मुर्शिदाबाद सीमा पर भाजपा विधायक चित्त मुखर्जी का दौरा, फेंसिंग न होने से घुसपैठ-तस्करी की चेतावनी

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मुर्शिदाबाद सीमा पर भाजपा विधायक चित्त मुखर्जी का दौरा, फेंसिंग न होने से घुसपैठ-तस्करी की चेतावनी

सारांश

मुर्शिदाबाद में BJP विधायक चित्त मुखर्जी के सीमा दौरे ने उजागर किया कि बिना फेंसिंग वाली सीमा पर BSF जवान बुनियादी सुविधाओं तक से वंचित हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने 27 किमी भूमि BSF को सौंपी है, लेकिन घुसपैठ और तस्करी रोकने की असली परीक्षा बाड़बंदी पूरी होने पर होगी।

मुख्य बातें

BJP विधायक चित्त मुखर्जी ने 21 मई को मुर्शिदाबाद के सीमावर्ती इलाके का दौरा किया।
सीमा पर बिजली सहित बुनियादी सुविधाओं की कमी से BSF जवानों को कठिनाई हो रही है।
फेंसिंग न होने के कारण घुसपैठ और तस्करी की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पुष्टि की कि BSF को 27 किलोमीटर भूमि आधिकारिक रूप से सौंपी जा चुकी है।
शेष भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अगले दो सप्ताह में पूरी होने की उम्मीद है।
विधायक ने मुख्यमंत्री और DM को सीमा क्षेत्र की स्थिति से अवगत कराने का आश्वासन दिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक चित्त मुखर्जी ने 21 मई को मुर्शिदाबाद के सीमावर्ती इलाके का दौरा किया — यह दौरा उस पृष्ठभूमि में हुआ जब पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 27 किलोमीटर भूमि आधिकारिक रूप से सौंपी है। मुखर्जी ने सीमा पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों का प्रत्यक्ष जायजा लिया।

मुख्य घटनाक्रम

दौरे के बाद मीडिया से बात करते हुए विधायक चित्त मुखर्जी ने कहा कि सीमा पर तैनात BSF जवानों को बिजली सहित कई बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सीमा के निकट बड़ी मात्रा में जमीन खाली पड़ी है और फेंसिंग न होने के कारण घुसपैठ तथा तस्करी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि यदि सीमा पर बाड़बंदी पूरी हो जाए, तो BSF के जवानों का काम न केवल आसान होगा, बल्कि देश की सुरक्षा भी मज़बूत होगी और घुसपैठ व तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

भूमि हस्तांतरण की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही बांग्लादेश से लगती बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए BSF को 45 दिनों के भीतर भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय के क्रियान्वयन की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को पुष्टि की कि 27 किलोमीटर भूमि BSF को आधिकारिक रूप से सौंपी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि इस उद्देश्य के लिए आवश्यक सम्पूर्ण भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अगले दो सप्ताह के भीतर पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने इसे राज्य की देशभक्त जनता के सहयोग और राज्य सरकार के अधिकारियों की कुशलता का परिणाम बताया।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, 27 किलोमीटर भूमि का हस्तांतरण केवल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी होगी, जिससे BSF को सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेज़ी से शुरू करने में मदद मिलेगी।

आम जनता और सुरक्षा बलों पर असर

सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग वर्षों से खुली सीमा के कारण होने वाली तस्करी और घुसपैठ की समस्याओं से प्रभावित हैं। बाड़बंदी पूरी होने से न केवल BSF की गश्त आसान होगी, बल्कि सीमावर्ती ग्रामीणों की सुरक्षा भी बेहतर होने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा

विधायक मुखर्जी ने कहा कि दौरे के बाद वे राज्य के मुख्यमंत्री और संबंधित जिला अधिकारियों (DM) को सीमा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएँगे, ताकि बुनियादी सुविधाओं की कमी सहित अन्य समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जा सके। भूमि हस्तांतरण की शेष प्रक्रिया दो सप्ताह में पूरी होने के बाद BSF द्वारा बाड़बंदी कार्य में तेज़ी आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केवल 27 किलोमीटर की शुरुआत उस विशाल सीमा की तुलना में बेहद कम है जो दशकों से खुली पड़ी है। विधायक मुखर्जी का दौरा राजनीतिक संदेश देने के साथ-साथ BSF की ज़मीनी दिक्कतों को भी सामने लाता है — बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बताता है कि सीमा प्रबंधन में ढाँचागत निवेश की कमी कितनी गहरी है। असली सवाल यह है कि भूमि हस्तांतरण के बाद बाड़बंदी की गति और गुणवत्ता क्या होगी — क्योंकि अतीत में ऐसी घोषणाएँ क्रियान्वयन की सुस्ती में दफन होती रही हैं।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP विधायक चित्त मुखर्जी ने मुर्शिदाबाद सीमा का दौरा क्यों किया?
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा BSF को भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए भूमि सौंपे जाने के बाद विधायक चित्त मुखर्जी ने सीमावर्ती इलाके की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए 21 मई को यह दौरा किया। उन्होंने BSF जवानों की बुनियादी सुविधाओं की कमी और फेंसिंग न होने से बढ़ती घुसपैठ व तस्करी की समस्याओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
पश्चिम बंगाल सरकार ने BSF को कितनी भूमि सौंपी है?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, BSF को अब तक 27 किलोमीटर भूमि आधिकारिक रूप से सौंपी जा चुकी है। शेष भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अगले दो सप्ताह के भीतर पूरी होने की उम्मीद है।
मुर्शिदाबाद सीमा पर फेंसिंग न होने से क्या समस्याएँ हैं?
विधायक चित्त मुखर्जी के अनुसार, फेंसिंग न होने के कारण सीमा पर घुसपैठ और तस्करी की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इसके अलावा BSF जवानों को बिजली सहित बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी गश्त और निगरानी क्षमता प्रभावित होती है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा पर बाड़बंदी का निर्णय कब लिया?
पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही बांग्लादेश से लगती बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए BSF को 45 दिनों के भीतर भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय के तहत अब तक 27 किलोमीटर भूमि सौंपी जा चुकी है।
विधायक मुखर्जी दौरे के बाद क्या कदम उठाएँगे?
विधायक चित्त मुखर्जी ने कहा कि वे दौरे के बाद राज्य के मुख्यमंत्री और जिला अधिकारियों (DM) को सीमा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएँगे। उनका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं की कमी और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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