एसआईआर पर संसद में चर्चा को तैयार है सरकार: अमित शाह ने विपक्ष से कहा — 'सदन चलने दीजिए'
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह ने 3 नवंबर 2026 को रायपुर में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मुद्दे पर संसद में खुलकर बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसे एसआईआर पर आपत्ति है तो वह संसद की कार्यवाही बाधित करने के बजाय सदन के भीतर अपनी बात रखे। शाह ने यह बयान छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह में दिया, जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उपस्थित थे।
एसआईआर विवाद और सरकार की स्थिति
शाह ने कहा कि सरकार किसी भी विषय पर संसदीय चर्चा से नहीं कतराती। उनके अनुसार, विपक्ष यदि एसआईआर को लेकर वास्तव में गंभीर है तो उसे सदन चलाना होगा — तभी बहस संभव है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद के हालिया सत्रों में विपक्षी दलों द्वारा कार्यवाही बाधित किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
छत्तीसगढ़ गठन और विकास यात्रा
शाह ने छत्तीसगढ़ राज्य के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में वाजपेयी ने इस क्षेत्र को अलग पहचान दी, जो तब तक विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ था। उनके अनुसार इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को संवारने और विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का काम किया।
गृह मंत्री ने अटल नगर-नवा रायपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में कहा कि आज छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर प्रगति के रास्ते पर अग्रसर है। उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों की सराहना करते हुए इसे राज्य के लिए 'गौरव, उपलब्धि और संकल्प का अवसर' बताया।
कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना
शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने हमेशा असंवैधानिक सरकारों और ऐसे सांसदों का समर्थन किया जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध थे। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में जनता की चुनी हुई सरकार नहीं थी, वहाँ नक्सलियों ने अपना अलग गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री तक बना रखा था — और सवाल उठाया कि किस संविधान ने उन्हें यह अधिकार दिया।
शाह ने यह भी आरोप लगाया कि नक्सलियों ने कई निर्दोष पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों को पेड़ों पर लटकाकर फाँसी दी। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संसद में ऐसी ताकतों और व्यवस्थाओं का समर्थन करते हैं।
सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख
गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं की भी चर्चा की। उन्होंने गुरु घासीदास और गुरु नानक देव के संदेशों में समानता, सेवा और सत्य के भाव को राज्य की परंपरा का अभिन्न अंग बताया। शाह ने छत्तीसगढ़ पंडुम, बस्तर ओलंपिक, पंथी, पंडवानी, राउत नाचा, करमा और सैला नृत्य जैसी परंपराओं का जिक्र किया। साथ ही ढोकरा कला, बेल मेटल, कास्ट क्राफ्ट और कोसा जैसी हस्तकलाओं को राज्य की विशिष्ट पहचान बताया।
उन्होंने बस्तर दशहरा की 75 दिनों तक चलने वाली अनूठी परंपरा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इसे नई पहचान दी है। विष्णु देव साय सरकार द्वारा लोक संस्कृति के संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ और नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य अब दूर नहीं है।