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साहिल वाकोडे मामला: IIT बॉम्बे में माता-पिता को घसीटना शर्मनाक, अनीश गवांडे का फडणवीस सरकार पर हमला

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साहिल वाकोडे मामला: IIT बॉम्बे में माता-पिता को घसीटना शर्मनाक, अनीश गवांडे का फडणवीस सरकार पर हमला

सारांश

IIT बॉम्बे में दिवंगत साहिल वाकोडे के माता-पिता को श्रद्धांजलि देने से रोककर घसीटा गया — और विपक्ष ने इसे महाराष्ट्र के लिए 'शर्मनाक दिन' करार दिया। NCRB के 20 साल के आँकड़े, गठबंधन सहयोगियों की चुप्पी और सार्वजनिक संस्थानों पर दमन के आरोप — यह विवाद अब सिर्फ एक घटना नहीं, एक व्यापक राजनीतिक टकराव बन चुका है।

मुख्य बातें

मुंबई पुलिस ने आईआईटी बॉम्बे परिसर में दिवंगत छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता को श्रद्धांजलि सभा के दौरान सड़क पर घसीटा।
एनसीपी (एसपी) नेता अनीश गवांडे ने इसे महाराष्ट्र के लिए शर्मनाक दिन बताते हुए देवेंद्र फडणवीस सरकार पर युवाओं और परिजनों की अनदेखी का आरोप लगाया।
NCRB के आँकड़ों के अनुसार पिछले 20 वर्षों में 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की, जिनमें 171 आत्महत्याएँ IIT परिसरों में हुईं।
गवांडे ने TISS मुंबई , JNU , जामिया और सत्यजित रे फिल्म संस्थान में छात्रों पर कथित दमन का ज़िक्र करते हुए सार्वजनिक शिक्षा पर 'युद्ध' का आरोप लगाया।
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के 'विदेशी टूलकिट' बयान और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर भी गवांडे ने पलटवार किया।
गवांडे ने संकेत दिया कि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की चुप्पी BJP गठबंधन में आंतरिक दरार की ओर इशारा करती है।

एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नेता अनीश गवांडे ने 18 अक्टूबर 2026 को देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आईआईटी बॉम्बे परिसर में दिवंगत छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता को मुंबई पुलिस द्वारा घसीटना महाराष्ट्र के लिए शर्मनाक दिन है। गवांडे ने आरोप लगाया कि यह सरकार न तो युवाओं की चिंता करती है और न ही शोक में डूबे परिजनों की।

माता-पिता को घसीटने की घटना क्या है

साहिल वाकोडे के माता-पिता आईआईटी बॉम्बे के परिसर में अपने दिवंगत बेटे की स्मृति में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का प्रयास कर रहे थे, तभी मुंबई पुलिस ने उन्हें सड़क पर घसीटा। इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए गवांडे ने कहा, 'यह बेहद शर्मनाक है' — शोक संतप्त माता-पिता के साथ इस तरह का बर्ताव किसी सभ्य समाज को शोभा नहीं देता।

गवांडे ने फडणवीस सरकार के गठबंधन सहयोगियों को भी चुनौती दी कि वे स्पष्ट करें कि क्या वे इस कार्रवाई का समर्थन करते हैं।

छात्र आत्महत्या के आँकड़े और न्याय की माँग

गवांडे ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों में देशभर में 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें से 171 आत्महत्याएँ IIT परिसरों में हुई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब न्याय माँगने पर भी माता-पिता को घसीटा जाए, तो इस देश में शोकाकुल परिजनों के लिए कोई जगह बची है या नहीं।

उन्होंने यह भी कहा कि शाहू, फुले और आंबेडकर की धरती पर बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर तक फाड़ी गई — यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अपमान का मामला है।

सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों पर व्यापक हमले का आरोप

गवांडे ने देश के कई प्रमुख संस्थानों में छात्रों पर कथित दमन का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत में सार्वजनिक शिक्षा के खिलाफ एक तरह का युद्ध छेड़ा गया है। उनके मुताबिक, सत्यजित रे फिल्म संस्थान में छात्रों को पीटा गया; टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई में एक स्मृति व्याख्यान आयोजित करने पर छात्रों को जेल भेजा गया।

