गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान से मिला भारत को अस्तित्व: अमित शाह
सारांश
Key Takeaways
- गुरु तेग बहादुर जी ने अपने बलिदान से भारतीय धर्मों की रक्षा की।
- उनका जीवन त्याग और समर्पण का प्रतीक है।
- गुरु जी की शहादत ने भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी।
- सीसगंज गुरुद्वारा आज भी देशभक्ति का प्रतीक है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु जी के योगदान को सराहा है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिख धर्म के नौवें गुरु, 'हिंद दी चादर' गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व पर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि गुरु तेग बहादुर जी नहीं होते, तो न कोई हिंदू और न कोई सिख होता। पूरा भारत खत्म हो जाता।
अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, "भारतीय संस्कृति और मानवता की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म को त्यागने के बजाय अपने प्राणों का बलिदान देना उचित समझा। उन्होंने अत्याचार और अन्याय का सामना करते हुए करुणा और संवेदना की एक मिसाल स्थापित की। गुरु साहिब की जीवनगाथा का स्मरण करते ही मन गर्व से भर जाता है।"
उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी ने बचपन में ही त्याग, समर्पण, बलिदान और वीरता के गुणों का परिचय दिया था। 13 वर्ष की आयु में, करतारपुर साहिब के ऐतिहासिक युद्ध में, जिस बहादुरी से उन्होंने मुगलों का सामना किया, उसी के चलते आठवें गुरु ने उन्हें 'तेग बहादुर' नाम दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि गुरु तेग बहादुर जी नहीं होते, तो न कोई हिंदू होता, न कोई सिख, और पूरा भारत समाप्त हो गया होता। इसलिए उन्हें 'हिंद की चादर' कहा जाता है। उन्होंने आगे कहा कि जब कश्मीरी पंडित गुरु तेग बहादुर जी के दरबार में पहुंचे और कहा, "सच्चे पाशा, हमारी रक्षा करो, हमारा धर्म संकट में है," तो गुरु जी ने कहा कि समय किसी महापुरुष का बलिदान मांगता है।
नवम गुरु की महान यात्रा दिल्ली तक गई, जहां उन्होंने औरंगजेब से कहा कि धर्म परिवर्तन बंद करो। यदि मेरा धर्म बदल दिया गया तो पूरा भारत धर्म परिवर्तन के लिए तैयार हो जाएगा। उन्होंने असीम यातनाएं सहन कीं, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया।
उन्होंने बताया कि दिल्ली का सीसगंज गुरुद्वारा आज भी देशभक्तों के लिए सबसे बड़ा तीर्थ स्थल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस देश पर नवम गुरु के उपकारों का शुक्राना अदा नहीं किया जा सकता, और कोई भी इसे नहीं भूल सकता।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने पोस्ट में लिखा है, "श्री गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व के इस पवित्र अवसर पर, मैं उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। वे हमारे समाज के महान संत थे, जिनका जीवन निडरता, त्याग और मानवता की गहरी भावना का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा सच, सम्मान और धर्म की रक्षा के लिए कठिनाइयों का सामना किया। उनका अमर संदेश हमें एक न्यायपूर्ण, दयालु और सौहार्दपूर्ण समाज बनाने की प्रेरणा देता है।"