12 जुलाई 2026
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अमित शाह की '360-डिग्री सुरक्षा योजना': राजस्थान सीमा पर घुसपैठ और नशा तस्करी पर जीरो टॉलरेंस

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अमित शाह की '360-डिग्री सुरक्षा योजना': राजस्थान सीमा पर घुसपैठ और नशा तस्करी पर जीरो टॉलरेंस

सारांश

अमित शाह ने बीकानेर में बहु-एजेंसी बैठक की अध्यक्षता कर राजस्थान के पाँच सीमावर्ती जिलों के लिए '360-डिग्री सुरक्षा योजना' का खाका खींचा — घुसपैठ, नशा तस्करी, साइबर अपराध और अवैध निर्माण पर एक साथ प्रहार। सीमा के 15 किमी दायरे में जीरो टॉलरेंस और DM को विशेष अधिकार इस योजना की धुरी हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 मई 2026 को बीकानेर में उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
राजस्थान के पाँच सीमावर्ती जिलों के लिए व्यापक '360-डिग्री सुरक्षा योजना' तैयार की गई।
भारत-पाकिस्तान सीमा के 15 किमी दायरे में अवैध निर्माणों पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू होगी।
जिला मजिस्ट्रेटों को शेल कंपनियों , म्यूल खातों और नकली आधार कार्ड गिरोहों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई के लिए अतिरिक्त अधिकार दिए गए।
BSF और राज्य एजेंसियों को संयुक्त सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत समन्वय मजबूत करने के निर्देश।
साइबर अपराध हेल्पलाइन '1930' के प्रभावी उपयोग और नए आपराधिक कानूनों के सख्त अनुपालन पर बल।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 मई 2026 को बीकानेर में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के लिए एक व्यापक '360-डिग्री सुरक्षा योजना' का खाका तैयार किया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य घुसपैठ, अवैध निर्माण, साइबर अपराध और सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी पर कठोर अंकुश लगाना है।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

सीमा सुरक्षा बल (BSF), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), राजस्थान पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित रहे। राजस्थान के पाँच सीमावर्ती जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) ने भी चर्चाओं में हिस्सा लिया।

मुख्य निर्देश और रणनीति

गृह मंत्री शाह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि भारत-पाकिस्तान सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में होने वाले अवैध निर्माणों के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई जाए। सुरक्षा के लिए खतरनाक अनाधिकृत ढाँचों की तत्काल पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने के आदेश दिए गए।

BSF और राज्य एजेंसियों को निर्देशित किया गया कि वे एक संयुक्त सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत निगरानी और खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाएँ। घुसपैठ और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने को इस पूरी योजना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

वित्तीय अपराध और साइबर धोखाधड़ी पर कार्रवाई

एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के तहत जिला मजिस्ट्रेटों को शेल कंपनियों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी व अवैध फंडिंग में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई के लिए अतिरिक्त अधिकार प्रदान किए गए। अधिकारियों को संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय नकली आधार कार्ड गिरोहों और संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क की जाँच करने के भी निर्देश दिए गए।

साइबर अपराध से निपटने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन '1930' के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया, ताकि नागरिकों को त्वरित सहायता मिल सके।

नए आपराधिक कानूनों का सख्त अनुपालन

गृह मंत्री शाह ने देश के नए आपराधिक कानूनों को कठोरता से लागू करने का निर्देश दिया और जिला प्रशासन, पुलिस तथा केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की पृष्ठभूमि में सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं।

बिहार के सीमांचल से तुलना और आगे की राह

अधिकारियों के अनुसार, इसी प्रकार के सुरक्षा और अतिक्रमणरोधी उपाय इससे पहले बिहार के सीमांचल क्षेत्र में भी लागू किए गए थे, जहाँ अवैध संपत्तियों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई थी। गौरतलब है कि यह राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में इस स्तर की व्यापक बहु-एजेंसी समीक्षा का एक महत्वपूर्ण कदम है। नई रणनीति के तहत अब इन जिलों में कानून प्रवर्तन और निगरानी की गति में उल्लेखनीय तेजी आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर DM को दिए गए विशेष अधिकार तभी कारगर होंगे जब केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच डेटा-साझाकरण वास्तविक समय में हो। नशा तस्करी और साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं — इस अंतर-संबद्धता को समझे बिना सिलोड कार्रवाइयाँ सीमित प्रभाव ही छोड़ेंगी।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह की '360-डिग्री सुरक्षा योजना' क्या है?
यह राजस्थान के पाँच भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती जिलों के लिए तैयार की गई बहु-आयामी सुरक्षा रणनीति है, जिसमें घुसपैठ, नशा तस्करी, साइबर अपराध और अवैध निर्माण — सभी को एक साथ निशाना बनाया गया है। इसे 27 मई 2026 को बीकानेर में गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अंतिम रूप दिया गया।
सीमा के 15 किमी दायरे में जीरो टॉलरेंस नीति का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि भारत-पाकिस्तान सीमा से 15 किलोमीटर के भीतर बने सभी अनाधिकृत ढाँचों की तत्काल पहचान की जाएगी और जो सुरक्षा के लिए खतरनाक पाए जाएँगे, उन्हें बिना देरी ध्वस्त किया जाएगा। गृह मंत्री ने अधिकारियों को इस मामले में किसी भी प्रकार की ढील न बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए।
इस बैठक में कौन-सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
बैठक में BSF, NCB, CBDT, राजस्थान पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। राजस्थान के पाँच सीमावर्ती जिलों के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक भी उपस्थित रहे।
जिला मजिस्ट्रेटों को क्या विशेष अधिकार दिए गए?
DM को शेल कंपनियों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं। उन्हें नकली आधार कार्ड गिरोहों और संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क की जाँच करने के भी निर्देश दिए गए।
क्या इससे पहले भी इस तरह के उपाय लागू किए गए हैं?
अधिकारियों के अनुसार, इसी प्रकार के सुरक्षा और अतिक्रमणरोधी उपाय बिहार के सीमांचल क्षेत्र में पहले लागू किए जा चुके हैं, जहाँ अवैध संपत्तियों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई थी। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में अब इसी मॉडल को और व्यापक रूप से लागू किए जाने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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