10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाराष्ट्र: वन्यजीव हमले में मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी, ₹260 करोड़ की कार्ययोजना मंजूर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाराष्ट्र: वन्यजीव हमले में मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी, ₹260 करोड़ की कार्ययोजना मंजूर

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने वन्यजीव हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव तैयार किया है। ₹260 करोड़ की कार्ययोजना, 450 बाघों का स्थानांतरण और बायो-फेंस — यह राज्य की अब तक की सबसे व्यापक इंसान-वन्यजीव संघर्ष नीति है।

मुख्य बातें

वन मंत्री गणेश नाइक ने 23 जून को विधानसभा में घोषणा की कि वन्यजीव हमले में मृतकों के परिजनों को पक्की सरकारी नौकरी दी जाएगी — कैबिनेट मंजूरी के बाद लागू होगी।
राज्य में अब तक 55 लोगों की मौत वन्यजीव हमलों में; 10 अति-संवेदनशील जिले चिह्नित।
इंसान-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए ₹260 करोड़ की कार्ययोजना को मंजूरी।
अगले 42 महीनों में लगभग 450 बाघों को नए अभयारण्यों में स्थानांतरित किया जाएगा; नासिक में 5,500 हेक्टेयर का नया वन क्षेत्र बनेगा।
शिकारी जानवरों के लिए खरगोश फार्म और हिरण प्रजनन केंद्र स्थापित होंगे; बाँस से बायो-फेंस बनाई जाएगी।
मुआवज़े में देरी दूर करने के लिए आपातकालीन राहत फंड अब सीधे जिला कलेक्टर स्तर पर उपलब्ध होगा।

महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने मंगलवार, 23 जून को विधानसभा में घोषणा की कि राज्य सरकार जंगली जानवरों के हमले में मारे गए नागरिकों के परिजनों को पक्की सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव लाई है। यह निर्णय राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। इंसान-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच यह महाराष्ट्र सरकार का अब तक का सबसे ठोस नीतिगत कदम माना जा रहा है।

मुख्य घोषणाएँ और कार्ययोजना

वन मंत्री नाइक के अनुसार, राज्य में अब तक 55 लोगों की मौत वन्यजीव हमलों में हो चुकी है और सरकार ने 10 अति-संवेदनशील जिलों की पहचान की है। इन जिलों में हस्तक्षेप के लिए ₹260 करोड़ की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है।

मांसाहारी वन्यजीवों को इंसानी बस्तियों से दूर रखने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया जाएगा — राज्य पोल्ट्री फार्म की तर्ज पर खरगोश फार्म स्थापित करेगा, ताकि शिकारी जानवरों को जंगल के भीतर ही पर्याप्त शिकार मिल सके। इसके साथ ही हिरण प्रजातियों के प्रजनन को तेज़ी से बढ़ाने की भी योजना है।

विस्तार रणनीति: नए अभयारण्य और बायो-फेंस

मौजूदा वन्यजीव रिज़र्व पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए नासिक में 5,500 हेक्टेयर क्षेत्र में तडोबा-शैली का नया वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा। अगले 42 महीनों में लगभग 450 बाघों को व्यवस्थित रूप से नए अभयारण्यों में स्थानांतरित करने की योजना है।

इंसानी बस्तियों में वन्यजीवों की घुसपैठ रोकने के लिए बाँस के पेड़ों से 'बायो-फेंस' (प्राकृतिक बाड़) बनाई जाएगी। मंत्री नाइक ने बताया कि पालघर, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, कोल्हापुर और मराठवाड़ा क्षेत्र में इसकी तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।

विधानसभा में विपक्ष की आवाज़

ये घोषणाएँ विधायक अतुल भातखलकर, सुधीर मुनगंटीवार और अन्य सदस्यों द्वारा लाए गए 'ध्यान-आकर्षण प्रस्ताव' पर चर्चा के दौरान की गईं। इस प्रस्ताव का केंद्र चंद्रपुर जिले की वह हालिया घटना थी जिसमें तेंदू के पत्ते इकट्ठा कर रही चार महिलाओं की बाघ के हमले में मौत हो गई थी।

