खड़गे का BJP पर तंज: 'SIR अब फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर, आडवाणी-जयशंकर को भी नोटिस'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 21 सितंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया, जब वरिष्ठ BJP नेता लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दिल्ली के उपराज्यपाल, कई राज्यसभा सांसदों तथा पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर/SIR) नोटिस मिलने की खबर सामने आई। खड़गे ने कहा कि यह प्रक्रिया अब एक 'फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर' बन चुकी है, जिसे BJP ने खुद खड़ा किया था, लेकिन अब वही उसके अपने नेताओं को फँसा रही है।
खड़गे का एक्स पर हमला
खड़गे ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'बिहार से शुरू हुआ एसआईआर अब दिल्ली में दस्तक दे चुका है, तब शायद सत्ताधीशों को पता चल रहा है कि कांग्रेस पार्टी पूरी प्रक्रिया को पहले दिन से त्रुटिपूर्ण क्यों कह रही थी।' उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर केवल BJP द्वारा 'वोट चोरी' और 'लोकतंत्र को खत्म करने' का औजार नहीं है, बल्कि यह खामियों भरी प्रक्रिया अब उसी के लोगों को फँसा रही है।
इससे पहले भारत रत्न से सम्मानित एक वैज्ञानिक और पूर्व नौसेना प्रमुख को भी एसआईआर नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिसे खड़गे ने इस नोटिस-अभियान की विडंबना के रूप में रेखांकित किया।
बंगाल के आँकड़े और मताधिकार का सवाल
खड़गे ने पश्चिम बंगाल से एक चौंकाने वाला आँकड़ा सामने रखा। उनके अनुसार, जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए थे और उन्होंने अपील की, उनमें से अब तक फैसला हुए मामलों में 93 प्रतिशत लोग अपनी अपील जीत चुके हैं। इसका अर्थ है कि 1,13,943 मतदाताओं को पुनः सूची में शामिल किया जाएगा।
खड़गे ने सवाल उठाया, 'किस आधार पर उनका मताधिकार छीना गया?' उन्होंने यह भी पूछा कि चुनाव आयोग के 'वीआईपी चिह्नित मतदाता' के वर्णन का क्या अर्थ है — क्या भारत के सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार में मतदाताओं की अलग-अलग श्रेणियाँ बन रही हैं?
एसआईआर के तीन चरणों का दायरा
एसआईआर के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया। यह 94.78 करोड़ कुल मतदाताओं का लगभग 14.61 प्रतिशत है। खड़गे ने इस पर चुनाव आयोग की चुप्पी को निशाने पर लिया और लिखा, 'वीआईपी के लिए प्रेस रिलीज, करोड़ों आम मतदाताओं के लिए खामोशी।'
फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर का संदर्भ
गौरतलब है कि 'फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर' अंग्रेजी लेखिका मैरी शेली के 1818 में प्रकाशित उपन्यास 'फ्रेंकस्टीन' का काल्पनिक पात्र है। यह उपमा उस स्थिति के लिए प्रचलित है जहाँ इंसान कोई शक्ति या व्यवस्था खुद खड़ी करता है, और बाद में वही उसके लिए संकट बन जाती है। खड़गे ने यह उपमा एसआईआर प्रक्रिया पर BJP के रुख पर लागू की।
राजनीतिक महत्व और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। अब BJP के अपने वरिष्ठ नेताओं को नोटिस मिलने से यह विवाद नया आयाम ले चुका है। चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक इन विशिष्ट नोटिसों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।