अमित शाह की '360-डिग्री सुरक्षा योजना': राजस्थान सीमा पर घुसपैठ और नशा तस्करी पर जीरो टॉलरेंस
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 मई 2026 को बीकानेर में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के लिए एक व्यापक '360-डिग्री सुरक्षा योजना' का खाका तैयार किया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य घुसपैठ, अवैध निर्माण, साइबर अपराध और सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी पर कठोर अंकुश लगाना है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
सीमा सुरक्षा बल (BSF), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), राजस्थान पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित रहे। राजस्थान के पाँच सीमावर्ती जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) ने भी चर्चाओं में हिस्सा लिया।
मुख्य निर्देश और रणनीति
गृह मंत्री शाह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि भारत-पाकिस्तान सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में होने वाले अवैध निर्माणों के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई जाए। सुरक्षा के लिए खतरनाक अनाधिकृत ढाँचों की तत्काल पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने के आदेश दिए गए।
BSF और राज्य एजेंसियों को निर्देशित किया गया कि वे एक संयुक्त सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत निगरानी और खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाएँ। घुसपैठ और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने को इस पूरी योजना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
वित्तीय अपराध और साइबर धोखाधड़ी पर कार्रवाई
एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के तहत जिला मजिस्ट्रेटों को शेल कंपनियों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी व अवैध फंडिंग में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई के लिए अतिरिक्त अधिकार प्रदान किए गए। अधिकारियों को संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय नकली आधार कार्ड गिरोहों और संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क की जाँच करने के भी निर्देश दिए गए।
साइबर अपराध से निपटने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन '1930' के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया, ताकि नागरिकों को त्वरित सहायता मिल सके।
नए आपराधिक कानूनों का सख्त अनुपालन
गृह मंत्री शाह ने देश के नए आपराधिक कानूनों को कठोरता से लागू करने का निर्देश दिया और जिला प्रशासन, पुलिस तथा केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की पृष्ठभूमि में सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं।
बिहार के सीमांचल से तुलना और आगे की राह
अधिकारियों के अनुसार, इसी प्रकार के सुरक्षा और अतिक्रमणरोधी उपाय इससे पहले बिहार के सीमांचल क्षेत्र में भी लागू किए गए थे, जहाँ अवैध संपत्तियों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई थी। गौरतलब है कि यह राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में इस स्तर की व्यापक बहु-एजेंसी समीक्षा का एक महत्वपूर्ण कदम है। नई रणनीति के तहत अब इन जिलों में कानून प्रवर्तन और निगरानी की गति में उल्लेखनीय तेजी आने की उम्मीद है।