अराघची का फ्रांस पर पलटवार: 'मानवाधिकारों पर भाषण बंद करो, दोहरापन शर्मनाक है'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 13 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखी पोस्ट में फ्रांस को मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून पर 'भाषण देना बंद करने' की चेतावनी दी। उनकी यह प्रतिक्रिया उस संयुक्त बयान के बाद आई, जिस पर फ्रांस समेत 25 अन्य देशों और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास के हस्ताक्षर थे, और जिसमें ईरान पर मृत्युदंड के अत्यधिक इस्तेमाल की आलोचना की गई थी।
अराघची का एक्स पर सीधा हमला
अराघची ने एक्स पर लिखा, 'फ्रांस जैसे देशों को दुनिया को मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भाषण देना बंद कर देना चाहिए। उनका दोहरापन साफ दिखता है और शर्मनाक है। गाजा में इजरायल के नरसंहार और ईरान के खिलाफ उसकी आक्रामक कार्रवाई का समर्थन करके आपने जो भी नैतिक ऊंचाई होने का दावा किया था, उसे पूरी तरह खत्म कर दिया है।' उन्होंने फ्रांस की खुद को मानवाधिकारों का रक्षक बताने की कोशिश को सीधे तौर पर खारिज किया।
विवाद की पृष्ठभूमि
ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार, यह टिप्पणी उस समय आई जब फ्रांस और 25 अन्य देशों ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में ईरान पर प्रदर्शनकारियों को लगातार मृत्युदंड देने की आलोचना की गई थी। हस्ताक्षरकर्ता देशों ने तेहरान से यह प्रथा बंद करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की।
दोहरे मापदंड का आरोप
अराघची ने तर्क दिया कि गाजा में इजरायली शासन की कार्रवाइयों और ईरान के खिलाफ उसकी आक्रामकता का समर्थन करके फ्रांस खुली पाखंडपूर्ण नीति अपना रहा है। आलोचकों का कहना है कि एक तरफ पेरिस खुद को मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थक बताता है, वहीं दूसरी तरफ वह गाजा में सैन्य अभियान के गंभीर परिणामों के बावजूद इजरायली शासन का समर्थन करता रहा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान भी फ्रांस ने ईरान-विरोधी कदमों का समर्थन किया।
कूटनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और गाजा संघर्ष को लेकर पश्चिमी देशों की विदेश नीति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं, और अराघची की यह सार्वजनिक प्रतिक्रिया इस तनाव को और गहरा करती है। गौरतलब है कि ईरान पर मृत्युदंड को लेकर यूरोपीय देशों की आलोचना नई नहीं है, लेकिन इस बार का संयुक्त बयान असामान्य रूप से व्यापक था।
आगे की स्थिति
फ्रांस के विदेश मंत्रालय की ओर से अराघची की इस पोस्ट पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, यह टकराव ईरान-पश्चिम संबंधों में बढ़ती खाई को रेखांकित करता है, जो परमाणु वार्ता और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच और जटिल होती जा रही है।