विजयदशमी पर CM भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में की शस्त्र पूजा, सुरक्षाकर्मियों को दिया कर्तव्य योग का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी के पावन पर्व पर गांधीनगर स्थित मुख्यमंत्री आवास परिसर में शास्त्रोक्त विधि से शस्त्र पूजा संपन्न की। असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक इस महापर्व पर उन्होंने प्राचीन भारतीय परंपरा को जीवित रखते हुए हथियारों और शास्त्रों की रक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
शस्त्र पूजन का आयोजन
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा एवं सेफ्टी व्यवस्था में तैनात सुरक्षाकर्मियों के शस्त्रों की शास्त्रों के अनुसार विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने सभी सुरक्षाकर्मियों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
पूजन में पुलिस उपाधीक्षक, पुलिस निरीक्षक, पुलिस उप-निरीक्षक, कमांडो तथा ड्राइवर सहित मुख्यमंत्री की सुरक्षा टीम के समस्त सदस्यों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था के प्रभारी पुलिस अधीक्षक तेजस पटेल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री का औपचारिक स्वागत किया।
सुरक्षाकर्मियों को प्रेरणादायी मार्गदर्शन
शस्त्र पूजन के बाद मुख्यमंत्री ने उपस्थित सुरक्षाकर्मियों को संबोधित करते हुए कर्तव्य, कर्तव्य-बोध और कर्म योग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए दया, करुणा और सद्कर्मों की भावना बनाए रखना तथा कर्तव्य पथ पर अनथक परिश्रम करना ही सच्चा कर्म योग और कर्तव्यपरायणता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्तव्य पालन के साथ-साथ अच्छे कर्मों के माध्यम से मानवीय मूल्यों की रक्षा और आध्यात्मिक उन्नति का विचार जीवन में उतना ही महत्वपूर्ण है।
परंपरा की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि गांधीनगर में मुख्यमंत्री आवास पर विजयदशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन की यह परंपरा नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आरंभ की थी। तब से यह परंपरा पारंपरिक आस्था और कर्तव्य-भावना के साथ निरंतर निभाई जाती रही है।
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन में सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने की एक सचेत कोशिश भी है। मोदी द्वारा स्थापित इस परंपरा को उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में पटेल आगे बढ़ा रहे हैं।
विजयदशमी का सांस्कृतिक महत्व
विजयदशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक पर्व है। भारतीय परंपरा में इस दिन शस्त्र पूजन की प्रथा सदियों पुरानी है, जो क्षात्र-धर्म और राज्य-सुरक्षा के आदर्शों को अभिव्यक्त करती है। शासन के स्तर पर इस परंपरा का पालन सांस्कृतिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत देता है।
आने वाले दिनों में ऐसे सांस्कृतिक आयोजन राज्य प्रशासन और उसकी सुरक्षा एजेंसियों के बीच नैतिक एकता को सुदृढ़ करने में भूमिका निभाते रहेंगे।