षा की माँग की है।

मुख्य बातें

मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला और सारा सिंह की माँ सीमा सिंह ने 7 अगस्त को लखनऊ में प्रेसवार्ता कर CM योगी से सुरक्षा माँगी।
आरोप: नौतनवा विधानसभा क्षेत्र के एक कार्यक्रम में अमरमणि त्रिपाठी व अमनमणि त्रिपाठी के समर्थन में नारे लगाए गए।
निधि शुक्ला की पुस्तक 'मेरी बहन का कत्ल' अगले महीने प्रकाशित होगी, जिसमें अनेक अप्रकाशित तथ्य होंगे।
9 मई 2003 को हुई मधुमिता शुक्ला हत्या में सर्वोच्च न्यायालय ने अमरमणि त्रिपाठी की उम्रकैद बरकरार रखी थी।
परिजनों ने माँग की कि सरकार माफिया-विरोधी नीति पर दृढ़ रहे और किसी दोषी को राजनीतिक संरक्षण न दे।

पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की कथित राजनीतिक सक्रियता को लेकर राष्ट्रीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड और सारा सिंह मृत्यु प्रकरण के पीड़ित परिजनों ने 7 अगस्त को लखनऊ में प्रेसवार्ता आयोजित कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपराधियों को किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण न दिए जाने की माँग की। मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला और सारा सिंह की माँ सीमा सिंह ने एक स्वर में कहा कि दोषियों की बढ़ती राजनीतिक गतिविधियाँ पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की गहरी भावना उत्पन्न कर रही हैं।

राजनीतिक सक्रियता पर परिजनों की आपत्ति

निधि शुक्ला ने आरोप लगाया कि हाल ही में नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान अमरमणि त्रिपाठी और उनके पुत्र अमनमणि त्रिपाठी के समर्थन में नारे लगाए गए। उनका कहना था कि इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल पीड़ित परिवारों को भयभीत करती हैं, बल्कि न्याय-प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि अमरमणि त्रिपाठी दोबारा राजनीतिक रूप से प्रभावशाली होते हैं, तो उनके परिवार की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

पुस्तक में होंगे अनसुने तथ्य

प्रेसवार्ता के दौरान निधि शुक्ला ने घोषणा की कि मधुमिता शुक्ला हत्याकांड पर आधारित उनकी पुस्तक 'मेरी बहन का कत्ल' अगले महीने प्रकाशित होगी। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में मामले से जुड़े अनेक ऑन-रिकॉर्ड और ऑफ-रिकॉर्ड तथ्य शामिल किए गए हैं, जिनमें से कई अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं। उन्होंने मीडिया की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2003 से चल रही न्याय की लड़ाई में मीडिया का सतत सहयोग इस मामले को सार्वजनिक विमर्श में जीवित रखने में सहायक रहा।

सीमा सिंह की भावुक अपील

सारा सिंह की माँ सीमा सिंह प्रेसवार्ता के दौरान भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में न्याय की लड़ाई उनके लिए अभी समाप्त नहीं हुई है। सीमा सिंह ने मुख्यमंत्री से माफिया के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रखने और पीड़ित परिवारों को प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराने की अपील की।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 9 मई 2003 को लखनऊ में राष्ट्रीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या हुई थी। इस मामले की जाँच पहले सीबी-सीआईडी और बाद में सीबीआई ने की। निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मुकदमे को उत्तराखंड स्थानांतरित किया गया था। देहरादून की अदालत, नैनीताल उच्च न्यायालय और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अमरमणि त्रिपाठी सहित अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

CM योगी से माँग और आगे की राह

निधि शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि सरकार को माफिया-विरोधी अपनी घोषित नीति पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी दोषी को राजनीतिक आश्रय न मिले। अमरमणि त्रिपाठी की रिहाई और उनकी हालिया राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों ने पीड़ित परिवारों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह राज्य की माफिया-विरोधी छवि के लिए गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। CM योगी की 'माफिया मुक्त UP' की ब्रांडिंग की असली परीक्षा यही है कि क्या यह नीति केवल विपक्षी माफिया तक सीमित है या सत्तापक्ष के निकट दोषियों पर भी समान रूप से लागू होती है। पीड़ित परिवारों की यह आवाज़ मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर हाशिये पर रहती है — जबकि यही आवाज़ें जवाबदेही की असली कसौटी हैं।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरमणि त्रिपाठी कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
अमरमणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री हैं, जिन्हें 9 मई 2003 को लखनऊ में राष्ट्रीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। देहरादून की अदालत, नैनीताल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तीनों ने उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।
पीड़ित परिजनों ने अभी प्रेसवार्ता क्यों की?
परिजनों के अनुसार, हाल ही में नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में एक राजनीतिक कार्यक्रम में अमरमणि त्रिपाठी और अमनमणि त्रिपाठी के समर्थन में नारे लगाए गए, जिससे पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की भावना बढ़ी। इसी के विरोध में 7 अगस्त को लखनऊ में प्रेसवार्ता आयोजित की गई।
CM योगी से क्या माँग की गई है?
मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला और सारा सिंह की माँ सीमा सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माँग की है कि माफिया-विरोधी नीति पर दृढ़ रहा जाए, किसी भी दोषी को राजनीतिक संरक्षण न दिया जाए और पीड़ित परिवारों को प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
निधि शुक्ला की पुस्तक 'मेरी बहन का कत्ल' में क्या होगा?
यह पुस्तक मधुमिता शुक्ला हत्याकांड पर आधारित है और अगले महीने प्रकाशित होने वाली है। निधि शुक्ला के अनुसार, इसमें मामले से जुड़े कई ऐसे ऑन-रिकॉर्ड और ऑफ-रिकॉर्ड तथ्य शामिल हैं जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड की जाँच कैसे हुई थी?
9 मई 2003 को लखनऊ में हुई इस हत्या की जाँच पहले सीबी-सीआईडी और बाद में सीबीआई ने की थी। निष्पक्ष सुनवाई के लिए मुकदमा उत्तराखंड स्थानांतरित किया गया, जहाँ देहरादून की अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी को दोषी ठहराया — जिसे नैनीताल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने बरकरार रखा।
राष्ट्र प्रेस
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