3 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अमित शाह के '3 करोड़ घुसपैठिए' दावे पर कांग्रेस का पलटवार: '13 साल में क्या किया सरकार ने?'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अमित शाह के '3 करोड़ घुसपैठिए' दावे पर कांग्रेस का पलटवार: '13 साल में क्या किया सरकार ने?'

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह के '3 करोड़ घुसपैठिए' वाले दावे ने नई सियासी जंग छेड़ दी है। कांग्रेस का सवाल सीधा है — अगर इतने घुसपैठिए थे, तो 13 साल की सत्ता में सरकार ने क्या किया? वोटर लिस्ट विवाद अब आंतरिक सुरक्षा और चुनावी अधिकारों की बड़ी बहस में बदल रहा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में 3 करोड़ घुसपैठिए शामिल हैं।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि शाह के बयान ने खुद कांग्रेस के 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आरोप को बल दिया है।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा के अनुसार, अब तक केवल 1,600 लोगों की आधिकारिक पहचान घुसपैठियों के रूप में हुई है, जिनमें 500 से अधिक नेपाली हैं।
विपक्ष ने सवाल उठाया कि 13 वर्षों की केंद्र सरकार इस कथित समस्या पर चुप क्यों रही।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार अकेले उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ घुसपैठिए हैं — यह आँकड़ा भी विवाद में है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में 3 करोड़ घुसपैठिए शामिल हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने इस दावे को पलटते हुए सीधा सवाल दागा है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में घुसपैठिए देश में मौजूद थे, तो 13 वर्षों से सत्ता में बैठी केंद्र सरकार आखिर इस दौरान क्या करती रही।

कांग्रेस सांसद का तंज: 'हमारी ही बात को बल दे रहे हैं शाह'

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "वो तो हमारी हाँ में हाँ मिला रहे हैं, कांग्रेस की बात को बल दे रहे हैं। यही तो हम कह रहे हैं कि 13 करोड़ नाम निकाले गए हैं। अमित शाह कह रहे हैं कि 3 करोड़ घुसपैठिए हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि अकेले उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ हैं, तो इसका मतलब है कि हमारी बात पूरी तरह सच है।"

तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में मृतकों की संख्या महज कुछ लाख है, जबकि बाकी नाम जाति, धर्म और पार्टी निष्ठा के आधार पर काटे गए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप भी लगाया।

रांची से राकेश सिन्हा का सवाल: 'अब तक केवल 1,600 की पहचान हुई'

रांची में कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने एक अलग कोण से शाह के दावे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अब तक आधिकारिक तौर पर मात्र 1,600 लोगों की ही पहचान घुसपैठियों के रूप में हुई है, और उनमें भी 500 से अधिक नेपाली नागरिक हैं।

सिन्हा ने सवाल किया, "अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं। अगर उन्हीं के बयान को आधार मानें कि 3 करोड़ घुसपैठिए देश में हैं, तो 13 साल हो गए उनकी सरकार को — फिर यह देश की आंतरिक सुरक्षा पर बड़ा सवाल है।" उनका यह बयान कथित तौर पर उस विरोधाभास की ओर इशारा करता है जो शाह के दावे और सरकार के कार्यकाल की अवधि के बीच दिखता है।

एसआईआर विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों की सफाई एक नियमित चुनावी प्रशासनिक कदम है। हालाँकि, इस बार वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद विपक्ष ने इसे चुनावी हेरफेर बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आगामी चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और मतदाता सूची की विश्वसनीयता एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

आलोचकों का कहना है कि यदि गृह मंत्री का 3 करोड़ का आँकड़ा सत्य है, तो यह घुसपैठ की समस्या को दशकों से नज़रअंदाज़ करने की स्वीकारोक्ति भी है — एक तर्क जिसे कांग्रेस अपने राजनीतिक हमले का केंद्र बना रही है।

आगे क्या

कांग्रेस के इस पलटवार के बाद BJP की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मुद्दा संसद और राज्य विधानसभाओं में भी उठने की संभावना है। विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनावी अधिकारों और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व से जोड़कर और व्यापक राजनीतिक बहस का रूप देने की कोशिश में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह 13 साल की सरकार की विफलता की स्वीकारोक्ति है; अगर यह अतिरंजित है, तो वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठते हैं। कांग्रेस ने इस विरोधाभास को चतुराई से पकड़ा है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज वह सवाल नहीं पूछ रही जो सबसे ज़रूरी है — वह यह कि आधिकारिक रूप से केवल 1,600 की पहचान और दावा 3 करोड़ का, इस अंतर की जवाबदेही कौन तय करेगा? वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाना और उसे 'घुसपैठियों की सफाई' बताना — बिना पारदर्शी सत्यापन के — लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक गंभीर मिसाल है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने '3 करोड़ घुसपैठिए' का दावा क्यों किया?
गृह मंत्री अमित शाह ने यह दावा एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के संदर्भ में किया, जिसमें मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। उनके अनुसार इन हटाए गए नामों में 3 करोड़ घुसपैठिए शामिल हैं।
कांग्रेस ने इस दावे पर क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस ने कहा कि अगर 3 करोड़ घुसपैठिए देश में थे, तो 13 साल से सत्ता में रही भाजपा सरकार ने उन्हें क्यों नहीं हटाया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने यह भी कहा कि शाह का बयान खुद कांग्रेस के 13 करोड़ नाम अवैध तरीके से हटाए जाने के आरोप को सच साबित करता है।
आधिकारिक रूप से कितने लोगों की पहचान घुसपैठियों के तौर पर हुई है?
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा के अनुसार अब तक केवल 1,600 लोगों की आधिकारिक पहचान घुसपैठियों के रूप में हुई है, और उनमें भी 500 से अधिक नेपाल के नागरिक हैं। यह आँकड़ा शाह के 3 करोड़ के दावे से बहुत कम है।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक चुनावी प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है और अपात्र नाम हटाए जाते हैं। इस बार बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के कारण यह प्रक्रिया राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
यह विवाद संसद और राज्य विधानसभाओं में उठने की संभावना है। विपक्ष इसे चुनावी अधिकारों और अल्पसंख्यक मतदाताओं के प्रतिनिधित्व से जोड़ रहा है, जबकि BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले