3 नवंबर 2026
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अमित शाह के '3 करोड़ घुसपैठिए' बयान पर विपक्ष का पलटवार, कांग्रेस-JMM बोले — नाम सार्वजनिक करें

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अमित शाह के '3 करोड़ घुसपैठिए' बयान पर विपक्ष का पलटवार, कांग्रेस-JMM बोले — नाम सार्वजनिक करें

सारांश

अमित शाह का '3 करोड़ घुसपैठिए' वाला दावा अब सीधे राजनीतिक जंग बन गया है। कांग्रेस और JMM नाम-दर-नाम हिसाब माँग रहे हैं, जबकि शिवसेना पीठ थपथपा रही है। असली सवाल यह है — क्या सरकार सत्यापन-योग्य डेटा दे सकती है, या यह केवल चुनावी आख्यान है?

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया था कि SIR में हटाए 13 करोड़ नामों में 3 करोड़ घुसपैठिए हैं।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने माँग की कि घुसपैठियों के नाम, देश और जानकारी का स्रोत सार्वजनिक किया जाए।
JMM नेता मनोज पांडे ने शाह से इस्तीफे की माँग की, कहा — गृह मंत्रालय आपके नियंत्रण में है, फिर भी 3 करोड़ घुसपैठिए कैसे?
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने शाह के बयान का समर्थन करते हुए दावा किया कि दो 'समूहों' को इससे झटका लगा है।
विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे को उठाने के संकेत दिए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान हटाए गए 13 करोड़ नामों में से 3 करोड़ घुसपैठिए हैं। 3 नवंबर 2026 को कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस दावे को चुनौती देते हुए माँग की कि सरकार इन कथित घुसपैठियों की पहचान और उनके देश का नाम सार्वजनिक करे। वहीं मुंबई में शिवसेना नेता ने शाह के बयान का पुरजोर समर्थन किया।

कांग्रेस की माँग: स्रोत और नाम बताएं

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गृह मंत्री के दावे पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'अगर भारत में घुसपैठ हुई है, तो यह सबसे बड़ी खामी गृह मंत्रालय की है कि उसने घुसपैठ को रोका क्यों नहीं?' तिवारी ने यह भी माँग की कि शाह बताएं कि ये 3 करोड़ कथित घुसपैठिए किस देश से आए, उनके नाम क्या हैं और यह जानकारी किस आधार पर दी गई।

तिवारी के अनुसार, इतने बड़े दावे के साथ ठोस साक्ष्य सार्वजनिक करना गृह मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का दायित्व है।

JMM का पलटवार: इस्तीफे की माँग

रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता मनोज पांडे ने अमित शाह को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा, 'इन नामों को सार्वजनिक करें। हम आपको ऐसा करने की चुनौती देते हैं। राहुल गांधी पहले ही चुनौती दे चुके हैं और हम भी यही कह रहे हैं।'

पांडे ने तर्क दिया कि अगर गृह मंत्रालय केंद्र सरकार के नियंत्रण में है और भारी बहुमत की सरकार है, तो 3 करोड़ कथित घुसपैठियों की देश में उपस्थिति स्वयं सरकार की विफलता को दर्शाती है। उन्होंने माँग की कि यदि ये व्यक्ति वास्तव में घुसपैठिए हैं तो उनके विरुद्ध मामले दर्ज कर उन्हें देश से बाहर निकाला जाए और शाह को इस्तीफा देना चाहिए।

शिवसेना का समर्थन: दो 'समूहों' को झटका

मुंबई में शिवसेना नेता आनंद दुबे ने शाह के बयान का समर्थन किया। दुबे ने कहा कि शाह ने 'बिल्कुल सही जगह पर चोट की है' और इससे दो समूह प्रभावित हुए हैं।

दुबे के अनुसार, पहला समूह उन कथित घुसपैठियों का है जो अवैध रूप से भारत में रहकर मतदान में भाग लेते हैं, और दूसरा उन राजनीतिक ताकतों का है जो इन्हें संरक्षण देकर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे चुनौती देना चाहते हैं तो संसद में आकर कार्यवाही में हिस्सा लें।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों में पहले से असंतोष है। गौरतलब है कि 13 करोड़ मतदाता नामों का हटाया जाना एक बेहद संवेदनशील चुनावी मुद्दा है, और किसी भी बड़े संख्या-दावे पर चुनाव आयोग की ओर से स्वतंत्र सत्यापन की माँग समय-समय पर उठती रही है। विपक्ष का कहना है कि बिना सत्यापन-योग्य डेटा के इस तरह के दावे संविधानसम्मत मतदाता अधिकारों पर सवाल खड़े करते हैं।

आगे क्या होगा

आलोचकों का कहना है कि जब तक सरकार ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं करती, यह विवाद संसदीय सत्र तक खिंच सकता है। विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे को उठाने की तैयारी का संकेत दिया है। घुसपैठ और मतदाता सूची शुद्धता का यह विवाद आगामी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक राजनीतिक महत्व ग्रहण कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी विश्वसनीयता तब तक संदिग्ध रहेगी जब तक स्वतंत्र, सत्यापन-योग्य डेटा सामने न आए। विडंबना यह है कि यदि यह दावा सच है, तो यह स्वयं गृह मंत्रालय की दशकों की निगरानी-विफलता का स्वीकारोक्ति भी है — एक बिंदु जिसे विपक्ष ठीक ही उठा रहा है। मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने और उन्हें 'घुसपैठ' से जोड़ने की आख्यान-नीति चुनावी मौसम में ध्रुवीकरण को गहरा कर सकती है, लेकिन इसकी क़ीमत संस्थागत विश्वसनीयता को चुकानी पड़ती है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने '3 करोड़ घुसपैठिए' का दावा किस संदर्भ में किया?
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए 13 करोड़ नामों में से 3 करोड़ घुसपैठियों के नाम थे। यह बयान मतदाता सूची शुद्धता अभियान के बीच आया।
कांग्रेस और JMM ने क्या माँग की है?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और JMM नेता मनोज पांडे ने सरकार से माँग की है कि 3 करोड़ कथित घुसपैठियों के नाम, उनके मूल देश और इस जानकारी का स्रोत सार्वजनिक किया जाए। JMM ने शाह के इस्तीफे की माँग भी की है।
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन क्या है?
SIR मतदाता सूची की गहन समीक्षा प्रक्रिया है जिसमें डुप्लीकेट, मृत, या अपात्र नाम हटाए जाते हैं। शाह के अनुसार इस बार 13 करोड़ नाम हटाए गए, जिनमें से 3 करोड़ कथित घुसपैठियों के बताए गए हैं।
शिवसेना ने अमित शाह के बयान पर क्या रुख अपनाया?
मुंबई में शिवसेना नेता आनंद दुबे ने शाह के बयान का समर्थन किया और कहा कि इससे दो समूहों — कथित अवैध मतदाता और उन्हें संरक्षण देने वाली राजनीतिक शक्तियाँ — को झटका लगा है।
यह विवाद आगे कहाँ तक जा सकता है?
विपक्षी दलों ने संसद में इस मुद्दे को उठाने के संकेत दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना सत्यापन-योग्य डेटा के यह विवाद आगामी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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