अमित शाह का कांग्रेस पर हमला: ₹12 लाख करोड़ के घोटालों के अलावा 10 साल में क्या किया?
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 सितंबर 2026 को अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन पर आयोजित एक सार्वजनिक सभा में कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने पिछली यूपीए सरकार पर ₹12 लाख करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को आँकड़ों के साथ जनता के सामने अपने 10 साल के कार्यकाल का ब्योरा देना चाहिए। यह कार्यक्रम साबरमती में कई रेलवे परियोजनाओं के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित किया गया था।
शाह की कांग्रेस को सीधी चुनौती
गृह मंत्री शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, '₹12 लाख करोड़ रुपए के घोटालों, स्कैंडल और भ्रष्टाचार के अलावा आपने 10 साल में क्या किया?' उन्होंने कांग्रेस नेताओं को चुनौती दी कि वे 'आँकड़ों के साथ' जनता के बीच आएँ और मौजूदा सरकार के कामकाज पर लगाए गए अपने 'बेतुके' दावों का जवाब दें। शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में उन पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा — यहाँ तक कि 'चार आने' (अत्यंत मामूली राशि) का भी नहीं।
गुजरात के रेलवे बजट की तुलना
शाह ने शासन-व्यवस्था में अंतर दर्शाने के लिए रेलवे आवंटन के आँकड़े पेश किए। उनके अनुसार, 2009-14 के दौरान यूपीए सरकार में गुजरात को रेलवे के लिए सालाना औसतन ₹589 करोड़ मिलते थे। इसकी तुलना में, 2026-27 के लिए यह आवंटन बढ़कर ₹17,366 करोड़ हो गया है, जो 29 गुना से अधिक की वृद्धि है। रेलवे मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार यह आँकड़ा सत्यापित बताया गया है।
साबरमती में रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन
इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। इनमें ₹700 करोड़ के WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड का उद्घाटन, अहमदाबाद डिवीजन के प्रमुख सेक्शन पर 'कवच' ट्रेन टक्कर-रोधी प्रणाली को चालू करना, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का काम, साबरमती-सरखेज सेक्शन को डबल करना और भारत की पहली एलएनजी (LNG) चालित ट्रेन का लॉन्च शामिल था।
मोदी, वैष्णव और रेलवे अधिकारियों को धन्यवाद
गृह मंत्री शाह ने साबरमती स्टेशन के पुनर्विकास और क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे अधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने साबरमती स्टेशन के अपने पुराने दौरों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मेट्रो और राज्य परिवहन की सुविधाओं के जुड़ने से इसकी कनेक्टिविटी में कायापलट हो गई है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि '₹12 लाख करोड़ के भ्रष्टाचार' का यह दावा शाह पहले भी विभिन्न मंचों पर उठा चुके हैं — यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन मुख्य राजनीतिक आख्यानों में से एक है जिनका इस्तेमाल यूपीए काल की नीतियों की आलोचना में किया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक दलों के बीच शासन और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च पर जुबानी जंग तेज हो रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के तुलनात्मक आँकड़ों का बारीकी से स्वतंत्र मूल्यांकन ज़रूरी है, ताकि केवल बजटीय आवंटन की बजाय वास्तविक जमीनी बदलाव का सही आकलन हो सके।