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अमित शाह की अहमदाबाद में उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा, साइबर क्राइम से नशामुक्ति तक 20 से अधिक मुद्दों पर मंथन

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अमित शाह की अहमदाबाद में उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा, साइबर क्राइम से नशामुक्ति तक 20 से अधिक मुद्दों पर मंथन

सारांश

दीपावली से पूर्व अहमदाबाद में अमित शाह ने गुजरात की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की — साइबर क्राइम, तटीय सुरक्षा, नशा नियंत्रण और न्यायिक सुधार सहित 20 से अधिक मुद्दों पर मंथन। मुख्यमंत्री पटेल और मुख्य सचिव भी मौजूद रहे।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 7 नवंबर 2026 को अहमदाबाद में गुजरात की सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल , उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी और मुख्य सचिव मनोज कुमार दास सहित केंद्र व राज्य के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
साइबर क्राइम, तटीय एवं सीमा सुरक्षा , POCSO , NDPS , आतंकवाद नियंत्रण, CAA और जनगणना सहित 20 से अधिक विषयों पर चर्चा हुई।
अमित शाह ने 2029 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य के लिए कड़े एक्शन प्लान, 1933 कंट्रोल रूम के विस्तार और सघन अभियान का निर्देश दिया।
अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की स्थिति, फॉरेनर्स आइडेंटिफिकेशन पोर्टल और ITSO के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।
अहमदाबाद में शहरी बाढ़ निवारण , SDRF की क्षमता और पब्लिक प्रॉसीक्यूशन सिस्टम को मजबूत बनाने पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 7 नवंबर 2026 को अहमदाबाद में दीपावली पूर्व एक व्यापक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें गुजरात की कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा, साइबर अपराध और नशा नियंत्रण सहित 20 से अधिक संवेदनशील विषयों की गहन समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उपस्थित रहे। केंद्रीय गृह मंत्रालय तथा राज्य के गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में कानून-व्यवस्था, साइबर क्राइम, पुलिस आधुनिकीकरण, बॉर्डर एवं कोस्टल सिक्योरिटी, मादक पदार्थ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, फॉरेंसिक, आतंकवाद नियंत्रण, अंतरराज्यीय सहयोग, आपराधिक न्याय प्रणाली, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), जनगणना, अग्निवीर योजना, जेल तथा विशेष अदालतों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। अमित शाह ने वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।

इसके अतिरिक्त अकाल की स्थिति, किसानों की समस्याएँ, आर्थिक अपराध, सीमावर्ती जिलों की स्थिति तथा अतिक्रमण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी राज्य सरकार को सुझाव और मार्गदर्शन दिए गए।

साइबर सुरक्षा और तकनीकी अवसंरचना

केंद्रीय एजेंसियों तथा राज्य के गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साइबर क्राइम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। इनमें एस4सी की स्थापना, 1930 हेल्पलाइन, सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एनालिटिकल रिपॉजिटरी, साइबर कमांडो तथा यौन अपराधों की जाँच के लिए इन्वेस्टिगेशन ट्रैकिंग सिस्टम फॉर सेक्सुअल ऑफेन्सेस (ITSO) शामिल हैं।

विदेशी नागरिकों की निर्धारित प्रवास अवधि के आँकड़े, फॉरेनर्स आइडेंटिफिकेशन पोर्टल के उपयोग की स्थिति तथा अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की स्थिति पर भी अधिकारियों ने जानकारी दी।

न्यायिक सुधार और अभियोजन प्रणाली

बैठक में न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। सांध्य अदालतों के संचालन, तकनीकी साक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए त्वरित कार्रवाई, न्यायालयों में आवश्यक भर्तियाँ तथा पब्लिक प्रॉसीक्यूशन सिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में पब्लिक प्रॉसीक्यूटर्स की संख्या बढ़ाने पर चर्चा हुई।

इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम, मेडिको लीगल एग्जामिनेशन और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग सिस्टम, तथा मॉडल जेल अधिनियम एवं मॉडल जेल मैनुअल के क्रियान्वयन पर भी समीक्षा की गई।

आपदा प्रबंधन और तटीय सुरक्षा

गुजरात की लंबी समुद्री सीमा को देखते हुए कोस्टल सिक्योरिटी और सीमा सुरक्षा से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, एसडीआरएफ की स्थापना, स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट फंड (SDMF) की उपलब्धता, नेशनल डिजास्टर मिटिगेशन फंड और अहमदाबाद में शहरी बाढ़ निवारण की योजनाओं पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ। शत्रु संपत्ति और आर्म्स लाइसेंस से जुड़े विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहे।

नशामुक्त भारत अभियान

अमित शाह ने 2029 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य में नारकोटिक्स ड्रग्स तथा नशीले पदार्थों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया। 1933 कंट्रोल रूम के विस्तार, सभी एजेंसियों द्वारा सघन अभियान चलाने और व्यापक सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने पूर्व की बैठकों में हुई चर्चाओं के क्रियान्वयन की स्थिति, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़े सुझावों तथा उन पर हुई प्रगति की विस्तृत जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को दी। आगे आने वाले समय में इन बिंदुओं पर की गई प्रगति की पुनः समीक्षा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लव जिहाद और CAA क्रियान्वयन — यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार चुनावी दृष्टि से संवेदनशील राज्य में सामाजिक मुद्दों पर भी प्रशासनिक दबाव बनाए रखना चाहती है। असली परीक्षा यह होगी कि इन 20 से अधिक बिंदुओं पर तय समयसीमा में कितना ठोस क्रियान्वयन होता है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह की अहमदाबाद बैठक में किन मुख्य विषयों पर चर्चा हुई?
बैठक में कानून-व्यवस्था, साइबर क्राइम, तटीय एवं सीमा सुरक्षा, मादक पदार्थ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, आतंकवाद नियंत्रण, CAA क्रियान्वयन, जनगणना, अग्निवीर योजना तथा न्यायिक सुधार सहित 20 से अधिक विषय शामिल थे। अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की स्थिति और POCSO मामलों की समीक्षा भी की गई।
नशामुक्त भारत 2029 के लक्ष्य के लिए गुजरात को क्या निर्देश दिए गए?
अमित शाह ने 2029 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य के लिए राज्य में नारकोटिक्स ड्रग्स के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और विस्तृत एक्शन प्लान बनाने का निर्देश दिया। 1933 कंट्रोल रूम के विस्तार, सभी एजेंसियों द्वारा सघन अभियान तथा व्यापक सामाजिक जागरूकता पर भी जोर दिया गया।
इस बैठक में गुजरात की ओर से कौन-कौन शामिल हुए?
बैठक में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी और मुख्य सचिव मनोज कुमार दास के साथ राज्य के गृह विभाग तथा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
गुजरात की तटीय और सीमा सुरक्षा पर क्या समीक्षा हुई?
बैठक में कोस्टल सिक्योरिटी की स्थिति, सीमा सुरक्षा से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की प्रगति की समीक्षा की गई। सीमावर्ती जिलों की स्थिति पर अमित शाह ने राज्य सरकार को आवश्यक सुझाव भी दिए।
बैठक में न्यायिक सुधारों के संदर्भ में क्या चर्चा हुई?
न्यायालयों में आवश्यक भर्तियों, सांध्य अदालतों के संचालन, तकनीकी साक्ष्यों को प्राथमिकता और पब्लिक प्रॉसीक्यूशन सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए पब्लिक प्रॉसीक्यूटर्स की संख्या बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम और मॉडल जेल मैनुअल के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।
राष्ट्र प्रेस
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