3 नवंबर 2026
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केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन: बांकुरा के 5 समेत 8 ट्रैकर्स लापता, SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन: बांकुरा के 5 समेत 8 ट्रैकर्स लापता, SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

सारांश

उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक पर 4,000 मीटर की ऊँचाई पर अचानक आए हिमपात ने एक 12 सदस्यीय दल को तोड़ दिया — बांकुरा के 5 युवाओं समेत 8 लोग लापता हैं, मोबाइल बंद हैं और SDRF का हेलीकॉप्टर भी प्रतिकूल मौसम से जूझ रहा है।

मुख्य बातें

केदारताल ट्रैक पर 30 अक्टूबर 2026 को हुए हिमस्खलन और हिमपात में 12 सदस्यीय दल के 8 सदस्य लापता हुए।
लापता लोगों में पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के 5 ट्रैकर्स — तापस बाउरी, रतन घोष, रिंटू मंडल, उदय घोष और मनोज खवास — शामिल हैं।
अभियान दल गंगोत्री से 4,000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित केदारताल के लिए निकला था।
उत्तराखंड SDRF पिछले 2 दिनों से हेलीकॉप्टर की सहायता से खोज चला रही है; प्रतिकूल मौसम बाधा बन रहा है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उत्तराखंड प्रशासन से समन्वय की पुष्टि की; बांकुरा DM अनीश दासगुप्ता परिवारों से संपर्क में हैं।
लापता ट्रैकर्स के मोबाइल फोन पिछले 2-3 दिनों से बंद हैं।

उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक पर 30 अक्टूबर 2026 को अचानक आए हिमपात और हिमस्खलन की चपेट में आने से पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के 5 ट्रैकर्स सहित एक 12 सदस्यीय अभियान दल के कुल 8 सदस्य लापता हो गए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, लापता हुए लोगों में उत्तर प्रदेश के लखनऊ से दो और उत्तराखंड के उत्तरकाशी से एक सदस्य भी शामिल हैं। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम पिछले दो दिनों से हेलीकॉप्टर की सहायता से खोज-बचाव अभियान चला रही है, हालांकि अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।

मुख्य घटनाक्रम

लापता बांकुरा ट्रैकर्स की पहचान तापस बाउरी, रतन घोष, रिंटू मंडल, उदय घोष और मनोज खवास के रूप में हुई है। इनमें से पहले चार सालबानी गाँव के निवासी हैं, जबकि मनोज उसी जिले के केशरा गाँव से हैं। पाँचों ट्रैकर्स 24 अक्टूबर को उत्तराखंड के लिए रवाना हुए थे और नवंबर की शुरुआत तक घर लौटने वाले थे।

अभियान दल गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था, जिसमें चार शेरपा और एक सहायक भी शामिल थे। दल ने निर्धारित दिन पर बेस कैंप से यात्रा शुरू की, परंतु लगभग 4,000 मीटर की ऊँचाई पर पहुँचते ही दल के अधिकांश सदस्य अचानक आए भारी हिमपात में फँस गए। दल के 4 सदस्य, जिनमें एक शेरपा और सहायक शामिल थे, 30 अक्टूबर को अपने गंतव्य तक पहुँचने में सफल रहे और बाद में अधिकारियों को शेष 8 सदस्यों के लापता होने की सूचना दी।

बचाव अभियान में क्या हो रहा है

उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के एक हेलीकॉप्टर की सहायता से SDRF की टीम उच्च ऊँचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में खोज अभियान चला रही है। उत्तराखंड सरकार के अनुसार, प्रतिकूल मौसम की स्थिति बचाव कार्य में लगातार बाधा बन रही है। लापता ट्रैकर्स के मोबाइल फोन भी पिछले दो-तीन दिनों से बंद हैं, जिससे परिवारों की चिंता गहरी हो गई है।

