एसआईआर पर कांग्रेस का बड़ा आरोप: 'अमित शाह के इशारे पर 6 करोड़ से अधिक वोटर हटाए'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 20 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी ने इसे गृह मंत्री अमित शाह द्वारा प्रेरित 'वोटर हटाओ अभियान' करार देते हुए इसे 'संविधान पर हमला' बताया।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए दावा किया कि एसआईआर के तीसरे चरण में शामिल 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ के नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं। उनके अनुसार, 5.43 करोड़ अतिरिक्त वोटरों को नोटिस भेजकर उनसे अतिरिक्त दस्तावेज माँगे गए हैं, जिनके नाम हटने का खतरा 15 प्रतिशत और बताया जा रहा है।
रमेश ने कहा कि कुल मिलाकर 32 प्रतिशत — यानी लगभग हर तीन में से एक — मतदाता के नाम हटाए जा चुके हैं या हटने के जोखिम में हैं। उनके अनुसार, एसआईआर के पहले दो चरणों में 7.8 करोड़ नाम हटाए गए थे, जो कि संशोधन प्रक्रिया से पहले की मतदाता सूची का 13 प्रतिशत था।
राज्यवार आँकड़े
कांग्रेस नेता द्वारा पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार, नाम हटाने या हटने के खतरे का अनुपात सर्वाधिक दिल्ली में 53.73% और चंडीगढ़ में 52.58% है। इसके बाद तेलंगाना (48.90%), झारखंड (39.57%), हरियाणा (37.5%), उत्तराखंड (35.71%), मेघालय (35.36%) और महाराष्ट्र (33.88%) का स्थान है।
कर्नाटक में यह आँकड़ा 27.6%, ओडिशा में 23.67%, आंध्र प्रदेश में 21.17% और पंजाब में 15.23% बताया गया है। ये आँकड़े कांग्रेस के दावों पर आधारित हैं और चुनाव आयोग ने इन पर स्वतंत्र रूप से अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सामाजिक असर पर सवाल
रमेश ने आरोप लगाया कि नाम हटाने की इस प्रक्रिया का असर समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों पर सबसे अधिक पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकांश बड़े राज्यों में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
उन्होंने कहा, 'एसआईआर प्रक्रिया ने पात्रता साबित करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डाल दी है, क्योंकि उनसे ऐसे दस्तावेज माँगे जा रहे हैं जो शायद राज्य ने उन्हें कभी दिए ही न हों।' उनके शब्दों में, 'एक ऐसा टेस्ट जिसे अधिकतर नागरिक पास नहीं कर सकते, वह सिर्फ बाहर करने की मशीन है।'
चुनाव आयोग की भूमिका
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर के तीसरे चरण में 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों ने 36.73 करोड़ से अधिक मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया। एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूची को वेरिफाई और अपडेट करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
रमेश ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि सभी राज्यों में उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक नहीं की गई जिनके नाम हटाए जा सकते थे। उन्होंने बताया कि दिल्ली ने जनता के दबाव के बाद 19 सितंबर को अपनी सूची जारी की।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस तेज हो रही है। कांग्रेस की माँग है कि संपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा हो और प्रभावित मतदाताओं की सूचियाँ सार्वजनिक की जाएँ। यह विवाद आने वाले दिनों में संसदीय और न्यायिक दोनों स्तरों पर और गहराने की संभावना है।