उन्होंने आगे कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र भूख हड़ताल पर हैं क्योंकि CPWD द्वारा अरहने योग्य घोषित किए जा चुके छात्रावास उन्हें नहीं दिए जा रहे, जबकि जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र स्वतंत्र छात्र परिषद चुनाव न होने के विरोध में धरने पर बैठे हैं।

रिजिजू के बयान और 'इंडिया मॉडल' पर प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान पर गवांडे ने कहा कि रिजिजू सही कह रहे हैं — देश को न बांग्लादेश मॉडल चाहिए, न फ्रांस मॉडल। उन्होंने कहा, 'हमारे पास इंडिया मॉडल है — महात्मा गांधी का दिखाया रास्ता।'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के 'विदेशी टूलकिट' वाले बयान पर पलटवार करते हुए गवांडे ने कहा कि जब पुलिस लोगों को पीटती है और वीडियो सामने आता है, तो उसे पाकिस्तान की फ़ेक न्यूज़ बताना जनता की बुद्धि का अपमान है।

गठबंधन में दरार और आगे की राह

गवांडे ने संकेत दिया कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी असंतोष पक रहा है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार — दोनों BJP के सहयोगी — इस मामले पर चुप हैं। उनके अनुसार, जल्द ही गठबंधन सहयोगी भी खुलकर कहेंगे कि सड़कों पर लोगों को पीटना स्वीकार्य नहीं।

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब महाराष्ट्र में छात्र आंदोलन और संस्थागत स्वायत्तता को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को और तेज़ करने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 छात्र आत्महत्याओं के आँकड़े जब सार्वजनिक विमर्श में नहीं आते, तो यह नीतिगत विफलता है; जब उठाने वालों को घसीटा जाता है, तो यह राजनीतिक संकट है। गवांडे का 'इंडिया मॉडल' वाला जवाब आकर्षक है, लेकिन असली सवाल यह है कि विपक्ष इस आक्रोश को सड़क से संसद तक ले जाने की ठोस रणनीति कब बनाएगा।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साहिल वाकोडे कौन थे और IIT बॉम्बे में क्या हुआ?
साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे के एक दिवंगत छात्र थे। उनके माता-पिता जब परिसर में उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का प्रयास कर रहे थे, तब मुंबई पुलिस ने उन्हें सड़क पर घसीटा। इस घटना ने महाराष्ट्र में व्यापक राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
अनीश गवांडे ने फडणवीस सरकार पर क्या आरोप लगाए?
एनसीपी (एसपी) नेता अनीश गवांडे ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार न तो युवाओं की परवाह करती है और न ही शोकाकुल परिजनों की। उन्होंने इसे महाराष्ट्र के लिए शर्मनाक दिन बताते हुए गठबंधन सहयोगियों से भी पूछा कि क्या वे इस कार्रवाई का समर्थन करते हैं।
NCRB के छात्र आत्महत्या आँकड़े क्या कहते हैं?
NCRB के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में देशभर में 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें से 171 आत्महत्याएँ IIT परिसरों में हुई हैं। गवांडे ने इन आँकड़ों का हवाला देते हुए सरकार पर छात्र संकट की अनदेखी का आरोप लगाया।
गवांडे ने किरेन रिजिजू और नितिन नवीन के बयानों पर क्या कहा?
गवांडे ने कहा कि रिजिजू सही कह रहे हैं — देश को बांग्लादेश या फ्रांस मॉडल नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के 'इंडिया मॉडल' की जरूरत है। BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के 'विदेशी टूलकिट' वाले बयान पर उन्होंने कहा कि पुलिस की हिंसा के वीडियो को पाकिस्तानी फ़ेक न्यूज़ बताना जनता की बुद्धि का अपमान है।
इस विवाद का BJP के गठबंधन पर क्या असर पड़ सकता है?
गवांडे ने संकेत दिया कि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की चुप्पी BJP के भीतर बढ़ते असंतोष की ओर इशारा करती है। उनके अनुसार, आने वाले समय में गठबंधन सहयोगी भी सड़कों पर हिंसा के खिलाफ खुलकर बोलेंगे, जो सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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