20 अप्रैल के बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ले सकते हैं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जगह: कर्नाटक भाजपा
सारांश
Key Takeaways
- आर. अशोक का मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर आरोप
- डीके शिवकुमार की संभावित मुख्यमंत्री बनने की चर्चा
- कांग्रेस सरकार के खिलाफ आरोपों की भरमार
- 2018 के चुनावों में सिद्धारमैया की हार
- विकास कार्यों की कमी और घोटाले का मुद्दा
बागलकोट, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शनिवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर कड़ा हमला करते हुए आरोप लगाया कि 20 अप्रैल के बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार उनकी जगह ले सकते हैं।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अशोक ने कहा कि 20 अप्रैल के बाद मुख्यमंत्री का क्या होगा, यह अस्पष्ट है। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छीन सकते हैं।
अशोक ने यह भी कहा कि सिद्धारमैया ने कभी भी किसी अनुसूचित जनजाति नेता को मुख्यमंत्री बनाने की बात नहीं की है और उनकी स्थिति के मद्देनजर ऐसा होने की संभावना भी कम है। पूर्व मंत्री परमेश्वर मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन उनका भाग्य उनके साथ होगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है।
अशोक ने कहा कि सिद्धारमैया का असली चेहरा मैसूरु में सामने आया, जहां 2018 के विधानसभा चुनावों में उन्हें चामुंडेश्वरी सीट से हार का सामना करना पड़ा। सत्ता विरोधी लहर के कारण उन्हें 2018 में बादामी से भी चुनाव लड़ना पड़ा, जहां उन्होंने मामूली अंतर से जीत हासिल की। बादामी के लोगों ने उनका समर्थन किया, लेकिन उन्होंने 2023 के चुनावों में इस सीट को छोड़ दिया और मैसूरु की वरुणा सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। अब वे बागलकोट लौट आए हैं, और वे इस सीट को भी छोड़ देंगे।
उन्होंने आगे कहा कि सिद्धारमैया पहले भी बादामी से चुनाव लड़ चुके हैं और अब फिर से लौट आए हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब बादामी के जनसमर्थन का आनंद लेने के बाद उन्होंने विदाई ले ली, तो अब वे बागलकोट में विकास का दावा कैसे कर सकते हैं? जब आपके अपने विधायक यहां तीन साल तक सत्ता में रहे, तो आपके अनुयायी ने क्या विकास किया?
अशोक ने आगे कहा कि पूर्व विधायक वीरन्ना चरंतिमठ द्वारा पहले किए गए विकास कार्य अभी भी लोगों के मन में बसे हुए हैं, और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मतदाता उन्हें फिर से चुनेंगे।
कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद से मुख्यमंत्री पद के लिए संघर्ष चल रहा है।
उन्होंने बताया कि तीन साल में 30 घोटाले हुए हैं, जिसमें वाल्मीकि घोटाले से लेकर ठेकेदारों से जुड़े कथित 60 प्रतिशत कमीशन घोटाले शामिल हैं। एक मंत्री ने शराब लॉबी के माध्यम से करोड़ों रुपए जमा किए और दिल्ली भेजे। तीन साल में कोई उपलब्धि नहीं हुई है। सिंचाई के लिए कोई निधि आवंटित नहीं की गई है। कांग्रेस नेता केवल पैसा बना रहे हैं।
उन्होंने आगे दावा किया कि न तो एक भी बांध का निर्माण हुआ है और न ही कोई मेडिकल कॉलेज स्थापित हुआ है।