गौरतलब है कि उच्च हिमालयी ट्रैक पर नवंबर की शुरुआत में यात्रा करना वैसे भी जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि इस समय मौसम तेज़ी से बदलता है और अतिरिक्त हिमपात की संभावना बढ़ जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में हाई-एल्टीट्यूड ट्रेकिंग नियमों को लेकर विशेषज्ञ पहले से ही सख्त दिशानिर्देशों की माँग कर रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए लापता ट्रैकर्स की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा, 'उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक के दौरान खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण लापता हुए बांकुरा के पाँच युवा ट्रैकर्स के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की है।'

अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली स्थित राज्य के रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय और राज्य आपदा प्रबंधन चैनलों के माध्यम से उत्तराखंड SDRF और स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है। बांकुरा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) और पुलिस अधीक्षक को घटनास्थल पर चौबीसों घंटे समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आम जनता पर असर और परिवारों की स्थिति

बांकुरा जिला मजिस्ट्रेट अनीश दासगुप्ता ने मंगलवार, 3 नवंबर को बताया कि सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने लापता ट्रैकर्स के परिवारों से संपर्क कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। परिजनों के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्र में पहुँचने के बाद वे नियमित संपर्क में थे, लेकिन पिछले 2-3 दिनों से कोई संचार नहीं हो सका है।

राज्य प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को रसद और भावनात्मक सहायता प्रदान करने की बात कही है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, 'हम परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं और अपने युवाओं की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।'

क्या होगा आगे

बचाव दल की नज़र मौसम के साफ होने पर है, जिसके बाद हवाई और ज़मीनी खोज को तेज किया जा सकता है। उत्तराखंड सरकार ने लापता पर्वतारोहियों के परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। सफलता न मिलने तक अभियान जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नवंबर जैसे जोखिम भरे मौसम में भी अभियान दल बिना पर्याप्त निगरानी के रवाना हो जाते हैं। 4,000 मीटर की ऊँचाई पर मोबाइल संपर्क टूटना और हेलीकॉप्टर की सीमित क्षमता यह बताती है कि आपातकालीन प्रतिक्रिया का ढाँचा अभी भी उस स्तर पर नहीं है जो इन ट्रैकों की माँग करते हैं। मुख्यमंत्री का सोशल मीडिया बयान राजनीतिक संवेदनशीलता दर्शाता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या दोनों राज्यों के बीच वास्तविक समय में परिचालन समन्वय उतना ही मजबूत है जितना कागज़ों पर दिखता है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केदारताल ट्रैक पर कितने लोग लापता हैं और वे कहाँ से हैं?
कुल 8 लोग लापता हैं — पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के 5, उत्तर प्रदेश के लखनऊ से 2 और उत्तराखंड के उत्तरकाशी से 1। ये सभी एक 12 सदस्यीय अभियान दल का हिस्सा थे जो गंगोत्री से केदारताल के लिए निकला था।
केदारताल ट्रैक पर हादसा कब और कैसे हुआ?
30 अक्टूबर 2026 को दल लगभग 4,000 मीटर की ऊँचाई पर पहुँचा, जहाँ अचानक भारी हिमपात और हिमस्खलन की स्थिति बन गई। दल के 4 सदस्य उसी दिन गंतव्य तक पहुँचे और बाद में अधिकारियों को शेष 8 के लापता होने की सूचना दी।
बचाव अभियान में क्या प्रगति हुई है?
उत्तराखंड SDRF की टीम पिछले 2 दिनों से हेलीकॉप्टर की सहायता से खोज चला रही है, लेकिन उच्च ऊँचाई पर प्रतिकूल मौसम के कारण अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। मौसम सुधरने पर अभियान और तेज किए जाने की संभावना है।
पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले में क्या कर रही है?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उत्तराखंड SDRF और स्थानीय प्रशासन से समन्वय की पुष्टि की है। नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय और बांकुरा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चौबीसों घंटे समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
लापता ट्रैकर्स के परिवारों से संपर्क कब टूटा?
परिजनों के अनुसार पर्वतीय क्षेत्र में पहुँचने के बाद वे नियमित संपर्क में थे, लेकिन पिछले 2-3 दिनों से सभी मोबाइल फोन बंद हैं। बांकुरा जिला मजिस्ट्रेट अनीश दासगुप्ता ने परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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