अमरावती में वन्यजीव सप्ताह: 131 सांपों समेत 145+ जीवों को बचाया, तेंदुए की मौत से चिंता
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के अमरावती में 1 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच मनाए गए वन्यजीव सप्ताह के दौरान वाइल्ड लाइफ अवेयरनेस रिसर्च एंड वेलफेयर सोसायटी (WAR) ने एक विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया, जिसमें 131 सांपों सहित डेढ़ सौ से अधिक वन्यजीवों को सुरक्षित बचाकर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। अमरावती वन विभाग के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती को भी उजागर किया।
अभियान का विस्तार और उपलब्धियाँ
वन विभाग की रैपिड रेस्क्यू टीम के साथ मिलकर WAR के कार्यकर्ताओं ने अमरावती जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुँचकर वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़ा। सात दिनों के इस अभियान में 131 सांप, दो घायल बंदर, नीलगाय का एक बच्चा, तीन गोह (मॉनिटर लिज़र्ड), सात चमगादड़ और एक पक्षी को बचाया गया।
इन सभी जीवों को रेस्क्यू के बाद उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया, ताकि पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहे।
अजगरों का रेस्क्यू और मानव-वन्यजीव संघर्ष
अनकवाड़ी और तलेगांव ठाकुर परिसर में दो अजगरों का भी रेस्क्यू किया गया। बताया गया कि इन अजगरों ने नीलगाय और बकरी के बच्चों को निगल लिया था, जो मानव बस्तियों के निकट वन्यजीवों की बढ़ती उपस्थिति का संकेत है।
यह ऐसे समय में आया है जब वडाली वन परिक्षेत्र में तेंदुए के आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि एसआरपीएफ कैंप परिसर में सड़क पार करते समय एक तेंदुए की मौत की घटना भी रिपोर्ट की गई है, जो वन्यजीवों और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते टकराव की गंभीरता को रेखांकित करती है।
WAR संस्था की अपील और जागरूकता प्रयास
WAR संस्था के अध्यक्ष नीलेश कांचनपुरे ने नागरिकों से अपील की है कि रिहायशी इलाकों में सांप या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर उसे नुकसान पहुँचाने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग की हेल्पलाइन 1926 पर संपर्क करें, ताकि प्रशिक्षित दल उसे सुरक्षित बचा सके।
कांचनपुरे ने स्पष्ट किया, 'कोई भी वन प्राणी मरना नहीं चाहिए। अप्राकृतिक मृत्यु से पर्यावरण को हानि होती है।' टीम ने अभियान के दौरान स्थानीय नागरिकों को मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के बारे में भी जानकारी दी।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में निरंतर कमी और मानवीय बस्तियों के विस्तार के कारण ऐसी घटनाएँ अमरावती जिले में बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते जागरूकता और रेस्क्यू तंत्र मज़बूत नहीं किया गया, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ आगे और गंभीर रूप ले सकती हैं। नागरिकों से सतर्क रहने और वन विभाग के साथ सहयोग करने की अपील की गई है।
आगामी महीनों में WAR संस्था जिले भर में जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की योजना बना रही है, जिससे वन्यजीव संरक्षण को जमीनी स्तर पर और मज़बूती मिल सके।