जल जीवन मिशन 2.0: 11वें पेयजल संवाद में मानसून जल संरक्षण और 'कैच द रेन' अभियान पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
पेयजल और स्वच्छता सचिव अशोक केके मीणा ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को देशभर के जिला कलेक्टरों को संबोधित करते हुए मानसून सीजन में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने जिलों से 'कैच द रेन' जल संचय जन भागीदारी अभियान को ग्राम पंचायतों, छात्रों और स्वयं-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी से और अधिक गति देने को कहा। यह संवाद जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा आयोजित 'डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स पेयजल संवाद' का 11वाँ संस्करण था।
मुख्य घटनाक्रम
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, जिला मजिस्ट्रेटों और डिप्टी कमिश्नरों ने भाग लिया। संवाद का उद्देश्य जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के क्रियान्वयन में तेजी लाना और बेहतरीन कार्यप्रणालियों को आपस में साझा करना था। मीणा ने चार जिलों — उत्तर कन्नड़ (कर्नाटक), खोवाई (त्रिपुरा), डीडवाना कुचामन (राजस्थान) और चतरा (झारखंड) — की विशेष सराहना की, जिन्होंने स्रोत की निरंतरता, व्यवहार परिवर्तन, शिकायत निवारण और विभिन्न योजनाओं के एकीकरण (कन्वर्जेंस) में नवाचारी तरीके अपनाए।
सरकार की प्राथमिकताएँ
मीणा ने जिलों से स्रोत की दीर्घकालिक उपलब्धता के वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ण हो चुकी जल आपूर्ति योजनाओं के लिए 'जल अर्पण' समारोहों को तेज किया जाए, ताकि इन परिसंपत्तियों को औपचारिक रूप से ग्राम पंचायतों को सौंपा जा सके। इसके अलावा, सोर्स सस्टेनेबिलिटी और ग्रे-वाटर प्रबंधन के लिए वीबी-जी राम जी जैसे कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेंस पर भी बल दिया गया।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि देशभर में 2 लाख से अधिक गाँवों और 1 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने 'हर घर जल' सर्टिफिकेशन हासिल कर लिया है। मीणा ने इस उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अब इसे ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के समुदाय-संचालित प्रबंधन में रूपांतरित करना होगा। उन्होंने 16वें वित्त आयोग से संबंधित अनुदानों के प्रभावी उपयोग और ग्राम पंचायत स्तर पर यूजर चार्ज संग्रह पर भी ज़ोर दिया, ताकि जल बुनियादी ढाँचे का संचालन और रखरखाव टिकाऊ बना रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मानसून की अनिश्चितता और भूजल स्तर में गिरावट जल सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन रही है। जल प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार, समुदाय-आधारित दृष्टिकोण और वैज्ञानिक निगरानी तंत्र के बिना केवल बुनियादी ढाँचे का निर्माण दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता।
क्या होगा आगे
जिलों से अपेक्षा है कि वे 'कैच द रेन' अभियान को मानसून के शेष महीनों में और तेज करें तथा JJM 2.0 के तहत लंबित योजनाओं को शीघ्र पूरा करें। सरकार की मंशा है कि ग्राम पंचायतें जल आपूर्ति की स्वामित्व-भावना के साथ प्रबंधन करें, जो ग्रामीण भारत में जल सुरक्षा की दिशा में निर्णायक कदम होगा।