भातखलकर ने कहा कि इंसान-वन्यजीव टकराव अब कभी-कभार होने वाली घटना नहीं रही, बल्कि लगभग रोज़ाना का संकट बन गई है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सामाजिक-आर्थिक असमानता की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जहाँ अमीर पर्यटक बाघों की एक झलक के लिए हज़ारों रुपये खर्च करते हैं, वहीं जंगल के किनारे रहने वाले गरीब स्थानीय लोग अपनी जान गँवा रहे हैं। उन्होंने माँग की कि अतिरिक्त बाघों को दूसरी जगह भेजा जाए और शीर्ष शिकारियों की संख्या जंगल की वास्तविक क्षमता के अनुरूप हो।

मुआवज़े में देरी और 'नेगेटिव ऑथराइज़ेशन' की माँग

भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा देने में अफसरशाही की देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 30 दिन की समय-सीमा होने के बावजूद वित्त विभाग से फंड जारी होने में देरी के कारण पीड़ित परिवारों को समय पर राशि नहीं मिल पाती। मुनगंटीवार ने 'नेगेटिव ऑथराइज़ेशन' प्रणाली लागू करने की माँग की, जिसे मंत्री नाइक ने स्वीकार कर लिया। अब आपातकालीन राहत फंड सीधे जिला कलेक्टर स्तर पर उपलब्ध होंगे, ताकि बिना किसी प्रशासनिक बाधा के मुआवज़ा पहुँच सके।

आगे क्या होगा

सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होगा, जबकि ₹260 करोड़ की कार्ययोजना पहले से मंजूर है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में बाघ संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच संतुलन बनाने की चुनौती तेज़ होती जा रही है। महाराष्ट्र का यह मॉडल अन्य बाघ-बहुल राज्यों के लिए एक नज़ीर बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि कैबिनेट मंजूरी कब मिलेगी और पात्रता की शर्तें क्या होंगी — इन दोनों का ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। ₹260 करोड़ की कार्ययोजना और 450 बाघों के स्थानांतरण की महत्वाकांक्षा तभी सार्थक होगी जब क्रियान्वयन की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र स्पष्ट हों। गौरतलब है कि मुआवज़े में 30 दिन की समयसीमा पहले से कानून में थी, फिर भी परिवार महीनों इंतज़ार करते रहे — यह प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी को उजागर करता है। खरगोश फार्म और बायो-फेंस जैसे नवाचार दिलचस्प हैं, पर वन्यजीव विशेषज्ञों की राय के बिना इनकी वैज्ञानिक व्यवहार्यता पर प्रश्नचिह्न बना रहेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार वन्यजीव हमले के पीड़ितों के परिजनों को नौकरी कब देगी?
यह प्रस्ताव राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही तत्काल लागू किया जाएगा। वन मंत्री गणेश नाइक ने 23 जून को विधानसभा में यह घोषणा की, लेकिन कैबिनेट बैठक की तारीख अभी तय नहीं बताई गई है।
महाराष्ट्र में वन्यजीव हमलों की स्थिति कितनी गंभीर है?
राज्य में अब तक 55 लोगों की मौत वन्यजीव हमलों में हो चुकी है और सरकार ने 10 अति-संवेदनशील जिलों की पहचान की है। चंद्रपुर जिले में हाल ही में तेंदू पत्ता संग्रह कर रही चार महिलाओं की बाघ के हमले में मौत ने इस मुद्दे को विधानसभा तक पहुँचाया।
₹260 करोड़ की कार्ययोजना में क्या-क्या शामिल है?
इस कार्ययोजना में नासिक में 5,500 हेक्टेयर का नया वन क्षेत्र, 42 महीनों में 450 बाघों का स्थानांतरण, बाँस से बायो-फेंस निर्माण, खरगोश फार्म और हिरण प्रजनन केंद्र शामिल हैं। पालघर, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, कोल्हापुर और मराठवाड़ा में तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।
खरगोश फार्म और बायो-फेंस से क्या फायदा होगा?
खरगोश फार्म का उद्देश्य बाघ जैसे मांसाहारी जानवरों को जंगल के भीतर ही पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराना है ताकि वे इंसानी बस्तियों में न भटकें। बाँस से बनी बायो-फेंस एक प्राकृतिक बाड़ के रूप में काम करेगी जो वन्यजीवों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से रोकेगी।
मुआवज़े में देरी की समस्या कैसे सुलझाई जाएगी?
वन मंत्री नाइक ने घोषणा की कि अब आपातकालीन राहत फंड सीधे जिला कलेक्टर स्तर पर उपलब्ध होंगे, जिससे वित्त विभाग की मंजूरी का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। यह कदम विधायक सुधीर मुनगंटीवार की 'नेगेटिव ऑथराइज़ेशन' प्रणाली की माँग के जवाब में उठाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले