15 अक्टूबर 2026
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जेपी नड्डा का खड़गे पर बड़ा हमला — मतदाता सूची पर झूठ फैलाने का आरोप, अमित शाह का किया बचाव

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जेपी नड्डा का खड़गे पर बड़ा हमला — मतदाता सूची पर झूठ फैलाने का आरोप, अमित शाह का किया बचाव

सारांश

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस प्रमुख खड़गे पर मतदाता सूची के आँकड़ों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। 13.39 करोड़ की संख्या को मृतकों, स्थानांतरितों और डुप्लिकेट नामों की श्रेणी बताते हुए उन्होंने एसआईआर-BJP कनेक्शन की थ्योरी खारिज की और 2029 में एनडीए की भारी जीत का दावा किया।

मुख्य बातें

जेपी नड्डा ने 14 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर मतदाता सूची विवाद में भ्रामक प्रचार का आरोप लगाया।
नड्डा के अनुसार 13.39 करोड़ नामों में 2.80 करोड़ मृतक , 6.30 करोड़ स्थानांतरित , 3.01 करोड़ अनुपस्थित और 1.02 करोड़ डुप्लिकेट शामिल हैं।
नड्डा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने कभी किसी भारतीय को घुसपैठिया नहीं कहा।
कांग्रेस की हार को एसआईआर से जोड़ने को नकारा; कहा — गुजरात में 31 साल , त्रिपुरा में 33 साल , बंगाल में 54 साल से कांग्रेस सत्ता से बाहर।
नड्डा ने 2029 चुनाव में एनडीए की भारी जीत और कांग्रेस की लगातार चौथी हार का दावा किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 14 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर मतदाता सूची और गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े बयानों को लेकर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया। नड्डा ने स्पष्ट किया कि शाह ने कभी 13.39 करोड़ भारतीयों को घुसपैठिया नहीं कहा और खड़गे का यह दावा बेबुनियाद है।

मतदाता सूची पर विवाद का असल सच

नड्डा ने एक पोस्ट के ज़रिए चुनाव आयोग के रुख को सामने रखते हुए बताया कि 13.39 करोड़ की यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की नहीं, बल्कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में विभिन्न श्रेणियों में रखे गए नामों की है।

उनके अनुसार इस संख्या में 2.80 करोड़ मृतक, 6.30 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता, 3.01 करोड़ अनुपस्थित और 1.02 करोड़ डुप्लिकेट नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन आँकड़ों को तोड़-मरोड़कर पेश करना जनता को गुमराह करने की कोशिश है।

एसआईआर प्रक्रिया पर पलटवार

नड्डा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया से जोड़ने की कांग्रेस की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया।

उन्होंने तर्क दिया कि एसआईआर 2024 के बाद लागू हुई, जबकि कांग्रेस गुजरात में 31 वर्षों से, त्रिपुरा में 33 वर्षों से और पश्चिम बंगाल में 54 वर्षों से सत्ता से बाहर है। उनके अनुसार, यह गिरावट किसी चुनावी प्रक्रिया का नतीजा नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का खोना है।

कांग्रेस की राजनीति पर सवाल

नड्डा ने कहा कि बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में मतदाताओं द्वारा कांग्रेस को बार-बार नकारना पार्टी के प्रति जनविश्वास के क्षरण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह खाई नकारात्मक राजनीति और भ्रामक प्रचार से नहीं पाटी जा सकती।

उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से अपील की कि वे एसआईआर का बहाना बनाने और घुसपैठियों को संरक्षण देने की बजाय जनता का वास्तविक विश्वास अर्जित करने पर ध्यान केंद्रित करें।

2029 पर दावा और एनडीए का आत्मविश्वास

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि जनता का भरोसा प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पर बरकरार है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2029 के आम चुनाव में एनडीए भारी बहुमत के साथ सरकार बनाएगी, जबकि कांग्रेस को लगातार चौथी बार राष्ट्रीय स्तर पर हार का सामना करना पड़ेगा।

नड्डा ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, 'सिर्फ आरोपों से जनता के जनादेश की सच्चाई को बदला नहीं जा सकता।' यह टकराव ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और दोनों प्रमुख दलों के बीच चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर वाकयुद्ध तेज़ हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ता की। 2029 की भविष्यवाणी करना अभी जल्दबाजी है — असली परीक्षा बिहार और अन्य आगामी चुनावों में होगी।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपी नड्डा ने मल्लिकार्जुन खड़गे पर क्या आरोप लगाए?
नड्डा ने खड़गे पर मतदाता सूची से जुड़े आँकड़ों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और गृह मंत्री अमित शाह के बयान को गलत तरीके से चित्रित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शाह ने कभी 13.39 करोड़ भारतीयों को घुसपैठिया नहीं कहा।
13.39 करोड़ मतदाताओं की संख्या का असल मतलब क्या है?
नड्डा के अनुसार यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की नहीं है। इसमें 2.80 करोड़ मृतक, 6.30 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित, 3.01 करोड़ अनुपस्थित और 1.02 करोड़ डुप्लिकेट नाम शामिल हैं — ये सभी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की श्रेणियाँ हैं।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) क्या है और इसे विवाद से क्यों जोड़ा जा रहा है?
एसआईआर चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की जाती है। कांग्रेस ने इसे भाजपा की लोकप्रियता से जोड़कर सवाल उठाए, जिसे नड्डा ने यह कहते हुए खारिज किया कि एसआईआर 2024 के बाद लागू हुई जबकि कांग्रेस की हार दशकों पुरानी है।
नड्डा ने 2029 के चुनाव के बारे में क्या दावा किया?
नड्डा ने दावा किया कि 2029 के आम चुनाव में एनडीए भारी बहुमत से सरकार बनाएगी और कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ेगा।
कांग्रेस किन राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर है?
नड्डा के अनुसार कांग्रेस गुजरात में 31 वर्षों से, त्रिपुरा में 33 वर्षों से और पश्चिम बंगाल में 54 वर्षों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने इसे एसआईआर नहीं, बल्कि जनता के भरोसे के खोने का परिणाम बताया।
राष्ट्र प्रेस
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