अमरमणि त्रिपाठी की राजनीतिक वापसी पर पीड़ित परिजनों की CM योगी से गुहार, सुरक्षा और संरक्षण-मुक्त न्याय की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की कथित राजनीतिक सक्रियता को लेकर राष्ट्रीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड और सारा सिंह मृत्यु प्रकरण के पीड़ित परिजनों ने 7 अगस्त को लखनऊ में प्रेसवार्ता आयोजित कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपराधियों को किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण न दिए जाने की माँग की। मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला और सारा सिंह की माँ सीमा सिंह ने एक स्वर में कहा कि दोषियों की बढ़ती राजनीतिक गतिविधियाँ पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की गहरी भावना उत्पन्न कर रही हैं।
राजनीतिक सक्रियता पर परिजनों की आपत्ति
निधि शुक्ला ने आरोप लगाया कि हाल ही में नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान अमरमणि त्रिपाठी और उनके पुत्र अमनमणि त्रिपाठी के समर्थन में नारे लगाए गए। उनका कहना था कि इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल पीड़ित परिवारों को भयभीत करती हैं, बल्कि न्याय-प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि अमरमणि त्रिपाठी दोबारा राजनीतिक रूप से प्रभावशाली होते हैं, तो उनके परिवार की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
पुस्तक में होंगे अनसुने तथ्य
प्रेसवार्ता के दौरान निधि शुक्ला ने घोषणा की कि मधुमिता शुक्ला हत्याकांड पर आधारित उनकी पुस्तक 'मेरी बहन का कत्ल' अगले महीने प्रकाशित होगी। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में मामले से जुड़े अनेक ऑन-रिकॉर्ड और ऑफ-रिकॉर्ड तथ्य शामिल किए गए हैं, जिनमें से कई अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं। उन्होंने मीडिया की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2003 से चल रही न्याय की लड़ाई में मीडिया का सतत सहयोग इस मामले को सार्वजनिक विमर्श में जीवित रखने में सहायक रहा।
सीमा सिंह की भावुक अपील
सारा सिंह की माँ सीमा सिंह प्रेसवार्ता के दौरान भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में न्याय की लड़ाई उनके लिए अभी समाप्त नहीं हुई है। सीमा सिंह ने मुख्यमंत्री से माफिया के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रखने और पीड़ित परिवारों को प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराने की अपील की।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 9 मई 2003 को लखनऊ में राष्ट्रीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या हुई थी। इस मामले की जाँच पहले सीबी-सीआईडी और बाद में सीबीआई ने की। निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मुकदमे को उत्तराखंड स्थानांतरित किया गया था। देहरादून की अदालत, नैनीताल उच्च न्यायालय और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अमरमणि त्रिपाठी सहित अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।
CM योगी से माँग और आगे की राह
निधि शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि सरकार को माफिया-विरोधी अपनी घोषित नीति पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी दोषी को राजनीतिक आश्रय न मिले। अमरमणि त्रिपाठी की रिहाई और उनकी हालिया राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों ने पीड़ित परिवारों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।