मणिपुर: भारतीय सेना के रेड शील्ड डिवीजन ने लेइमाखोंग गांव में दी 10,000 लीटर जल भंडारण सुविधा, 35 परिवारों को राहत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना के रेड शील्ड डिवीजन ने 16 अक्टूबर 2026 को ऑपरेशन सद्भावना के अंतर्गत मिलिट्री सिविक एक्शन (नागरिक-सैन्य सहयोग) के तहत मणिपुर के लेइमाखोंग स्थित एक गांव में 10,000 लीटर की जल भंडारण सुविधा स्थापित की। इस पहल से गांव के लगभग 35 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है और पानी की दीर्घकालिक किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद जगी है।
क्या थी समस्या
पर्याप्त जल भंडारण क्षमता के अभाव में गांव के निवासी पूरी तरह पानी के निरंतर प्राकृतिक बहाव पर निर्भर थे। सूखे के मौसम में जब जलस्रोतों का बहाव घट जाता था, तब ग्रामीणों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। यह स्थिति विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए कठिन बनती थी।
सेना की पहल और समाधान
इस व्यावहारिक आवश्यकता को समझते हुए भारतीय सेना ने गांव के मौजूदा जल अवसंरचना को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया। स्थापित की गई 10,000 लीटर की नई भंडारण टंकी ग्रामीणों को पर्याप्त जलापूर्ति के दौरान पानी संग्रह करने में सक्षम बनाएगी, ताकि सूखे के महीनों में भी जरूरतें पूरी की जा सकें। यह कदम ऑपरेशन सद्भावना के उस व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है जिसके तहत सेना जरूरत-आधारित नागरिक कार्यों और सामुदायिक कल्याण के जरिए स्थानीय समुदायों से विश्वास और सद्भावना का संबंध मजबूत करती है।
लेइमाखोंग का भौगोलिक और सामरिक महत्व
लेइमाखोंग मणिपुर के कांगपोकपी जिले में इम्फाल पश्चिम जिले की सीमा पर बसा एक छोटा कस्बा है। यह इम्फाल शहर से लगभग 30 किलोमीटर पश्चिम में लेइमाखोंग नदी के तट पर स्थित है, जो इम्फाल नदी की सहायक नदी है। इस कस्बे में कुकी, नेपाली और मैतेई समुदायों के लोग निवास करते हैं। गौरतलब है कि यहाँ भारतीय सेना के 57वें माउंटेन डिवीजन का मुख्यालय भी है, जिससे जुड़ा सैन्य अस्पताल घायल सैनिकों और आम नागरिकों दोनों की चिकित्सा में लंबे समय से सहायक रहा है।
आम जनता पर असर
इस सुविधा से पानी की उपलब्धता अधिक विश्वसनीय होगी और निवासियों को दूरदराज से पानी लाने की मशक्कत से मुक्ति मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में वर्षों से जातीय तनाव और सामाजिक विभाजन की खबरें सुर्खियों में रही हैं — ऐसे में सेना का यह नागरिक-केंद्रित कदम जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली का प्रयास भी माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
ऑपरेशन सद्भावना के तहत भारतीय सेना इस प्रकार की बुनियादी सुविधाएँ देश के संवेदनशील और दूरदराज के क्षेत्रों में उपलब्ध कराती रही है। लेइमाखोंग जैसे इलाकों में जल, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी पहलों के और विस्तार की संभावना है, जो सैन्य-नागरिक सहयोग के मॉडल को मजबूत आधार देती हैं।