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महिला आरक्षण बिल पर अपर्णा यादव का विपक्ष पर बड़ा हमला — 'दशकों से महिलाओं को किया गुमराह'

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महिला आरक्षण बिल पर अपर्णा यादव का विपक्ष पर बड़ा हमला — 'दशकों से महिलाओं को किया गुमराह'

सारांश

उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने गोरखपुर में विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि 1996 से महिला आरक्षण बिल में बाधाएं डाली जा रही हैं। महिलाओं में बढ़ता आक्रोश चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

मुख्य बातें

अपर्णा यादव ने 24 अप्रैल को गोरखपुर में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की बैठक में हिस्सा लिया और विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि 1996 से अब तक विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल को पारित होने से रोककर महिलाओं को गुमराह किया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम सितंबर 2023 में पास हुआ, लेकिन परिसीमन की शर्त के कारण इसका क्रियान्वयन अभी लंबित है।
अपर्णा यादव ने भरोसा जताया कि PM नरेंद्र मोदी इस बिल को दोबारा संसद में लाकर पारित कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं में बढ़ता आक्रोश आगामी चुनावों में विपक्ष के लिए राजनीतिक रूप से महंगा साबित हो सकता है।
देश की आधी आबादी अब राजनीतिक भागीदारी के लिए जागरूक हो चुकी है और हर स्तर पर अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहती है।

गोरखपुर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने गोरखपुर में आयोजित आयोग की अहम बैठक में शामिल होने के बाद महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्षी दलों ने वर्षों तक इस विधेयक का विरोध कर देश की महिलाओं को भ्रमित किया है। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बिल को पुनः संसद में लाकर पारित कराने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध हैं।

गोरखपुर में महिला आयोग की बैठक — सभी सदस्य रहे मौजूद

अपर्णा यादव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि गोरखपुर में आयोजित इस बैठक में उत्तर प्रदेश महिला आयोग के समस्त सदस्य उपस्थित रहे। यह बैठक महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए बुलाई गई थी। बैठक के दौरान महिला आरक्षण बिल का विषय भी केंद्र में रहा।

1996 से अब तक — बाधाओं का लंबा इतिहास

अपर्णा यादव ने कहा कि यदि 1996 से अब तक के राजनीतिक इतिहास पर नजर डाली जाए, तो यह बात साफ हो जाती है कि महिला आरक्षण बिल को संसद में पारित होने से बार-बार रोका गया। उन्होंने चेताया कि भविष्य में भी इस विधेयक का विरोध जारी रह सकता है। गौरतलब है कि यह बिल पहली बार 1996 में संसद में पेश किया गया था और तब से लेकर 2023 तक इसे पारित कराने की राह में अनेक अवरोध आते रहे हैं।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से यह बिल पारित हुआ था, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए परिसीमन और जनगणना की शर्त जोड़ी गई है, जिससे इसके वास्तविक लागू होने की समयसीमा अनिश्चित बनी हुई है। यही वह बिंदु है जिसे लेकर अपर्णा यादव ने विपक्ष पर निशाना साधा।

महिलाओं में बढ़ता असंतोष — राजनीतिक प्रभाव अवश्यंभावी

अपर्णा यादव ने कहा कि मौजूदा हालात में महिलाओं के बीच आक्रोश और असंतोष तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसका सीधा राजनीतिक असर पड़ना तय है। उनके अनुसार, इस बढ़ते जनमत को देखते हुए विपक्षी दलों को भी इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना होगा। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी अब अपनी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए पूरी तरह जागरूक हो चुकी है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं भी इस मुद्दे पर विपक्ष के रवैये से नाराज हैं और यह नाराजगी आने वाले चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

PM मोदी के संबोधन का संदर्भ — महिला सशक्तीकरण का अभियान जारी रहेगा

अपर्णा यादव ने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को ध्यान से सुनें, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि महिला सशक्तीकरण का यह अभियान किसी भी स्थिति में नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का यह रवैया देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।

उन्होंने इस पूरे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक करार देते हुए कहा कि हर स्तर पर महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना समय की मांग है, जो भारतीय राजनीति की भावी दिशा तय करेगी।

आगे क्या होगा — बिल का भविष्य और चुनावी समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण बिल का मुद्दा आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में एक बड़ा चुनावी एजेंडा बन सकता है। जब तक परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, बिल का क्रियान्वयन लंबित रहेगा। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना रहेगा। अपर्णा यादव के इस बयान के बाद आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई से देखें तो यह भारतीय राजनीति की उस पुरानी विडंबना को उजागर करता है जहां महिलाओं को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सत्ता में उचित हिस्सेदारी नहीं दी जाती। 2023 में बिल पास होने के बावजूद परिसीमन की शर्त ने इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया — यह तथ्य सत्ता पक्ष की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाता है। अपर्णा यादव का विपक्ष पर हमला राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, लेकिन असली सवाल यह है कि जब सरकार के पास बहुमत है तो परिसीमन की शर्त हटाकर बिल तत्काल लागू क्यों नहीं किया जा सकता? महिला सशक्तीकरण की असली परीक्षा नारों में नहीं, नीतियों के क्रियान्वयन में होती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अपर्णा यादव ने महिला आरक्षण बिल पर क्या कहा?
अपर्णा यादव ने कहा कि विपक्ष ने 1996 से अब तक महिला आरक्षण बिल का विरोध कर महिलाओं को गुमराह किया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस बिल को दोबारा संसद में लाकर पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
महिला आरक्षण बिल कब पास हुआ था?
महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से पारित हुआ था। हालांकि इसके लागू होने के लिए परिसीमन और जनगणना की शर्त रखी गई है, जिससे इसका क्रियान्वयन अभी लंबित है।
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की गोरखपुर बैठक में क्या हुआ?
गोरखपुर में आयोजित उत्तर प्रदेश महिला आयोग की इस बैठक में आयोग के सभी सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई और महिला आरक्षण बिल केंद्रीय विषय रहा।
महिला आरक्षण बिल का विरोध क्यों होता रहा है?
1996 से अब तक कई विपक्षी दलों ने इस बिल को अपने-अपने राजनीतिक कारणों से रोका या इसमें बाधाएं डालीं। आलोचकों का कहना है कि ओबीसी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए उप-आरक्षण की मांग को लेकर भी यह बिल विवादों में रहा है।
अपर्णा यादव कौन हैं?
अपर्णा यादव उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू हैं और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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