बस्तर में 'मिशन रीयूनाइट': 48 घंटे की मशक्कत के बाद दो तेंदुआ शावक मां की गोद में लौटे
सारांश
मुख्य बातें
बस्तर वनमंडल के चित्रकोट रेंज के दुर्गम पहाड़ी जंगलों में वन विभाग ने 22 से 24 अगस्त 2025 के बीच एक अत्यंत संवेदनशील वन्यजीव बचाव अभियान — 'मिशन रीयूनाइट' — को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। करीब 48 घंटे की अथक निगरानी और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग के बाद तेंदुए के दो नवजात शावकों को उनकी मां से सुरक्षित मिला दिया गया।
कैसे शुरू हुआ अभियान
22 अगस्त को चित्रकोट रेंज के वन क्षेत्र में ग्रामीण बच्चों द्वारा तेंदुए के एक नवजात शावक को उठा लिए जाने की सूचना वन विभाग को मिली। मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल के नेतृत्व में वन अमले ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और उसी रात शावक को सुरक्षित संरक्षण में ले लिया गया।
इसके बाद तड़के करीब 4 बजे शावक को जंगल के एक चिन्हित स्थान पर छोड़ा गया, ताकि मादा तेंदुआ उसे वापस ले जा सके। हालांकि, अगले दिन निगरानी में पता चला कि मादा तेंदुआ अपने बच्चे तक नहीं पहुंची थी — पहला प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका।
दूसरे शावक की तलाश और नई रणनीति
पहले प्रयास की विफलता के बाद वन अमले ने ग्रामीणों के सहयोग से पूरे इलाके में दूसरे शावक की खोज शुरू की। कुछ समय की मशक्कत के बाद दूसरा शावक भी बरामद कर लिया गया। दोनों शावकों को एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया और उनकी निगरानी के लिए आसपास हाई-रेजोल्यूशन ट्रैप कैमरे तैनात किए गए।
गौरतलब है कि तेंदुए जैसे संवेदनशील वन्यजीवों के शावकों को मां से मिलाने के अभियान में मानवीय हस्तक्षेप जितना कम हो, सफलता की संभावना उतनी अधिक होती है — यही कारण था कि वन टीम ने कैमरा निगरानी को प्राथमिकता दी।
48 घंटे बाद आई खुशखबरी
लगातार 48 घंटे की सतर्क निगरानी के बाद मंगलवार तड़के वह क्षण आया जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार था। ट्रैप कैमरों में कैद तस्वीरों में मादा तेंदुआ अपने दोनों शावकों के पास पहुंचती दिखाई दी। कुछ ही देर में वह दोनों बच्चों को सुरक्षित अपने साथ लेकर घने जंगल की ओर चली गई।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभियान पूरी तरह सफल रहा और दोनों शावक अब अपनी मां के साथ सुरक्षित हैं।
मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की मिसाल
यह अभियान केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं था — यह मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का एक जीवंत उदाहरण भी बन गया। जगदलपुर के बस्तर क्षेत्र में जहाँ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं कभी-कभी सामने आती रहती हैं, वहाँ स्थानीय ग्रामीणों का वन विभाग के साथ इस तरह कंधे से कंधा मिलाकर काम करना उल्लेखनीय है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में वन्यजीव संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने की माँग तेज हो रही है। वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल की अगुवाई में यह सफल अभियान बस्तर वनमंडल की संवेदनशीलता और कार्यकुशलता का प्रमाण है। आगे भी ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।