गुकेश को आनंद महिंद्रा ने कहा 'ऑफिसर एंड ए जेंटलमैन', चेस ओलंपियाड में बोर्ड 4 पर खेलने के फैसले की तारीफ
सारांश
मुख्य बातें
महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने मौजूदा शतरंज विश्व चैंपियन डी. गुकेश की जमकर प्रशंसा की है — और वजह है गुकेश का वह असाधारण फैसला, जिसमें उन्होंने चेस ओलंपियाड में स्वेच्छा से बोर्ड 4 पर खेलना स्वीकार किया। महिंद्रा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह बात साझा करते हुए गुकेश को 'ऑफिसर एंड ए जेंटलमैन' की उपाधि दी।
बोर्ड 4 का फैसला — टीम के लिए अहंकार छोड़ा
टूर्नामेंट में आर. प्रज्ञानंद, अर्जुन एरिगैसी और निहाल सरीन क्रमशः बोर्ड 1, 2 और 3 पर खेल रहे थे, जबकि 20 वर्षीय विश्व चैंपियन गुकेश ने खुद को चौथे बोर्ड पर रखा। यह निर्णय गुकेश का अपना था। फिडे (FIDE) के हवाले से उनके शब्दों में, "यह स्पष्ट है कि प्रग और अर्जुन बहुत शानदार फॉर्म में हैं। रेटिंग्स भी यही बताती हैं और हाँ, यह मेरा ही आइडिया था। पूरी टीम का भी यही सोचना था कि इसी क्रम से हमारे टूर्नामेंट जीतने की सबसे अधिक संभावना है।"
गुकेश ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ल्ड चैंपियन का बोर्ड 4 पर खेलना उनके लिए कोई 'अपमान' नहीं, बल्कि देशभक्ति का सर्वोच्च भाव है। उन्होंने कहा, "अगर टीम को जरूरत हो, तो मैं सभी गेम में आराम भी कर सकता हूँ। हम यहाँ भारत के लिए खेल रहे हैं, और देश से बड़ा कोई खिलाड़ी नहीं है।"
आनंद महिंद्रा की प्रतिक्रिया
आनंद महिंद्रा ने एक्स पर गुकेश का इंटरव्यू वीडियो साझा करते हुए लिखा, "अगर आप यह देखना चाहते हैं कि एक सच्चा टीम प्लेयर कैसा होता है, तो यह उसका बेहतरीन उदाहरण है। गुकेश, आप 'ऑफिसर एंड ए जेंटलमैन' हैं।" महिंद्रा ने आगे जोड़ा कि गुकेश उन भारतीय गुणों का आदर्श उदाहरण हैं जिन्हें वे सराहते हैं — "हमेशा विनम्रता, और जरूरत पड़ने पर आक्रामकता।"
रेटिंग और प्रदर्शन का उतार चढ़ाव
ओलंपियाड के राउंड 2 में इंडोनेशिया के सतरिया दूता काहया के खिलाफ ड्रॉ के बाद गुकेश चार साल में पहली बार लाइव क्लासिकल रैंकिंग में 2,700 के अंक से नीचे आ गए। हालाँकि उन्होंने इस नतीजे को निराशाजनक नहीं माना। उन्होंने कहा, "दोनों तरफ से बहुत अच्छा खेल हुआ और मेरे प्रतिद्वंद्वी ने अच्छा बचाव किया। कभी कभी आप कुछ नहीं कर सकते।" इटली के सबिनो ब्रुनेलो पर जीत के बाद वे फिर से 2,700 से ऊपर पहुँच गए।
भारतीय टीम की चुनौतियाँ और प्रदर्शन
भारतीय टीम ने ओपन सेक्शन में अपने सभी मुकाबले जीते, लेकिन अर्जुन एरिगैसी के शुरुआती दौर में हारने से टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गुकेश ने इसके पीछे यात्रा और आयोजन संबंधी कारण गिनाए। उन्होंने बताया, "हमारी यात्रा बहुत थकाऊ थी और पहले दिन कुछ आयोजन संबंधी दिक्कतें थीं। अर्जुन को शायद इवेंट से कुछ घंटे पहले ही कमरा मिला। हम सभी को कमरा मिलने के लिए लगभग छह घंटे इंतजार करना पड़ा।"
यह ऐसे समय में आया है जब भारत शतरंज की दुनिया में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है — गुकेश के विश्व चैंपियन बनने के बाद देश में शतरंज को लेकर उत्साह अभूतपूर्व स्तर पर है। गुकेश की यह टीम फर्स्ट मानसिकता उन्हें खेल के इतिहास में एक अनूठे स्थान पर रखती है।