20 सितंबर 2026
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एसआईआर पर कांग्रेस का बड़ा आरोप: 'अमित शाह के इशारे पर 6 करोड़ से अधिक वोटर हटाए'

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एसआईआर पर कांग्रेस का बड़ा आरोप: 'अमित शाह के इशारे पर 6 करोड़ से अधिक वोटर हटाए'

सारांश

कांग्रेस ने दावा किया है कि एसआईआर के तहत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग हर तीन में से एक मतदाता का नाम हटाया जा चुका है या खतरे में है। जयराम रमेश ने इसे 'अमित शाह प्रेरित वोटर हटाओ अभियान' और संविधान पर हमला करार दिया।

मुख्य बातें

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 20 सितंबर 2026 को एसआईआर के तहत बड़े पैमाने पर वोटर नाम हटाने का आरोप लगाया।
तीसरे चरण में 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ के नाम हटाए जाने का दावा; 5.43 करोड़ को नोटिस।
कुल 32% मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं या खतरे में हैं — दिल्ली (53.73%) और चंडीगढ़ (52.58%) सबसे ऊपर।
चुनाव आयोग के अनुसार, तीसरे चरण में 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों ने 36.73 करोड़ मतदाताओं का घर-घर सत्यापन किया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया का सबसे अधिक असर आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है।
दिल्ली ने 19 सितंबर को जनता के दबाव के बाद प्रभावित मतदाताओं की सूची जारी की।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 20 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी ने इसे गृह मंत्री अमित शाह द्वारा प्रेरित 'वोटर हटाओ अभियान' करार देते हुए इसे 'संविधान पर हमला' बताया।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए दावा किया कि एसआईआर के तीसरे चरण में शामिल 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ के नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं। उनके अनुसार, 5.43 करोड़ अतिरिक्त वोटरों को नोटिस भेजकर उनसे अतिरिक्त दस्तावेज माँगे गए हैं, जिनके नाम हटने का खतरा 15 प्रतिशत और बताया जा रहा है।

रमेश ने कहा कि कुल मिलाकर 32 प्रतिशत — यानी लगभग हर तीन में से एक — मतदाता के नाम हटाए जा चुके हैं या हटने के जोखिम में हैं। उनके अनुसार, एसआईआर के पहले दो चरणों में 7.8 करोड़ नाम हटाए गए थे, जो कि संशोधन प्रक्रिया से पहले की मतदाता सूची का 13 प्रतिशत था।

राज्यवार आँकड़े

कांग्रेस नेता द्वारा पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार, नाम हटाने या हटने के खतरे का अनुपात सर्वाधिक दिल्ली में 53.73% और चंडीगढ़ में 52.58% है। इसके बाद तेलंगाना (48.90%), झारखंड (39.57%), हरियाणा (37.5%), उत्तराखंड (35.71%), मेघालय (35.36%) और महाराष्ट्र (33.88%) का स्थान है।

कर्नाटक में यह आँकड़ा 27.6%, ओडिशा में 23.67%, आंध्र प्रदेश में 21.17% और पंजाब में 15.23% बताया गया है। ये आँकड़े कांग्रेस के दावों पर आधारित हैं और चुनाव आयोग ने इन पर स्वतंत्र रूप से अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सामाजिक असर पर सवाल

रमेश ने आरोप लगाया कि नाम हटाने की इस प्रक्रिया का असर समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों पर सबसे अधिक पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकांश बड़े राज्यों में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

उन्होंने कहा, 'एसआईआर प्रक्रिया ने पात्रता साबित करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डाल दी है, क्योंकि उनसे ऐसे दस्तावेज माँगे जा रहे हैं जो शायद राज्य ने उन्हें कभी दिए ही न हों।' उनके शब्दों में, 'एक ऐसा टेस्ट जिसे अधिकतर नागरिक पास नहीं कर सकते, वह सिर्फ बाहर करने की मशीन है।'

चुनाव आयोग की भूमिका

चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर के तीसरे चरण में 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों ने 36.73 करोड़ से अधिक मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया। एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूची को वेरिफाई और अपडेट करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

रमेश ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि सभी राज्यों में उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक नहीं की गई जिनके नाम हटाए जा सकते थे। उन्होंने बताया कि दिल्ली ने जनता के दबाव के बाद 19 सितंबर को अपनी सूची जारी की।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस तेज हो रही है। कांग्रेस की माँग है कि संपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा हो और प्रभावित मतदाताओं की सूचियाँ सार्वजनिक की जाएँ। यह विवाद आने वाले दिनों में संसदीय और न्यायिक दोनों स्तरों पर और गहराने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह बहुवर्षीय डुप्लीकेट और प्रवासी प्रविष्टियों की सफाई का परिणाम है। जयराम रमेश ने राज्यवार विशिष्ट आँकड़े दिए हैं, जो इस बहस को ठोस जमीन देते हैं — लेकिन चुनाव आयोग की चुप्पी और सूचियों की सीमित सार्वजनिक उपलब्धता उन आलोचनाओं को बल देती है। महिलाओं और पिछड़े वर्गों पर असंगत प्रभाव का दावा, यदि स्वतंत्र रूप से प्रमाणित हो, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि संरचनात्मक पक्षपात का संकेत होगा।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) क्या है?
एसआईआर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन करने की एक विशेष प्रक्रिया है। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करते हैं और अपात्र या अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाने की सिफारिश करते हैं।
कांग्रेस ने एसआईआर पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के तीन चरणों में 6.18 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं और 5.43 करोड़ को नोटिस दिया गया है। पार्टी ने इसे गृह मंत्री अमित शाह द्वारा प्रेरित 'वोटर हटाओ अभियान' और संविधान पर हमला बताया है।
एसआईआर के तीसरे चरण में कौन-से राज्य शामिल हैं?
तीसरे चरण में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली, चंडीगढ़ और दादरा व नगर हवेली तथा दमन व दीव शामिल हैं।
किन राज्यों में वोटर नाम हटने का खतरा सबसे अधिक बताया गया है?
कांग्रेस के दावों के अनुसार, दिल्ली में 53.73%, चंडीगढ़ में 52.58% और तेलंगाना में 48.90% मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं या खतरे में हैं। पंजाब में यह आँकड़ा सबसे कम 15.23% बताया गया है।
इस विवाद का आम मतदाताओं पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि कांग्रेस के दावे सत्य हैं, तो बड़ी संख्या में योग्य मतदाता, विशेष रूप से महिलाएँ और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग, मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। अतिरिक्त दस्तावेजों की माँग उन नागरिकों के लिए विशेष रूप से कठिन है जिनके पास सरकारी दस्तावेज सीमित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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