अमित शाह का बड़ा ऐलान: बंगाल में सीमा फेंसिंग पूरी होते ही घुसपैठ पर लगेगी लगाम
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 मई 2026 को गुजरात के भुज स्थित बॉर्डर आउटपोस्ट जी7 पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों से संवाद के दौरान स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेज़ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सीमा फेंसिंग पूरी होते ही बड़े पैमाने पर घुसपैठ रोकना संभव हो जाएगा।
बंगाल की अधूरी फेंसिंग: सुरक्षा की सबसे बड़ी कमज़ोरी
शाह ने पश्चिम बंगाल में अधूरी सीमा फेंसिंग को भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमज़ोरियों में से एक करार दिया। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में भौगोलिक चुनौतियाँ अवश्य हैं, परंतु जहाँ ज़मीन उपलब्ध थी, वहाँ भी फेंसिंग का काम अटका रहा — क्योंकि पिछली सरकार ने भूमि हस्तांतरण की अनुमति नहीं दी।
नई भाजपा सरकार की त्वरित कार्रवाई
गृह मंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के एक सप्ताह के भीतर ही मुख्यमंत्री ने फेंसिंग परियोजना के लिए आवश्यक सभी ज़मीन देने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा, 'अभी कुछ ही दिन पहले, बंगाल के लोगों के आशीर्वाद से, वहाँ पूरी तरह से लोकतांत्रिक तरीके से भाजपा सरकार बनी और एक सप्ताह के अंदर ही मुख्यमंत्री ने फेंसिंग के लिए जरूरी सारी जमीन देने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी।' भूमि के कुछ हिस्सों का हस्तांतरण पहले ही शुरू हो चुका है।
तकनीकी फेंसिंग और स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी
शाह ने बताया कि भौतिक बाड़ पूरी होने के बाद केवल जंगल, नदियाँ और नाले ही ऐसे क्षेत्र बचेंगे जहाँ से घुसपैठ का खतरा हो सकता है। इन क्षेत्रों के लिए सरकार तकनीकी फेंसिंग सिस्टम पर तेज़ी से काम कर रही है। उन्होंने केंद्र की 'स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी परियोजना' का भी उल्लेख किया, जिसमें ड्रोन, रडार, वॉच टावर और अन्य आधुनिक निगरानी प्रणालियाँ शामिल हैं।
पाकिस्तान और बांग्लादेश — दोनों मोर्चों पर सतर्कता
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश — दोनों सीमाओं पर पारंपरिक सीमा प्रबंधन के साथ-साथ टेक्नोलॉजी-आधारित निगरानी प्रणालियों को भी एकीकृत कर रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी की घटनाएँ राष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श में केंद्रीय मुद्दा बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा की लंबाई लगभग 2,216 किलोमीटर है, और इसका एक बड़ा हिस्सा वर्षों से अनफेंस्ड रहा है। सीमा फेंसिंग पूरी होने के बाद यह क्षेत्र की सुरक्षा वास्तुकला में निर्णायक बदलाव साबित हो सकता है।