अमित शाह के '3 करोड़ घुसपैठिए' दावे पर कांग्रेस का पलटवार: '13 साल में क्या किया सरकार ने?'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में 3 करोड़ घुसपैठिए शामिल हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने इस दावे को पलटते हुए सीधा सवाल दागा है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में घुसपैठिए देश में मौजूद थे, तो 13 वर्षों से सत्ता में बैठी केंद्र सरकार आखिर इस दौरान क्या करती रही।
कांग्रेस सांसद का तंज: 'हमारी ही बात को बल दे रहे हैं शाह'
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "वो तो हमारी हाँ में हाँ मिला रहे हैं, कांग्रेस की बात को बल दे रहे हैं। यही तो हम कह रहे हैं कि 13 करोड़ नाम निकाले गए हैं। अमित शाह कह रहे हैं कि 3 करोड़ घुसपैठिए हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि अकेले उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ हैं, तो इसका मतलब है कि हमारी बात पूरी तरह सच है।"
तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में मृतकों की संख्या महज कुछ लाख है, जबकि बाकी नाम जाति, धर्म और पार्टी निष्ठा के आधार पर काटे गए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप भी लगाया।
रांची से राकेश सिन्हा का सवाल: 'अब तक केवल 1,600 की पहचान हुई'
रांची में कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने एक अलग कोण से शाह के दावे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अब तक आधिकारिक तौर पर मात्र 1,600 लोगों की ही पहचान घुसपैठियों के रूप में हुई है, और उनमें भी 500 से अधिक नेपाली नागरिक हैं।
सिन्हा ने सवाल किया, "अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं। अगर उन्हीं के बयान को आधार मानें कि 3 करोड़ घुसपैठिए देश में हैं, तो 13 साल हो गए उनकी सरकार को — फिर यह देश की आंतरिक सुरक्षा पर बड़ा सवाल है।" उनका यह बयान कथित तौर पर उस विरोधाभास की ओर इशारा करता है जो शाह के दावे और सरकार के कार्यकाल की अवधि के बीच दिखता है।
एसआईआर विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों की सफाई एक नियमित चुनावी प्रशासनिक कदम है। हालाँकि, इस बार वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद विपक्ष ने इसे चुनावी हेरफेर बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आगामी चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और मतदाता सूची की विश्वसनीयता एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
आलोचकों का कहना है कि यदि गृह मंत्री का 3 करोड़ का आँकड़ा सत्य है, तो यह घुसपैठ की समस्या को दशकों से नज़रअंदाज़ करने की स्वीकारोक्ति भी है — एक तर्क जिसे कांग्रेस अपने राजनीतिक हमले का केंद्र बना रही है।
आगे क्या
कांग्रेस के इस पलटवार के बाद BJP की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मुद्दा संसद और राज्य विधानसभाओं में भी उठने की संभावना है। विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनावी अधिकारों और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व से जोड़कर और व्यापक राजनीतिक बहस का रूप देने की कोशिश में हैं।