प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: अपराधियों को वोट देकर बेहतर शासन की उम्मीद बेमानी
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 25 सितंबर 2026 को मुजफ्फरपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद के बीच चुनाव आयोग की विश्वसनीयता, बिहार में कानून-व्यवस्था और राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब बिहार की जनता अपराधियों, भ्रष्ट लोगों और माफिया को वोट देती है, तो बेहतर शासन की उम्मीद करना व्यर्थ है।
चुनाव आयोग पर प्रशांत किशोर का रुख
किशोर ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना उनके लिए कोई नई बात नहीं है। उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि तब भी उन्होंने आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। उनके अनुसार, यदि चुनाव आयोग ने निष्पक्षता से काम किया होता, तो उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 77 सीटें नहीं मिलतीं और उनकी संख्या 50 से भी कम रह जाती।
उन्होंने कहा कि SIR विवाद को सतही तौर पर नहीं, बल्कि उसकी जड़ तक जाकर समझना होगा — क्योंकि चुनावी प्रक्रिया में खामियाँ शासन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती हैं।
बिहार की जनता को सीधी चुनौती
किशोर ने अपनी बात को एक तीखे रूपक से स्पष्ट किया — 'अगर आप बबूल बोएंगे, तो आम खाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?' उनका तर्क था कि यदि समाज गलत लोगों को सत्ता में पहुँचाएगा, तो साफ-सुथरी व्यवस्था की अपेक्षा करना संभव नहीं। यह टिप्पणी उन्होंने बिहार की मौजूदा राजनीतिक संस्कृति पर सीधी उँगली उठाते हुए की।
बिहार बाढ़ और केंद्र की उदासीनता पर आरोप
किशोर ने बाढ़ के मोर्चे पर भी केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बिहार में करीब 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं, फिर भी न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अब तक इस पर कोई बयान दिया है। उन्होंने तुलनात्मक रूप से कहा कि गुजरात में प्राकृतिक आपदा आने पर पूरे देश का ध्यान तत्काल उस ओर जाता है, जबकि बिहार की बाढ़ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में जगह नहीं बना पाती।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है और प्रभावित परिवार राहत की बाट जोह रहे हैं।
कानून-व्यवस्था पर बिहार सरकार को घेरा
किशोर ने बिहार में बढ़ते अपराध और अपराधियों के बढ़ते हौसले पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने 'जंगल राज' के नाम पर वोट माँगकर सत्ता हासिल की, वे कथित तौर पर उससे भी बदतर व्यवस्था चला रहे हैं। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान — 'अगर तुमने रील नहीं बनाई होती, तो तुम पकड़े नहीं जाते' — का हवाला देते हुए इसकी आलोचना की। किशोर ने कहा कि इस तरह की सोच यह बताती है कि सत्ता में बैठे लोग अपराध के प्रति कितने असंवेदनशील हैं।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब बिहार में अपराध की घटनाएँ सियासी बहस के केंद्र में हैं और विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार पर हमलावर हैं।
जनता से गंभीर विचार-विमर्श की अपील
अपने संबोधन के अंत में किशोर ने बिहार की जनता से अपील की कि वे चुनाव, शासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों पर गंभीरता से सोचें। उनका मानना है कि बदलाव की शुरुआत मतदाता की सोच से होती है। आने वाले समय में SIR विवाद और बाढ़ राहत के मुद्दे बिहार की राजनीति को और धार देने की संभावना रखते हैं।