15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अमित शाह का दावा: गुजरात में घुसपैठ और सीमा तस्करी पूरी तरह बंद, भुज में हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अमित शाह का दावा: गुजरात में घुसपैठ और सीमा तस्करी पूरी तरह बंद, भुज में हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने भुज में उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक में दावा किया कि गुजरात में घुसपैठ और सीमा तस्करी पूरी तरह बंद हो गई है। 0-15 किमी सीमा क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस, हवाला-ड्रोन-नार्को पर कड़ी निगरानी और सीमांत गाँवों में 100% योजना सैचुरेशन के निर्देश दिए गए।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मई 2026 को भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे गुजरात के जिलों की सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
शाह ने दावा किया कि गुजरात में घुसपैठ और सीमा तस्करी पूरी तरह बंद हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0 से 15 किलोमीटर क्षेत्र में हर अनधिकृत अतिक्रमण के प्रति जीरो टॉलरेंस का निर्देश।
हर जिले में BSF, तटरक्षक बल, ED, आयकर विभाग को मिलाकर सुरक्षा समन्वय समूह बनाने का आदेश।
सीमावर्ती जिलों में हवाला, म्यूल अकाउंट, शेल कंपनियों, ड्रोन और नार्को पर कड़ी निगरानी के निर्देश।
सीमांत गाँवों में केंद्र और राज्य की हर योजना का 100% सैचुरेशन सुनिश्चित करने का निर्देश।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मई 2026 को भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा (IPB) से सटे गुजरात के सीमावर्ती और तटीय जिलों की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में शाह ने दावा किया कि बॉर्डर फेंसिंग, समुद्री सुरक्षा और राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते गुजरात में घुसपैठ तथा सीमा पर तस्करी पूरी तरह बंद हो गई है।

बैठक में कौन-कौन शामिल रहे

इस सुरक्षा समीक्षा बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा कच्छ, वाव थराद और पाटन के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) भी बैठक में शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत-पाकिस्तान सीमा पर अधिक सुदृढ़ और व्यापक सीमा प्रबंधन सुनिश्चित करना था, जिसमें जिला प्रशासन की सक्रिय एवं प्रभावी भूमिका पर विशेष बल दिया गया।

मुख्य निर्देश और सुरक्षा रणनीति

गृह मंत्री शाह ने निर्देश दिया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0 से 15 किलोमीटर के क्षेत्र में हर अनधिकृत अतिक्रमण के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में कट्टरपंथीकरण (रेडिकलाइज़ेशन) के केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखने की भी आवश्यकता पर बल दिया।

शाह ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में जिला मजिस्ट्रेट को जनसांख्यिकीय परिवर्तन की सख्त मॉनिटरिंग और नियमित रिपोर्टिंग करनी चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों के आने से हो रहे रिवर्स माइग्रेशन को उन्होंने स्वागतयोग्य बताया। पहले से बसे घुसपैठियों को वापस भेजने के कार्य में पुलिस स्टेशन से लेकर पटवारी तक सभी को एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया गया।

वित्तीय अपराध और समन्वय पर जोर

गृह मंत्री ने प्रत्येक जिले में सुरक्षा समन्वय समूह बनाने का निर्देश दिया, जिसमें BSF, तटरक्षक बल, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और लीड बैंक के प्रबंधक को शामिल किया जाए। इनकम टैक्स, मनी लॉन्ड्रिंग और कस्टम कानूनों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी DM, SP और आईजी, बॉर्डर रेंज पर तय की गई।

शाह ने सीमावर्ती जिलों में हवाला ट्रांजैक्शन, म्यूल अकाउंट, शेल कंपनियों, संदिग्ध वाहनों और GST कलेक्शन पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक अपराध से निपटने वाली एजेंसियों को सीमा क्षेत्रों के बारे में सख्ती से सूचित किया जाए और आयकर विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर सर्वे की बड़ी मुहिम चलाए।

तटीय सुरक्षा और विकास योजनाएँ

अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा की निकटता को देखते हुए शाह ने तटीय सुरक्षा और भारतीय तटरक्षक बल के साथ प्रभावी समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की हर योजना का सीमांत गाँवों में 100 प्रतिशत सैचुरेशन सुनिश्चित किया जाए।

आगे की राह

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की सतर्कता बढ़ी हुई है। गौरतलब है कि हर सीमावर्ती जिले की चुनौतियों और जरूरतों के आधार पर स्थानीय प्रशासन को SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें पहले से बसे घुसपैठियों, ड्रोन और नार्को की पहचान शामिल हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समीक्षा बैठकें सीमा प्रबंधन को ज़मीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बना सकती हैं, बशर्ते निर्देशों का क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है — BSF की वार्षिक रिपोर्टें और संसदीय समिति के दस्तावेज़ अक्सर सीमा पर निरंतर चुनौतियों का उल्लेख करते हैं। जनसांख्यिकीय परिवर्तन की 'सख्त मॉनिटरिंग' का निर्देश एक संवेदनशील नीतिगत क्षेत्र को छूता है, जिसके क्रियान्वयन पर नागरिक अधिकार संगठनों की नज़र रहेगी। वाइब्रेंट विलेजेज और 100% सैचुरेशन जैसे विकास-केंद्रित निर्देश सकारात्मक हैं, पर सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे की कमी एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है। असली परीक्षा यह होगी कि जिला-स्तरीय SOP और समन्वय समूह कागज़ से ज़मीन तक कितनी तेज़ी से उतरते हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने भुज में किस विषय पर सुरक्षा समीक्षा बैठक की?
गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मई 2026 को भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे गुजरात के सीमावर्ती और तटीय जिलों की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए यह बैठक बुलाई। बैठक में सीमा प्रबंधन, घुसपैठ, तस्करी, कट्टरपंथीकरण और वित्तीय अपराध जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
गुजरात में घुसपैठ और तस्करी बंद होने का दावा किस आधार पर किया गया?
शाह ने बॉर्डर फेंसिंग, समुद्री सीमा सुरक्षा और राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति को इसका कारण बताया। हालाँकि, यह दावा सरकारी बैठक में दिया गया वक्तव्य है और इसका स्वतंत्र सत्यापन अभी उपलब्ध नहीं है।
सीमावर्ती जिलों में जीरो टॉलरेंस नीति का क्या मतलब है?
शाह के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी अनधिकृत अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को SOP तैयार करने और पहले से बसे घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने का निर्देश दिया गया है।
सुरक्षा समन्वय समूह में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल होंगी?
प्रत्येक सीमावर्ती जिले में BSF, तटरक्षक बल, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और लीड बैंक के प्रबंधक को मिलाकर सुरक्षा समन्वय समूह बनाने का निर्देश दिया गया है। इनकम टैक्स, मनी लॉन्ड्रिंग और कस्टम कानूनों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी DM, SP और आईजी, बॉर्डर रेंज पर होगी।
वाइब्रेंट विलेजेज और सीमांत गाँवों में 100% सैचुरेशन का क्या अर्थ है?
शाह ने निर्देश दिया कि वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत और इसके अलावा भी केंद्र व राज्य सरकार की हर कल्याण योजना का लाभ सीमावर्ती गाँवों के हर पात्र नागरिक तक पहुँचाया जाए। इसका उद्देश्य सीमा पर रहने वाले नागरिकों को विकास से जोड़कर सुरक्षा को मज़बूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले