बाड़मेर में पाक सीमा के 15 किमी दायरे में अवैध निर्माण ध्वस्त, BSF-प्रशासन का संयुक्त अभियान
सारांश
मुख्य बातें
बाड़मेर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में 19 जून 2025 को जिला प्रशासन, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की संयुक्त टीम ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर तोड़-फोड़ अभियान चलाया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों और 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत शुरू किया गया यह ऑपरेशन गदरा रोड और चौहटन सब-डिविजन के सीमावर्ती गाँवों में केंद्रित रहा।
अभियान का दायरा और प्रभावित गाँव
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत हमीरानी, मलाना, केरकोरी, चौहटन, भालगांव और डेम्बा गाँवों में पक्के ढाँचों की वैधता की जाँच और पुष्टि की गई। प्रशासन ने पहले इन निर्माणों का सर्वे किया था और कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर 18 जून तक अवैध ढाँचे हटाने का निर्देश दिया था। समय-सीमा बीत जाने के बाद भी अनुपालन न होने पर संयुक्त टीम ने कार्रवाई शुरू की।
प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कवायद सुरक्षा निर्देशों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की गई है और प्रभावित पक्षों को पहले ही नोटिस दिए जा चुके थे।
व्यापक सुरक्षा योजना का हिस्सा
यह अभियान केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों पर तैयार की गई एक व्यापक सुरक्षा योजना का अंग है। इस योजना के तहत राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों को 'स्पेशल वॉच ज़ोन' घोषित किया गया है। अब BSF, जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और केंद्र व राज्य की खुफिया एजेंसियाँ एक ही कमांड संरचना के तहत काम करेंगी।
इसका उद्देश्य आधुनिक ड्रोन तकनीक की मदद से घुसपैठ, नशा तस्करी और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त सीमा-पार नेटवर्क को खत्म करना है। भारत-पाकिस्तान सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में पूरी पारदर्शिता, बेहतर निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना इस पहल का मूल लक्ष्य है।
स्थानीय समुदाय की नाराज़गी
इस कार्रवाई से स्थानीय समुदाय के कुछ हिस्सों में असंतोष उभरा है। प्रभावित निवासियों ने तोड़-फोड़ को अनुचित बताते हुए आरोप लगाया कि अभियान शुरू करने से पहले उनसे पर्याप्त बातचीत नहीं की गई। उनका कहना है कि अचानक की गई इस कार्रवाई ने उनके घरों और आजीविका को नुकसान पहुँचाया है।
राजनीतिक विवाद और विपक्ष की आपत्ति
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कार्रवाई से पहले कांग्रेस प्रभारी एवं बायतू के विधायक हरीश चौधरी और बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस अभियान का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक फायदे के लिए की जा रही है।
नेताओं ने कहा, 'सीमावर्ती इलाका किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। ऐसी कार्रवाइयों से थार क्षेत्र में सदियों से चले आ रहे सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को नुकसान पहुँचने का खतरा है।' कांग्रेस प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट से भी मुलाकात कर इस अभियान पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई।
आगे की राह
प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना इस अभियान की प्राथमिकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा चिंताएँ बढ़ी हुई हैं और केंद्र सरकार ने सीमावर्ती जिलों में निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय असंतोष और राजनीतिक विरोध के बीच प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नज़र बनी रहेगी।