21 सितंबर 2026
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खड़गे का BJP पर तंज: 'SIR अब फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर, आडवाणी-जयशंकर को भी नोटिस'

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खड़गे का BJP पर तंज: 'SIR अब फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर, आडवाणी-जयशंकर को भी नोटिस'

सारांश

BJP ने एसआईआर से करोड़ों मतदाताओं के नाम काटे — लेकिन अब उसी प्रक्रिया ने आडवाणी और जयशंकर जैसे उसके अपने नेताओं को नोटिस थमा दिए। खड़गे ने इसे 'फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर' कहकर BJP की नीयत पर सीधा वार किया और बंगाल में 93% अपीलें जीतने का आँकड़ा पेश किया।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 21 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर एसआईआर प्रक्रिया को 'फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर' बताया।
BJP नेता लालकृष्ण आडवाणी , विदेश मंत्री एस.
जयशंकर , दिल्ली के उपराज्यपाल , राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को एसआईआर नोटिस मिले।
पश्चिम बंगाल में सूची से कटे मतदाताओं में से 93 प्रतिशत अपनी अपील जीत चुके हैं; 1,13,943 मतदाता पुनः सूची में शामिल होंगे।
एसआईआर के तीन चरणों में 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए — कुल मतदाताओं का 14.61 प्रतिशत ।
खड़गे ने 'वीआईपी मतदाता' की श्रेणी पर भी आपत्ति जताई और 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के संवैधानिक सिद्धांत का हवाला दिया।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 21 सितंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया, जब वरिष्ठ BJP नेता लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दिल्ली के उपराज्यपाल, कई राज्यसभा सांसदों तथा पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर/SIR) नोटिस मिलने की खबर सामने आई। खड़गे ने कहा कि यह प्रक्रिया अब एक 'फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर' बन चुकी है, जिसे BJP ने खुद खड़ा किया था, लेकिन अब वही उसके अपने नेताओं को फँसा रही है।

खड़गे का एक्स पर हमला

खड़गे ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'बिहार से शुरू हुआ एसआईआर अब दिल्ली में दस्तक दे चुका है, तब शायद सत्ताधीशों को पता चल रहा है कि कांग्रेस पार्टी पूरी प्रक्रिया को पहले दिन से त्रुटिपूर्ण क्यों कह रही थी।' उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर केवल BJP द्वारा 'वोट चोरी' और 'लोकतंत्र को खत्म करने' का औजार नहीं है, बल्कि यह खामियों भरी प्रक्रिया अब उसी के लोगों को फँसा रही है।

इससे पहले भारत रत्न से सम्मानित एक वैज्ञानिक और पूर्व नौसेना प्रमुख को भी एसआईआर नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिसे खड़गे ने इस नोटिस-अभियान की विडंबना के रूप में रेखांकित किया।

बंगाल के आँकड़े और मताधिकार का सवाल

खड़गे ने पश्चिम बंगाल से एक चौंकाने वाला आँकड़ा सामने रखा। उनके अनुसार, जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए थे और उन्होंने अपील की, उनमें से अब तक फैसला हुए मामलों में 93 प्रतिशत लोग अपनी अपील जीत चुके हैं। इसका अर्थ है कि 1,13,943 मतदाताओं को पुनः सूची में शामिल किया जाएगा।

खड़गे ने सवाल उठाया, 'किस आधार पर उनका मताधिकार छीना गया?' उन्होंने यह भी पूछा कि चुनाव आयोग के 'वीआईपी चिह्नित मतदाता' के वर्णन का क्या अर्थ है — क्या भारत के सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार में मतदाताओं की अलग-अलग श्रेणियाँ बन रही हैं?

एसआईआर के तीन चरणों का दायरा

एसआईआर के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया। यह 94.78 करोड़ कुल मतदाताओं का लगभग 14.61 प्रतिशत है। खड़गे ने इस पर चुनाव आयोग की चुप्पी को निशाने पर लिया और लिखा, 'वीआईपी के लिए प्रेस रिलीज, करोड़ों आम मतदाताओं के लिए खामोशी।'

फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर का संदर्भ

गौरतलब है कि 'फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर' अंग्रेजी लेखिका मैरी शेली के 1818 में प्रकाशित उपन्यास 'फ्रेंकस्टीन' का काल्पनिक पात्र है। यह उपमा उस स्थिति के लिए प्रचलित है जहाँ इंसान कोई शक्ति या व्यवस्था खुद खड़ी करता है, और बाद में वही उसके लिए संकट बन जाती है। खड़गे ने यह उपमा एसआईआर प्रक्रिया पर BJP के रुख पर लागू की।

राजनीतिक महत्व और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। अब BJP के अपने वरिष्ठ नेताओं को नोटिस मिलने से यह विवाद नया आयाम ले चुका है। चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक इन विशिष्ट नोटिसों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पूर्व नौसेना प्रमुख और सत्तारूढ़ दल के संस्थापक नेता तक नोटिस पाते हैं, तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि सत्यापन तंत्र कितना सुदृढ़ है। बंगाल का 93 प्रतिशत अपील-जीत का आँकड़ा — यदि सही है — यह दर्शाता है कि मूल विलोपन प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियाँ थीं, न कि सीमांत चूक। मुख्यधारा की कवरेज इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ कर देती है कि चुनाव आयोग ने 'वीआईपी मतदाता' जैसी श्रेणी क्यों बनाई, जो संविधान प्रदत्त समानता के मूलभूत सिद्धांत से टकराती है। जवाबदेही की असली परीक्षा यह है कि 1,13,943 पुनः शामिल होने वाले मतदाताओं के अधिकार बहाली में कितना समय लगता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) क्या है और इसमें नोटिस क्यों दिए जाते हैं?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसमें संदिग्ध या अपात्र प्रविष्टियों पर नोटिस जारी किए जाते हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम भी काट दिए गए।
किन BJP नेताओं को एसआईआर नोटिस मिले हैं?
खड़गे के अनुसार, BJP के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी , विदेश मंत्री एस. जयशंकर , दिल्ली के उपराज्यपाल, राज्यसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री को नोटिस दिए गए हैं। इससे पहले एक भारत रत्न प्राप्त वैज्ञानिक और पूर्व नौसेना प्रमुख को भी नोटिस मिल चुके हैं।
बंगाल में 93 प्रतिशत अपील जीतने का क्या अर्थ है?
खड़गे के अनुसार, पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए और जिन्होंने अपील की, उनमें से अब तक फैसला हुए मामलों में 93 प्रतिशत अपनी अपील जीत चुके हैं। इसका अर्थ है कि 1,13,943 मतदाताओं को पुनः मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
'वीआईपी मतदाता' पर खड़गे की आपत्ति क्या है?
खड़गे ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के 'वीआईपी चिह्नित मतदाता' के वर्णन का क्या अर्थ है। उनका तर्क है कि भारत का संविधान 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' का सिद्धांत देता है, इसलिए मतदाताओं की कोई विशेष श्रेणी बनाना संवैधानिक समानता की अवेहलना है।
एसआईआर के तीन चरणों में कितने मतदाता प्रभावित हुए?
खड़गे के बयान के अनुसार, एसआईआर के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया, जो कुल 94.78 करोड़ मतदाताओं का लगभग 14.61 प्रतिशत है।
राष्ट्र प्रेस
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