महाराष्ट्र: वन्यजीव हमले में मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी, ₹260 करोड़ की कार्ययोजना मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने मंगलवार, 23 जून को विधानसभा में घोषणा की कि राज्य सरकार जंगली जानवरों के हमले में मारे गए नागरिकों के परिजनों को पक्की सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव लाई है। यह निर्णय राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। इंसान-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच यह महाराष्ट्र सरकार का अब तक का सबसे ठोस नीतिगत कदम माना जा रहा है।
मुख्य घोषणाएँ और कार्ययोजना
वन मंत्री नाइक के अनुसार, राज्य में अब तक 55 लोगों की मौत वन्यजीव हमलों में हो चुकी है और सरकार ने 10 अति-संवेदनशील जिलों की पहचान की है। इन जिलों में हस्तक्षेप के लिए ₹260 करोड़ की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है।
मांसाहारी वन्यजीवों को इंसानी बस्तियों से दूर रखने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया जाएगा — राज्य पोल्ट्री फार्म की तर्ज पर खरगोश फार्म स्थापित करेगा, ताकि शिकारी जानवरों को जंगल के भीतर ही पर्याप्त शिकार मिल सके। इसके साथ ही हिरण प्रजातियों के प्रजनन को तेज़ी से बढ़ाने की भी योजना है।
विस्तार रणनीति: नए अभयारण्य और बायो-फेंस
मौजूदा वन्यजीव रिज़र्व पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए नासिक में 5,500 हेक्टेयर क्षेत्र में तडोबा-शैली का नया वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा। अगले 42 महीनों में लगभग 450 बाघों को व्यवस्थित रूप से नए अभयारण्यों में स्थानांतरित करने की योजना है।
इंसानी बस्तियों में वन्यजीवों की घुसपैठ रोकने के लिए बाँस के पेड़ों से 'बायो-फेंस' (प्राकृतिक बाड़) बनाई जाएगी। मंत्री नाइक ने बताया कि पालघर, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, कोल्हापुर और मराठवाड़ा क्षेत्र में इसकी तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।
विधानसभा में विपक्ष की आवाज़
ये घोषणाएँ विधायक अतुल भातखलकर, सुधीर मुनगंटीवार और अन्य सदस्यों द्वारा लाए गए 'ध्यान-आकर्षण प्रस्ताव' पर चर्चा के दौरान की गईं। इस प्रस्ताव का केंद्र चंद्रपुर जिले की वह हालिया घटना थी जिसमें तेंदू के पत्ते इकट्ठा कर रही चार महिलाओं की बाघ के हमले में मौत हो गई थी।
भातखलकर ने कहा कि इंसान-वन्यजीव टकराव अब कभी-कभार होने वाली घटना नहीं रही, बल्कि लगभग रोज़ाना का संकट बन गई है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सामाजिक-आर्थिक असमानता की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जहाँ अमीर पर्यटक बाघों की एक झलक के लिए हज़ारों रुपये खर्च करते हैं, वहीं जंगल के किनारे रहने वाले गरीब स्थानीय लोग अपनी जान गँवा रहे हैं। उन्होंने माँग की कि अतिरिक्त बाघों को दूसरी जगह भेजा जाए और शीर्ष शिकारियों की संख्या जंगल की वास्तविक क्षमता के अनुरूप हो।
मुआवज़े में देरी और 'नेगेटिव ऑथराइज़ेशन' की माँग
भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा देने में अफसरशाही की देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 30 दिन की समय-सीमा होने के बावजूद वित्त विभाग से फंड जारी होने में देरी के कारण पीड़ित परिवारों को समय पर राशि नहीं मिल पाती। मुनगंटीवार ने 'नेगेटिव ऑथराइज़ेशन' प्रणाली लागू करने की माँग की, जिसे मंत्री नाइक ने स्वीकार कर लिया। अब आपातकालीन राहत फंड सीधे जिला कलेक्टर स्तर पर उपलब्ध होंगे, ताकि बिना किसी प्रशासनिक बाधा के मुआवज़ा पहुँच सके।
आगे क्या होगा
सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होगा, जबकि ₹260 करोड़ की कार्ययोजना पहले से मंजूर है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में बाघ संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच संतुलन बनाने की चुनौती तेज़ होती जा रही है। महाराष्ट्र का यह मॉडल अन्य बाघ-बहुल राज्यों के लिए एक नज़ीर बन सकता है।