अमित शाह की सीमावर्ती जिलों के SP संग उच्च-स्तरीय बैठक: घुसपैठ, ड्रोन खतरा और अवैध आप्रवासन पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार, 9 जुलाई को नई दिल्ली में सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) की एक उच्च-स्तरीय कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में घुसपैठ, अवैध आप्रवासन, जनसांख्यिकीय बदलाव, सीमा सुरक्षा, ड्रोन से उत्पन्न खतरों और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।
बैठक का दायरा और भागीदारी
इस कॉन्फ्रेंस में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों सहित सभी प्रमुख सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस अधीक्षक भाग लेंगे। ये अधिकारी जमीनी हालात की जानकारी साझा करेंगे, नई सुरक्षा चुनौतियों पर विचार रखेंगे और उनसे प्रभावी तरीके से निपटने के उपायों पर विमर्श करेंगे।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार अवैध आप्रवासन के विरुद्ध एक सुनियोजित अभियान चला रही है। सरकार के अनुसार, बांग्लादेश के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित जिलों में जनसांख्यिकीय संरचना को बदलने की एक संगठित कोशिश की जा रही है।
हाईलेवल कमेटी और जाँच का दायरा
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कुछ महीने पहले देशभर में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों की जाँच के लिए एक हाईलेवल कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी को अवैध आप्रवासन, आबादी के बसने के असामान्य पैटर्न, संगठित पलायन और धार्मिक व सामाजिक समुदायों के बीच संरचनात्मक जनसंख्या परिवर्तन जैसे विषयों का अध्ययन करने का दायित्व सौंपा गया है। यह कॉन्फ्रेंस उसी व्यापक जाँच प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।
पिछले कुछ महीनों में शाह ने कई सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया है और जिला मजिस्ट्रेटों व पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठकें कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया है। इन दौरों में उन्होंने जिला प्रशासन को अवैध आप्रवासन के पैटर्न पर बारीकी से नजर रखने और सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या परिवर्तन के असर का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।
अवैध निर्माण और दस्तावेज़ी नेटवर्क पर सख्ती
गृह मंत्री ने अधिकारियों को सीमावर्ती जिलों में अवैध निर्माणों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने के भी निर्देश दिए हैं। आरोप है कि ऐसे ढाँचों का उपयोग कट्टरपंथ फैलाने के केंद्रों अथवा अवैध आप्रवासियों के अस्थायी ठिकानों के रूप में किया जाता है — इससे पहले कि दलालों के संगठित नेटवर्क के ज़रिये उन्हें जाली पहचान दस्तावेज़ मुहैया कराए जाएँ।
ड्रोन खतरा और सीमा-बाड़बंदी की समीक्षा
बैठक में पाकिस्तान की ओर से सीमा पार हथियार और नशीले पदार्थ लाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोनों से उत्पन्न खतरे की भी समीक्षा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम की प्रगति — विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों में — इस उच्च-स्तरीय बैठक के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल होने की संभावना है।
विकास और कल्याण भी एजेंडे में
सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ इस कॉन्फ्रेंस में सीमावर्ती जिलों में रहने वाले नागरिकों के विकास और कल्याण पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इन जिलों को दुश्मन की गतिविधियों और सीमा पार घुसपैठ के विरुद्ध रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आने वाले हफ्तों में इस बैठक के निष्कर्षों के आधार पर नीतिगत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।